माल्टा की खोजी पत्रकार डाफ्ने कारुआना गालिजिया की 2017 में हुई कार बम हत्या के मामले में कारोबारी यॉर्गेन फेनेच को अदालत ने बरी कर दिया। अभियोजन ने उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताया था। परिवार और प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने फैसले पर नाराजगी जताई।
वर्ल्ड न्यूज़: माल्टा की चर्चित खोजी पत्रकार डाफ्ने कारुआना गालिजिया की हत्या के मामले में कारोबारी यॉर्गेन फेनेच को अदालत ने बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष ने फेनेच पर 2017 में कार बम विस्फोट के जरिए पत्रकार की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था। अदालत के इस फैसले के बाद पत्रकार के परिवार और प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने निराशा और नाराजगी जाहिर की है। 53 वर्षीय डाफ्ने कारुआना गालिजिया की हत्या ने माल्टा की राजनीति को हिलाकर रख दिया था। वह देश में भ्रष्टाचार और सत्ता के ऊंचे स्तरों पर कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाली प्रमुख खोजी पत्रकार थीं। उनकी हत्या के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और इस मामले ने माल्टा की सरकार पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
अदालत के फैसले पर परिवार ने जताई निराशा
यॉर्गेन फेनेच के बरी होने के बाद डाफ्ने कारुआना गालिजिया के परिवार ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। परिवार ने कहा कि फेनेच को बरी किया जाना पत्रकार को वह न्याय नहीं मिलने के समान है जिसकी वह हकदार थीं।
उनके बेटे मैथ्यू कारुआना गालिजिया ने भी फैसले को बेहद निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि जूरी का निर्णय ऐसा है जिससे देश को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है। परिवार का कहना है कि हत्या के पीछे मौजूद सभी लोगों की जवाबदेही तय किए बिना यह मामला पूरी तरह न्याय तक नहीं पहुंच सकता।
परिवार ने यह भी कहा कि पत्रकार की हत्या के करीब नौ साल बाद भी उन संस्थागत खामियों में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है, जिनके कारण हत्या के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ था।
कौन थीं डाफ्ने कारुआना गालिजिया?
डाफ्ने कारुआना गालिजिया माल्टा की सबसे प्रभावशाली खोजी पत्रकारों में शामिल थीं। उन्हें भ्रष्टाचार, राजनीतिक प्रभाव और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े मामलों की पड़ताल के लिए जाना जाता था। उनकी रिपोर्टों में देश के राजनीतिक और कारोबारी प्रतिष्ठानों के बीच कथित संबंधों पर लगातार सवाल उठाए जाते थे।
उनकी निर्भीक पत्रकारिता के कारण उन्हें कभी-कभी एक महिला विकीलीक्स जैसी उपमा भी दी जाती थी। वह सत्ता में बैठे लोगों और प्रभावशाली कारोबारियों से जुड़े मामलों को सार्वजनिक करने के लिए जानी जाती थीं।
अक्टूबर 2017 में उनकी कार में विस्फोट हुआ, जिसमें उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद माल्टा में राजनीतिक व्यवस्था और कानून के शासन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई।
हत्या ने माल्टा की राजनीति में पैदा किया संकट
डाफ्ने की हत्या के बाद माल्टा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस घटना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट की सरकार पर भी दबाव बढ़ाया। आलोचकों ने उन पर अपने करीबी लोगों और सहयोगियों को जांच से बचाने की कोशिशों को लेकर सवाल उठाए थे।
लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच जोसेफ मस्कट ने जनवरी 2020 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने माल्टा में लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनीतिक जवाबदेही और कानून के शासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
माल्टा यूरोपीय संघ का सबसे छोटा सदस्य देश है। पत्रकार की हत्या ने इस छोटे यूरोपीय देश को वैश्विक सुर्खियों में ला दिया और वहां की संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय निगाहें टिक गईं।
सरकारी जांच में भी उठे थे गंभीर सवाल
हत्या के बाद गठित सार्वजनिक जांच आयोग ने जुलाई 2021 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। तीन न्यायाधीशों के पैनल की 437 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
रिपोर्ट में राजनीतिक नेताओं की ओर से पत्रकार के खिलाफ व्यक्तिगत हमलों और सार्वजनिक बयानों का भी उल्लेख किया गया था। जांच में कहा गया कि सरकार की ओर से बनाए गए कथित दंडमुक्ति के माहौल ने ऐसा वातावरण तैयार किया, जिसमें पत्रकार की हत्या के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसे संकेत भी मिले कि हत्या में शामिल लोगों को भरोसा था कि उन्हें राज्य के ऊंचे पदों पर बैठे प्रभावशाली लोगों से संरक्षण मिल सकता है। इन निष्कर्षों ने माल्टा की राजनीतिक और संस्थागत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
यॉर्गेन फेनेच की गिरफ्तारी कैसे हुई?
