दिल्ली बम ब्लास्ट की जांच में आतंक साजिश की नई कड़ियाँ उजागर हो रही हैं। फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल के फोन से मिली जानकारी के बाद एजेंसियाँ अब एक दर्जन से अधिक डॉक्टर्स की तलाश में हैं, जिनका संपर्क कथित टेरर मॉड्यूल और अल-फलाह यूनिवर्सिटी नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है।
दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में हुए बम ब्लास्ट की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और एजेंसियों को साजिश के गहरे नेटवर्क के संकेत मिल रहे हैं। फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल के फोन डेटा की पड़ताल में जांचकर्ताओं को ऐसे कई नंबर मिले, जिनके पीछे एक दर्जन डॉक्टरों की भूमिका की आशंका जताई जा रही है। इन सभी का संबंध कथित टेरर मॉड्यूल और अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े नेटवर्क से होने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, लाल किला धमाके के बाद से इन डॉक्टरों के फोन लगातार बंद आ रहे हैं, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। पुलिस अब तक 10 से ज्यादा डॉक्टरों से पूछताछ कर चुकी है, जबकि बाकी की लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास जारी हैं। एजेंसियों का मानना है कि मॉड्यूल का मेडिकल पेशेवरों में फैलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती साबित हो सकता है।
मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों पर शिकंजा
जांच एजेंसियों ने फिरोजपुर झिरका और नूंह में छापेमारी कर तीन और डॉक्टर—डॉ. मोहम्मद, डॉ. रिहान और डॉ. मुस्तकीम—को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये डॉक्टर कथित टेरर मॉड्यूल से जुड़े थे और मुजम्मिल, फरार मुजफ्फर तथा विदेशी हैंडलर के जरिए कश्मीर को ‘दारुल इस्लाम’ बनाने की कथित साजिश में शामिल थे। एजेंसियों के अनुसार, ‘शरीयत या शहादत’ के नारे देकर इनका ब्रेनवॉश किया जा रहा था। बम धमाके से पहले डॉ. उमर लगातार विदेशी हैंडलर से वीडियो कॉल पर संपर्क में था, जिसने उसे हमले के लिए उकसाया।
विस्फोट में इस्तेमाल घातक मिश्रण
फोरेंसिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि लाल किले के पास हुए धमाके में अमोनियम नाइट्रेट और ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (TATP) का खतरनाक मिश्रण उपयोग किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 35 किलो अमोनियम नाइट्रेट इस धमाके में शामिल था, जबकि टीएटीपी जैसे उच्च-विस्फोटक की बिक्री पर कड़ी पाबंदियां होती हैं। यह संयोजन बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी माना जाता है।
जांच टीम ने हरियाणा की डॉ. प्रियंका शर्मा से भी पूछताछ की, जो संदिग्ध आदिल के संपर्क में थी और अनंतनाग में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है। हालांकि पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें किसी भी भूमिका के प्रमाण न मिलने पर छोड़ दिया।
एनआईए ने पकड़ा मुख्य साजिशकर्ता
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस केस में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए पंपोर निवासी आमिर राशिद अली को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार, विस्फोट में इस्तेमाल की गई आई-20 कार उसी के नाम से पंजीकृत थी और वह दिल्ली आकर साजिश को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।
एनआईए अब तक 73 गवाहों से पूछताछ कर चुकी है, जिनमें धमाके में घायल लोग भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि आमिर इस पूरी आतंकी योजना में मुख्य कड़ी है और उसकी गिरफ्तारी से मॉड्यूल की संरचना और नेटवर्क को तोड़ने में अहम सफलता मिलेगी।









