LIC को झटका: मोगा कारोबारी हत्याकांड में 26.50 लाख का दुर्घटना बीमा देना होगा, 6% ब्याज भी लगेगा

: पंजाब उपभोक्ता आयोग ने LIC को मोगा कारोबारी की हत्या के मामले में ₹26.50 लाख दुर्घटना बीमा, 6% सालाना ब्याज और ₹50,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।

पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने मोगा कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की हत्या के मामले में एलआईसी को चार बीमा पॉलिसियों के तहत 26.50 लाख रुपये का दोहरा दुर्घटना लाभ देने का आदेश दिया है। कंपनी को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 50 हजार रुपये मुआवजा भी देना होगा।

चंडीगढ़: पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोगा कारोबारी हत्याकांड में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की पत्नी, बेटे और मां की अपील स्वीकार करते हुए चार बीमा पॉलिसियों के तहत 26.50 लाख रुपये का दोहरा दुर्घटना लाभ देने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा कि हत्या का सुनियोजित होना अपने आप में बीमा लाभ खारिज करने का आधार नहीं है।

मोगा कारोबारी की हत्या के बाद रोका गया था बीमा दावा

मोगा में 14 जुलाई 2020 को कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की उनकी दुकान पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी। उनकी पत्नी रिपनदीप कौर कंबो चार बीमा पॉलिसियों में नामित थीं। एलआईसी ने कारोबारी की मृत्यु के बाद मूल बीमा राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने से इनकार कर दिया।

LIC को झटका: मोगा कारोबारी हत्याकांड में 26.50 लाख का दुर्घटना बीमा देना होगा, 6% ब्याज भी लगेगा

30 अप्रैल 2021 को जारी अस्वीकृति पत्र में एलआईसी ने हत्या को सुनियोजित बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर कथित हमलावर की पोस्ट और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का हवाला दिया था। निगम का दावा था कि हत्या गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लम्मे से जुड़ी थी और इसका उद्देश्य इलाके में दहशत फैलाना था।

उपभोक्ता आयोग ने एलआईसी के फैसले को पलटा

कारोबारी के परिवार ने एलआईसी के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे मृतक के गैंगस्टरों की गतिविधियों से जुड़े होने या हमले को उकसाने की पुष्टि हो। पंजाब राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी पाया कि कथित विवाद की पुष्टि प्राथमिकी या मोगा के डीएसपी सिटी की रिपोर्ट से नहीं होती। रिकॉर्ड में मृतक को पहले धमकी मिलने या आरोपितों के साथ उसकी बातचीत का प्रमाण भी नहीं मिला।

न्यायिक सदस्य एचपीएस महल और सदस्य किरण सिब्बल की पीठ ने 13 अक्टूबर को सुनाए फैसले में मोगा जिला उपभोक्ता आयोग का 29 नवंबर 2022 का आदेश रद कर दिया। जिला आयोग ने पहले परिवार की शिकायत खारिज कर दी थी।

राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि हत्या करने का इरादा और मृतक की मृत्यु का बीमा पॉलिसी के तहत दुर्घटना से हुई मृत्यु की श्रेणी में आना अलग-अलग प्रश्न हैं। केवल अपराध का पहले से नियोजित होना अतिरिक्त दुर्घटना लाभ रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।

छह प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये मुआवजा भी देना होगा

आयोग ने एलआईसी के 15 अक्टूबर 2007 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पुलिस रिकॉर्ड से यह संकेत नहीं मिलता कि हत्या मृतक ने स्वयं उकसाई थी या दावेदार की उसमें कोई भूमिका थी, तो दुर्घटना लाभ का दावा नहीं रोका जाना चाहिए। आयोग के अनुसार, एलआईसी यह साबित नहीं कर सकी कि कारोबारी की मृत्यु पॉलिसियों के दायरे से बाहर थी।

आदेश के मुताबिक, एलआईसी को चारों पॉलिसियों के तहत दोहरा दुर्घटना लाभ देना होगा। इसके साथ 30 अप्रैल 2021 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कंपनी को 50 हजार रुपये की संयुक्त मुआवजा राशि और मुकदमे का खर्च भी चुकाना होगा।

यह राशि कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां को बराबर हिस्सों में दी जाएगी। भुगतान आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर करना होगा। परिवार ने कुल 26.60 लाख रुपये का दावा किया था, जबकि आयोग ने अंतिम देय राशि का अलग से निर्धारण नहीं किया।

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