यॉर्गेन फेनेच माल्टा के एक प्रभावशाली कारोबारी हैं, जिनके कारोबारी हित ऊर्जा और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों में फैले हुए थे। उन्हें 2019 में एक नौका पर गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह माल्टा से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि फेनेच ने पत्रकार की हत्या की साजिश को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई। अभियोजन के अनुसार डाफ्ने एक ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित करने के करीब थीं, जिसमें फेनेच के एक रिश्तेदार से जुड़ी कथित संवेदनशील जानकारी सामने आ सकती थी।
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हालांकि फेनेच ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया और अदालत में अभियोजन की ओर से पेश मामले के बावजूद जूरी ने उन्हें दोषी नहीं माना। अब बरी होने के बाद पत्रकार की हत्या के पीछे कथित मुख्य साजिशकर्ता की पहचान और जवाबदेही को लेकर सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं।
हत्या से जुड़े पांच लोग दोषी ठहराए जा चुके
डाफ्ने कारुआना गालिजिया की हत्या की पूरी साजिश में शामिल कई लोगों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। हत्या में इस्तेमाल विस्फोटक उपलब्ध कराने के आरोप में रॉबर्ट एगियस और जेमी वेला को जून 2025 में दोषी ठहराया गया था। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
हत्या को अंजाम देने वाले तीन लोगों जॉर्ज डीगियोर्जियो, अल्फ्रेड डीगियोर्जियो और विंस मस्कट को भी दोषी ठहराया जा चुका है। विंस मस्कट हत्या में अपनी भूमिका के लिए 15 साल की जेल की सजा काट रहे हैं।
इस तरह हत्या को अंजाम देने और विस्फोटक उपलब्ध कराने से जुड़े कई मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है, लेकिन फेनेच के बरी होने के बाद कथित मुख्य साजिशकर्ता की जवाबदेही का सवाल अभी भी चर्चा में है।
प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने फैसले की आलोचना की
अदालत के फैसले पर प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। यूरोपीय प्रेस और मीडिया स्वतंत्रता केंद्र ने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए चिंताजनक संदेश भेजता है जो पत्रकारों पर हमला करते हैं या उनकी हत्या करते हैं।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने भी फैसले पर गहरी नाराजगी जताई। संगठन के अनुसार डाफ्ने की हत्या के लगभग नौ साल बाद भी माल्टा के अधिकारी कथित मुख्य साजिशकर्ता को दोषी ठहराने में सफल नहीं हुए हैं।
संगठन ने पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े लंबे समय से लंबित सुधारों को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। उसका कहना है कि पत्रकारों को अपना काम स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल में करने का अधिकार मिलना चाहिए।
माल्टा सरकार ने फैसले पर क्या कहा?
माल्टा सरकार ने अदालत के फैसले को संज्ञान में लेने की बात कही। सरकार ने कहा कि वह न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, फैसले के बाद सरकार पर यह दबाव बढ़ सकता है कि पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया स्वतंत्रता को लेकर पहले से सामने आई संस्थागत चिंताओं पर ठोस कदम उठाए जाएं।
डाफ्ने कारुआना गालिजिया की हत्या आज भी माल्टा में पत्रकारिता, राजनीति और कानून के शासन से जुड़ी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फेनेच के बरी होने से मामले का कानूनी और राजनीतिक महत्व एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आया है।
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हत्या की पूरी साजिश में शामिल सभी लोगों की जवाबदेही तय हो पाएगी। पत्रकार के परिवार और प्रेस स्वतंत्रता संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि हत्या के पीछे मौजूद हर स्तर की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों को कानून के अनुसार सजा मिले।








