ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की मांग की, हिरासत बढ़ने पर सरकार को घेरा

ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की दो दिन की बढ़ी न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए। उन्होने इसे सरकारी दमन बताते हुए दोनों युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग की।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने पर विरोध जताया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को सरकारी दमन बताते हुए दोनों की तत्काल रिहाई की मांग की।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में हिरासत में रखे गए युवा नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दोनों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए पुलिस कार्रवाई को ‘स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद’ और लोकतंत्र पर हमला करार दिया। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए आरोप लगाया कि देश में युवाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। दोनों को 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था, जहां उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।

ममता बनर्जी ने क्या कहा?

ममता बनर्जी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि वह आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे की मंशा को समझ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में एक ऐसा खतरनाक माहौल बनाया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी का जिक्र करते हुए कहा कि ‘जेन Z’ के लड़के-लड़कियों को प्रताड़ित करना बंद किया जाना चाहिए। ममता के मुताबिक, सत्ता में बैठे लोग हमेशा सत्ता में नहीं रहेंगे और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां भी स्थायी नहीं हैं।

उन्होंने कोलकाता, दिल्ली और मुंबई का उल्लेख करते हुए दावा किया कि देश के विभिन्न हिस्सों में अत्याचार बढ़ रहे हैं। हालांकि, ये ममता बनर्जी के राजनीतिक आरोप हैं। इन बयानों को किसी न्यायिक निष्कर्ष या सरकार की ओर से स्वीकार किए गए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

‘यह स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद है’: ममता

अपने बयान में ममता बनर्जी ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे ‘स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद’ बताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार में बैठे कुछ नेता लोकतांत्रिक आवाजों और युवाओं के विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

ममता ने अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र और देश की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ खड़े होने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि जनता अंततः जीत हासिल करेगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वालों को राजनीतिक जवाब मिलेगा।

उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में स्पष्ट मांग रखी कि यदि सरकार लोकतंत्र में विश्वास करती है, तो आशुतोष रांका और सौरव दास को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

ममता बनर्जी की यह टिप्पणी विपक्षी दलों और युवा संगठनों की ओर से गिरफ्तारी तथा हिरासत की कार्रवाई पर उठाए जा रहे सवालों के बीच आई है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अदालत में अपनी दलीलों के जरिए हिरासत जारी रखने की जरूरत बताई है।

आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत क्यों बढ़ाई गई?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट को पार कर उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे हाल ही में अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया था।

पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद उनकी रिहाई के लिए कानूनी प्रयास किए गए। 19 अक्टूबर को दोनों को मंदिर मार्ग पुलिस थाने में नियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि दोनों की रिहाई से क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, दोनों नेताओं की कानूनी टीम ने हिरासत और रिहाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और विवाद की वजह

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। हाल ही में इसे अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद यहां विरोध-प्रदर्शन को लेकर विवाद पैदा हुआ।

कॉकroach जनता पार्टी से जुड़े नेताओं का विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर बताया गया है। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मतदाता सूची में बदलाव और कथित पक्षपात को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित संस्थाओं और राजनीतिक पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं।

इसी विवाद के बीच आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत का मामला सामने आया। पुलिस का पक्ष है कि प्रदर्शन स्थल से जुड़े प्रतिबंधों और शांति बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई के संदर्भ में दोनों के खिलाफ कदम उठाए गए। दूसरी ओर, उनके समर्थक और कुछ विपक्षी नेता इस कार्रवाई को विरोध की आवाज दबाने से जोड़कर देख रहे हैं।

जमानत और रिहाई की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने के साथ ही जमानत और रिहाई की प्रक्रिया भी चर्चा में है। उनकी कानूनी टीम की ओर से आरोप लगाया गया है कि रिहाई की कार्यवाही में देरी हुई और जमानतदारों से संबंधित दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां उठाई गईं। इन आरोपों के बीच दोनों को तत्काल राहत नहीं मिल सकी।

दूसरी ओर, अदालत की कार्यवाही में पुलिस की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने शांति बनाए रखने से संबंधित पूर्व में दिए गए आश्वासनों और कथित उल्लंघन को हिरासत बढ़ाने के निर्णय के संदर्भ में देखा।

इस मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। हिरासत बढ़ाने का न्यायिक आदेश अपने आप में ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए सरकारी दमन के आरोपों की पुष्टि नहीं करता। इसी तरह, विपक्ष की आलोचना से पुलिस की कानूनी दलीलें स्वतः गलत साबित नहीं होतीं।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस के बीच मामला अहम

आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत का मामला अब केवल दो नेताओं की रिहाई तक सीमित नहीं रह गया है। इससे प्रदर्शन करने के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रतिबंधों की सीमा जैसे मुद्दों पर बहस तेज हुई है।

ममता बनर्जी ने इसे युवाओं और लोकतंत्र से जोड़ते हुए तत्काल रिहाई की मांग की है। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला दिया है। आगे की कानूनी कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि हिरासत और रिहाई से संबंधित सवालों पर क्या निर्णय होता है।

फिलहाल, 20 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं और मामले की अगली कानूनी कार्यवाही पर नजर बनी हुई है।

स्रोत-आधार: मामले की हिरासत संबंधी जानकारी और पुलिस तथा कानूनी पक्षों की दलीलों के लिए हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे और द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टों का संदर्भ लिया गया है। ममता बनर्जी के बयान को उनके आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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