कुल्लू दशहरा 2026 शुरू, 347 देवी-देवताओं को न्योता; 366 साल पुरानी देव परंपरा बनेगी आकर्षण

कुल्लू दशहरा 2026 का आगाज 21 अक्टूबर से होगा। 347 देवी-देवता शामिल होंगे। रथयात्रा, देव मिलन और 10 देशों के सांस्कृतिक दल रहेंगे आकर्षण।

हिमाचल प्रदेश में 21 अक्टूबर से सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव शुरू हो रहा है। पहले दिन भगवान रघुनाथ की रथयात्रा और देव मिलन प्रमुख आकर्षण होंगे। इस बार 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया है और सुरक्षा के लिए 1,265 जवान तैनात हैं।

हिमाचल प्रदेश: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव बुधवार से शुरू हो रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देव आस्था, हिमाचली लोक परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। पहले दिन भगवान रघुनाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी, जबकि देव मिलन उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। इस वर्ष 347 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता उद्घाटन दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे।

भगवान रघुनाथ की रथयात्रा से होगा कुल्लू दशहरा का आगाज

हिमाचल प्रदेश का अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव 21 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में धार्मिक आस्था, पारंपरिक रीति-रिवाज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संगम देखने को मिलेगा। पहले दिन भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले देवी-देवताओं का मिलन श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा।

कुल्लू दशहरा 2026 शुरू, 347 देवी-देवताओं को न्योता; 366 साल पुरानी देव परंपरा बनेगी आकर्षण

इस वर्ष उत्सव में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता मुख्य अतिथि होंगे। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के 26 अक्टूबर को महोत्सव में शामिल होने का कार्यक्रम है। धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक संध्याओं में भी देश-विदेश की परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

1660 में शुरू हुई थी देवी-देवताओं को निमंत्रण देने की परंपरा

कुल्लू दशहरा में देवी-देवताओं को आमंत्रित करने की परंपरा करीब 366 वर्ष पुरानी है। इसकी शुरुआत वर्ष 1660 में तत्कालीन राजा के समय हुई थी। उस दौर में राजा की ओर से देवी-देवताओं को उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाता था। अब यह जिम्मेदारी प्रशासन निभाता है।

इस बार कुल 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है। वर्ष 2025 में दशहरा उत्सव समिति ने 332 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 304, वर्ष 2023 में 315 और वर्ष 2024 में 317 देवी-देवताओं ने उत्सव में उपस्थिति दर्ज कराई थी। वर्ष 2025 में 274 देवी-देवता महोत्सव में शामिल हुए थे।

प्रशासन की जांच में 347 देवी-देवताओं के पंजीकृत होने की जानकारी सामने आई थी। सूची में बदलाव और नए देवी-देवताओं के पंजीकरण से जुड़े मामलों में देवी-देवता कारदार संघ की स्वीकृति महत्वपूर्ण होती है। पंजीकृत देवी-देवताओं को ही निर्धारित नजराना राशि दी जाती है। कुछ देवी-देवता लंबे समय से उत्सव में नहीं आते, लेकिन उन्हें भी तय राशि भेजी जाती है।

1,265 जवान संभालेंगे सुरक्षा, 10 देशों के सांस्कृतिक दल होंगे शामिल

सात दिवसीय महोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1,265 जवान तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखने के लिए 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उत्सव की सांस्कृतिक संध्याओं में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भी देखने को मिलेगी। इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के सांस्कृतिक दल इसमें हिस्सा लेंगे।

कुल्लू दशहरा की पहचान केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यहां देवी-देवताओं की पारंपरिक भागीदारी, रथयात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थानीय विरासत को सामने लाते हैं। इस वर्ष भी प्राचीन देव परंपरा और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।

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