हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मंडी जिले में चिट्टा तस्करी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि नशे की खेप को किसी सुनसान जगह या वाहन में रखने के बजाय घर के अंदर ही छिपाकर रखा गया था। पुलिस कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तलाशी के दौरान रसोईघर में एक डिब्बे के भीतर चिट्टा छिपाकर रखे जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि घर से कथित तौर पर चल रहा यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसके तार मंडी के अलावा दूसरे इलाकों से भी जुड़े हुए हैं या नहीं।
मंडी में सामने आया यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नशे की तस्करी करने वाले लोग पुलिस की नजर से बचने के लिए अब अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस के लिए केवल सड़क पर या सार्वजनिक स्थानों पर नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों तक पहुंचना पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि ऐसे ठिकानों की भी पहचान करनी पड़ रही है जहां घर या निजी परिसर का इस्तेमाल कथित तौर पर नशे के भंडारण या सप्लाई के लिए किया जा सकता है।
पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई में संदिग्धों के घर की तलाशी ली गई। इसी दौरान रसोईघर में रखे एक डिब्बे से कथित चिट्टा बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की है। बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा, आरोपियों की भूमिका और पूरे मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच पुलिस की ओर से की जा रही है। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड लेकर उनसे पूछताछ कर सकती है, ताकि सप्लाई चेन से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
पुलिस के लिए इस मामले में सबसे अहम कड़ी यह पता लगाना है कि कथित तौर पर घर में रखी गई नशीले पदार्थ की खेप कहां से लाई गई थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और क्या गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपी एक ही नेटवर्क का हिस्सा थे या उनकी भूमिकाएं अलग-अलग थीं। ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और लेनदेन समेत अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करती है, ताकि सप्लाई के स्रोत और संभावित खरीदारों की जानकारी मिल सके।
मंडी और आसपास के क्षेत्रों में चिट्टा यानी हेरोइन की तस्करी के खिलाफ पुलिस पहले भी कई कार्रवाई कर चुकी है। जून 2026 में मंडी जिले के बल्ह उपमंडल में सड़क हादसे के बाद एक वाहन से 57.79 ग्राम चिट्टा और 3.81 ग्राम अफीम बरामद हुई थी। उस मामले में पुलिस ने एक युवक और एक युवती को गिरफ्तार किया था और जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई थी कि नशीला पदार्थ कहां से आया और इसे किसे सप्लाई किया जाना था।
हाल के दिनों में हिमाचल के दूसरे जिलों में भी पुलिस ने चिट्टा तस्करी के खिलाफ अभियान तेज किया है। शिमला पुलिस ने सितंबर की शुरुआत में तीन अलग-अलग मामलों में पांच लोगों को गिरफ्तार करने और करीब 37 ग्राम चिट्टा तथा 7 ग्राम एमडीएमए बरामद करने की जानकारी दी थी। पुलिस ने इन मामलों में आरोपियों के कथित नेटवर्क और नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू की है।
सोलन में भी पुलिस की विशेष जांच इकाई ने हाल में दो मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इन मामलों में कुल 34.69 ग्राम चिट्टा बरामद होने की जानकारी सामने आई और पुलिस ने डिजिटल वेइंग मशीन तथा एक मोटरसाइकिल भी जब्त की। पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की, ताकि नशे की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
हिमाचल पुलिस की रणनीति अब केवल नशे की छोटी खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं जो कथित तौर पर बड़े स्तर पर नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे हैं। इसे पुलिस की भाषा में बैकवर्ड लिंक या बैकवर्ड लिंकेज की जांच कहा जाता है। पहले पकड़े गए आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर सप्लायर तक पहुंचने और फिर सप्लाई के स्रोत की पहचान करने की कोशिश की जाती है।
