लीबिया में प्रवासी संकट: ब्रिटेन जा रहे 300 से अधिक लोगों के अपहरण, यातना और अंग निकालने की धमकी का खुलासा

BBC की जांच में खुलासा हुआ कि लीबिया में 300 से ज्यादा प्रवासियों का अपहरण कर उन्हें यातना दी गई और किडनी निकालने की धमकी दी गई। कई परिवारों ने फिरौती दी।

जांच में खुलासा हुआ है कि लीबिया में 300 से अधिक प्रवासियों का अपहरण कर उन्हें यातना दी गई और किडनी निकालने की धमकी दी गई। कई परिवारों ने फिरौती देकर अपने परिजनों को छुड़ाया, जबकि कुछ अब भी लापता हैं।

त्रिपोली: अंतरराष्ट्रीय प्रवासन मार्गों पर मानव तस्करी और शोषण का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें ब्रिटेन जाने की कोशिश कर रहे 300 से अधिक प्रवासियों को अपहरण, यातना और जबरन अंग निकालने की धमकियों का सामना करना पड़ा। यह खुलासा बीबीसी की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट में किया गया है, जिसने लीबिया के अंदर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क की भयावह तस्वीर पेश की है।

ये सभी पीड़ित इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से संबंधित बताए गए हैं, जिन्हें यूरोप पहुंचाने के बहाने लीबिया में एक सशस्त्र मिलिशिया द्वारा बंधक बना लिया गया।

मानव तस्करी गिरोह और अपहरण की साजिश

रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क मानव तस्करों और स्थानीय मिलिशिया के बीच गठजोड़ पर आधारित था। प्रवासियों को पहले लीबिया लाया गया, जहां उन्हें ब्रिटेन पहुंचाने के “रूट” का भरोसा दिया गया था।

लेकिन बाद में स्थिति बदल गई और उन्हें एक सुरक्षित यात्रा के बजाय एक बंद परिसर में कैद कर लिया गया। इसके बाद उनके परिवारों से प्रति व्यक्ति 5,000 डॉलर (लगभग 3,700 पाउंड) की फिरौती मांगी गई।

अंग निकालने की धमकी से दहशत

पीड़ितों और उनके परिवारों के अनुसार, मिलिशिया ने धमकी दी कि यदि फिरौती समय पर नहीं दी गई, तो बंदियों के गुर्दे (किडनी) निकाल लिए जाएंगे। कुछ मामलों में आरोप है कि लोगों पर जबरन ऑपरेशन भी किए गए, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

बीबीसी को मिले फोटो और वीडियो में कुछ बंदियों के शरीर पर सर्जरी जैसे निशान दिखाई दिए, जिससे आशंका और बढ़ गई है।

तंग और अमानवीय कैद की स्थिति

जो प्रवासी इस भयावह कैद से बचकर लौटे, उन्होंने बताया कि उन्हें बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया था। लगभग 180 लोगों को एक ही छोटे कमरे में बंद रखा गया था, जहां न तो पर्याप्त जगह थी और न ही बुनियादी सुविधाएं।

लीबिया में प्रवासी संकट: ब्रिटेन जा रहे 300 से अधिक लोगों के अपहरण, यातना और अंग निकालने की धमकी का खुलासा

एक 16 वर्षीय युवक ने बताया कि उन्हें छह महीने तक सूरज की रोशनी भी नहीं देखने दी गई। सभी कैदी बैठकर सोते थे और एक ही शौचालय साझा करते थे।

यातना और अमानवीय व्यवहार के आरोप

पीड़ितों ने बताया कि उन्हें शारीरिक यातना भी दी गई। कुछ मामलों में पैर जलाने जैसी क्रूरता की गई। भोजन भी बेहद सीमित मात्रा में दिया जाता था, और कभी-कभी केवल एक टुकड़ा रोटी ही उपलब्ध कराई जाती थी।

परिवारों का आरोप है कि अतिरिक्त पैसे न देने पर भोजन और बुनियादी जरूरतों से भी वंचित रखा जाता था।

स्मगलिंग नेटवर्क और लीबिया की अस्थिर स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार, लीबिया लंबे समय से मानव तस्करी का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। देश के कई हिस्सों में सरकार का नियंत्रण कमजोर है, और अलग-अलग मिलिशिया समूह क्षेत्रों पर कब्जा रखते हैं।

इसी अस्थिरता का फायदा उठाकर मानव तस्कर यूरोप जाने वाले प्रवासियों को निशाना बनाते हैं।

फिरौती और संदिग्ध अंग तस्करी के आरोप

कुछ परिवारों ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को छुड़ाने के लिए फिरौती का भुगतान किया। लेकिन कई मामलों में यह भी आशंका जताई गई है कि कुछ पीड़ितों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाया गया।

एक चिकित्सकीय विशेषज्ञ ने कुछ तस्वीरों को देखकर कहा कि निशान किडनी ऑपरेशन जैसे लगते हैं, हालांकि किसी भी प्रकार की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं की गई है।

अंतरराष्ट्रीय जांच और गिरफ्तारी

इस पूरे नेटवर्क की जांच के दौरान बीबीसी ने एक अन्य मानव तस्कर नेटवर्क का भी खुलासा किया, जिसके बाद एक प्रमुख तस्कर की गिरफ्तारी हुई है। यह संकेत देता है कि यूरोप पहुंचने वाले अवैध प्रवासन मार्गों पर संगठित अपराध सक्रिय है।

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के अधिकारियों ने लौटे हुए प्रवासियों से अपील की है कि वे अपने अनुभव साझा करें, ताकि अन्य लोग इस खतरनाक यात्रा से बच सकें। अधिकारियों का कहना है कि लगातार चेतावनी के बावजूद लोग अभी भी अवैध रूप से यूरोप जाने की कोशिश कर रहे हैं।

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