लगातार कमजोर हो रहा रुपया: विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर बढ़ा वित्तीय दबाव

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट से भारतीय छात्रों का मासिक और सालाना खर्च बढ़ा, परिवारों पर आर्थिक दबाव और विकल्प प्रभावित।

विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए रुपये की लगातार कमजोरी चिंता का कारण बन गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 90 रुपये पर पहुंच गया है, जिससे छात्रों का मासिक और सालाना खर्च बढ़ गया है। इस गिरावट ने परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है और कुछ छात्रों को पढ़ाई के विकल्प बदलने पर विचार करना पड़ रहा है।

विदेश में भारतीय छात्रों वित्तीय चुनौती: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने छात्रों का खर्च अचानक बढ़ा दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ाई कर रहे छात्र अब उच्च कॉलेज फीस, किराया, भोजन और यात्रा पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं। रुपये की कमजोरी के कारण मासिक खर्च 20–30 हजार रुपये बढ़ गया है, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति विदेशी शिक्षा की योजना बनाने वाले छात्रों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है।

गिरते रुपये से बढ़ा भारतीय छात्रों का खर्च

विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के लिए रुपये की गिरावट ने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोरी के कारण छात्रों का मासिक और सालाना खर्च अचानक बढ़ गया है। अब एक डॉलर लगभग 90 रुपये के आसपास पहुंच गया है, जिससे पहले से महंगे शिक्षा खर्च में और बढ़ोतरी हो गई है।

छात्रों के खर्च पर सीधा असर

विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों को कॉलेज फीस, किराया, खाने-पीने और यात्रा खर्च सभी विदेशी मुद्रा में चुकाना पड़ता है। रुपये की गिरावट ने इन खर्चों को स्वतः महंगा बना दिया है। पिछले आठ नौ महीनों में रुपया लगभग 84 रुपये से फिसलकर 90 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। कई छात्रों का कहना है कि मासिक खर्च 20–30 हजार रुपये तक बढ़ गया है, जिससे सालाना 2–3 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ बन गया है।

विदेश में पढ़ाई के दौरान छात्रों के लिए पार्ट-टाइम जॉब की आवश्यकता भी बढ़ी है। कई छात्र पढ़ाई के साथ-साथ खर्च संभालने के लिए काम कर रहे हैं। परिवारों को भी हर रुपये का हिसाब लगाते हुए पैसा भेजना पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

लगातार कमजोर हो रहा रुपया: विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर बढ़ा वित्तीय दबाव

विदेश में पढ़ाई की बढ़ती संख्या और खर्च

ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में लगभग 7.6 लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए। पांच साल पहले यह संख्या सिर्फ 2.6 लाख थी। इसके अलावा, वीजा और प्रोसेसिंग फीस में लगभग 4% तक की बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी कॉलेजों की औसत फीस में भी हर साल 2–3 लाख रुपये का इजाफा होता है।

कुछ छात्र रुपये की कमजोरी के कारण देशों के विकल्प बदलने पर विचार कर रहे हैं। जैसे अमेरिका में पढ़ाई महंगी पड़ रही है, वे कम खर्च वाले देशों की ओर भी देख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की लगातार कमजोरी और विदेशी मुद्रा के बढ़ते रेट छात्रों की शिक्षा योजनाओं पर असर डाल रहे हैं।

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