पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। टॉप 10 कंपनियों का मार्केट कैप 4.48 लाख करोड़ घटा। SBI, HDFC, TCS और एयरटेल में भारी नुकसान, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं।
Market Cap: पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा। मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 4,354.98 अंक यानी 5.51 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर टॉप 10 कंपनियों के मार्केट कैप पर पड़ा। कुल मिलाकर इन कंपनियों का मार्केट वैल्यूएशन 4.48 लाख करोड़ रुपये कम हो गया। निवेशकों के लिए यह चेतावनी का संकेत है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार पर भी गहरा असर डाल रही हैं।
SBI को सबसे ज्यादा नुकसान
पिछले सप्ताह सबसे बड़ा नुकसान भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI के शेयरों में देखा गया। SBI का मार्केट कैप 89,306.22 करोड़ रुपये घटकर 9,66,261.05 करोड़ रुपये पर आ गया। बैंक के शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट से न केवल निवेशकों की चिंता बढ़ी है बल्कि बैंकिंग सेक्टर की अल्पकालिक स्थिति भी अस्थिर दिख रही है।
एसबीआई के बाद HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। HDFC बैंक का मार्केट कैप 61,715.32 करोड़ रुपये घटकर 12,57,391.76 करोड़ रुपये पर आ गया। दोनों बैंकों की इस गिरावट ने घरेलू बैंकिंग सेक्टर के लिए सतर्क रहने का संकेत दिया है।
बजाज फाइनेंस और TCS के मार्केट कैप में कमी
बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप भी पिछले सप्ताह काफी घटा। कंपनी की वैल्यूएशन में 59,082.49 करोड़ रुपये की गिरावट आई और इसका मार्केट कैप 5,32,053.54 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
वहीं, आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS का मार्केट कैप 53,312.52 करोड़ रुपये घटकर 8,72,067.63 करोड़ रुपये रह गया। TCS के शेयरों में गिरावट ने IT सेक्टर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ICICI बैंक और अन्य बड़े बैंक भी प्रभावित
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप भी 42,205.04 करोड़ रुपये घटकर 8,97,844.78 करोड़ रुपये पर आ गया। इससे स्पष्ट है कि बैंकिंग सेक्टर में केवल SBI और HDFC बैंक ही नहीं बल्कि अन्य बड़े बैंक भी वैश्विक तनाव के कारण प्रभावित हुए हैं।
इन गिरावटों ने निवेशकों को अल्पकालिक रणनीति पर ध्यान देने और पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की जरूरत महसूस कराई है।
भारती एयरटेल, रिलायंस, LIC और इन्फोसिस की वैल्यूएशन में भारी नुकसान
टीम इंफ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार कंपनियों के शेयर भी प्रभावित हुए। भारती एयरटेल का मार्केट कैप 38,688.78 करोड़ रुपये घटकर 10,28,431.72 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यूएशन में 33,289.88 करोड़ रुपये की गिरावट आई और इसका मार्केट कैप 18,68,293.17 करोड़ रुपये पर रहा।
इसके अलावा, सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी LIC का मार्केट कैप 31,245.49 करोड़ रुपये घटकर 4,88,985.57 करोड़ रुपये पर आ गया।
इन्फोसिस का मार्केट कैप भी 24,230.96 करोड़ रुपये कम होकर 5,06,315.58 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि IT और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी निवेशकों ने पिछले सप्ताह नकारात्मक रूप से देखा।
हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन में गिरावट
कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप भी प्रभावित हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 15,401.57 करोड़ रुपये घटकर 5,07,640.94 करोड़ रुपये पर आ गया। इससे पता चलता है कि FMCG सेक्टर में भी निवेशकों ने सतर्कता बरती और गिरावट की आशंका में बिक्री की।
इस गिरावट का असर न केवल टॉप कंपनियों के मार्केट कैप पर पड़ा बल्कि बाजार में निवेशकों की भावना को भी कमजोर किया।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल-ईस्ट में संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर असर डाला है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है और घरेलू निवेशकों में डर की भावना उत्पन्न हुई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इंडियन इंडस्ट्रीज़ के खर्च को बढ़ाती हैं और निवेशकों के रिटर्न पर असर डालती हैं। यही कारण है कि पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली।









