महाराजगंज (उत्तर प्रदेश): सोनौली से झुलनीपुर तक नेपालभारत खुली सीमा के पास अब तक छिटपुट धूप लकड़ी तस्करी की घटनाओं के बाद यह अवैध कारोबार अब सिंडिकेट रूप में सक्रिय दिख रहा है। स्थानीय स्रोतों के अनुसार एक नेटवर्क जिसे स्थानीय स्तर पर “पुष्पाराज” के नाम से जाना जा रहा है, नेपाल से अवैध धूप की लकड़ी ला रहा है और भारतीय सीमा में प्रवेश के बाद इसे दोगुने दामों में बेच रहा है।
सूत्रों का कहना है कि नेपाल के पर्वतीय व तराई क्षेत्रों से लाई जा रही कीमती धूप की लकड़ी पहले साइकिल, पैदल या छोटे वाहनों के जरिए लाई जाती थी, लेकिन अब बड़ी मात्रा में ट्रांसपोर्ट के तरीके अपनाए जा रहे हैं जिससे यह प्रतिबंधित व्यापार एक संगठित रैकेट जैसा रूप ले रहा है।
इस अवैध लकड़ी का उपयोग पूजापाठ, धूपबत्ती, अरोमाथेरपी और आयुर्वेदिक औषधियों की सामग्री बनाने के लिए किया जाता है और बाजार में इसकी मांग बनी हुई है, जिससे तस्करों को भारी लाभ मिल रहा है।
सीमा सुरक्षा बलों और वन विभाग की टीमें अब इस गतिविधि पर सख्त नजर रख रही हैं और बरामदगी को बढ़ाने के प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों ने कहा है कि तस्करों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है और अवैध लकड़ी तस्करी रोकने के लिए गश्त और निगरानी को बढ़ाया गया है।
इस मामले ने स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि सीमापार से हो रही अवैध वस्तुओं की तस्करी न केवल प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान का कारण बनती है, बल्कि कानूनव्यवस्था और सीमा सुरक्षा चुनौती भी खड़ी करती है।