बिलासपुर पुलिस ने भी सितंबर में ऐसे ही एक मामले में कथित मुख्य सप्लायर को पंजाब के रोपड़ से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार यह आरोपी बिलासपुर और मंडी क्षेत्र में चिट्टे की सप्लाई से जुड़ा हुआ था। यह कार्रवाई पहले से गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई थी।
मंडी के ताजा मामले में घर के रसोईघर से कथित रूप से चिट्टा बरामद होने की बात सामने आने के बाद पुलिस के सामने एक अलग चुनौती भी है। यदि किसी आवासीय परिसर का इस्तेमाल नशीले पदार्थों को छिपाने या आगे पहुंचाने के लिए किया जा रहा था, तो ऐसे मामलों में आसपास रहने वाले लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं हो सकती। इसलिए पुलिस के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और क्या घर का इस्तेमाल केवल भंडारण के लिए किया जाता था या वहां से सीधे ग्राहकों तक नशा पहुंचाने का काम भी होता था।
जांच के दौरान पुलिस यह भी देख सकती है कि बरामद चिट्टा किस तरह पैक किया गया था और क्या उसके साथ तस्करी या बिक्री से जुड़ी अन्य सामग्री मिली है। यदि मौके से डिजिटल तराजू, पैकिंग सामग्री, नकदी या अन्य संदिग्ध सामान मिलता है तो वह जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। हालांकि किसी भी आरोपी की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष अदालत में चलने वाली कानूनी प्रक्रिया और जांच के परिणाम के आधार पर ही माना जाएगा।
चिट्टा हिमाचल प्रदेश में पुलिस और प्रशासन के लिए लगातार गंभीर चुनौती बना हुआ है। पहाड़ी राज्य होने के बावजूद राज्य के कई हिस्से नशीले पदार्थों की अंतरराज्यीय सप्लाई के रास्ते से जुड़े हुए हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की जांच कई मामलों में सामने आती रही है। इसी वजह से हिमाचल पुलिस दूसरे राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर सप्लाई चेन को तोड़ने पर जोर दे रही है।
शिमला पुलिस ने भी हालिया कार्रवाई के दौरान बताया था कि वह नशा तस्करी के मामलों में बैकवर्ड लिंकेज पर काम कर रही है। सितंबर की कार्रवाई में पंजाब, चंडीगढ़ और हरियाणा से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि हिमाचल में पकड़ी जाने वाली नशीले पदार्थों की खेप के पीछे कई बार अंतरराज्यीय नेटवर्क की भूमिका की जांच करनी पड़ती है।
मंडी में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस की जांच का अगला चरण कथित सप्लायर और खरीदारों तक पहुंचना होगा। पांच आरोपियों से पूछताछ में यदि किसी बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आती है तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस यह भी जांच सकती है कि बरामद खेप मंडी में ही खपाई जानी थी या इसे जिले के दूसरे क्षेत्रों में पहुंचाया जाना था।
इस तरह की कार्रवाई का एक अहम पहलू स्थानीय स्तर पर लोगों की भूमिका भी है। यदि किसी घर, किराये के कमरे या अन्य स्थान पर लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियां चल रही हों और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हो, तो समय रहते पुलिस को सूचना देना नशे के नेटवर्क को रोकने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति पर केवल संदेह के आधार पर आरोप लगाना उचित नहीं है और किसी भी सूचना की जांच पुलिस द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए।
मंडी में रसोईघर के डिब्बे में कथित रूप से छिपाकर रखी गई चिट्टे की खेप का मामला यह दिखाता है कि नशा तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। पुलिस के लिए अब सार्वजनिक स्थानों, वाहनों और सड़कों के साथ-साथ निजी परिसरों पर भी मिलने वाली सूचनाओं की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं, ऐसे मामलों में केवल छोटे स्तर के आरोपियों को पकड़ने के बजाय पूरे नेटवर्क की पहचान करना ज्यादा जरूरी है, ताकि नशीले पदार्थ की सप्लाई का स्रोत ही कमजोर किया जा सके।
फिलहाल पांचों आरोपियों के खिलाफ पुलिस की जांच जारी है। बरामद नशीले पदार्थ की फोरेंसिक और कानूनी प्रक्रिया, आरोपियों से पूछताछ और उनके संपर्कों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंडी में कथित तौर पर चल रहा यह नेटवर्क कितना बड़ा था। पुलिस की कोशिश अब इस मामले को केवल पांच गिरफ्तारियों तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे मौजूद संभावित सप्लाई चेन तक पहुंचने की होगी।










