Market This Week: निफ्टी-50 और सेंसेक्स इस सप्ताह 5% से अधिक टूटे, तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार में निवेशकों की बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निफ्टी-50 5.3% और सेंसेक्स 5.5% गिरा। निवेशकों को भारी नुकसान, ऑटो और वित्तीय सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित।

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ती तेल कीमतों से दबाव में रहा। निफ्टी-50 5.3% और सेंसेक्स 5.5% गिरा। ऑटो और वित्तीय सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, निवेशकों को कुल 19,34,973 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

Market This Week: इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। शुक्रवार, 13 मार्च को निफ्टी-50 और बीएसई सेंसेक्स ने अपने पिछले वर्षों के सबसे बड़े साप्ताहिक नुकसान को दर्ज किया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई बढ़ने और आर्थिक वृद्धि धीमी होने की आशंका पैदा हुई, जो खासकर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए चिंता का कारण है।

निफ्टी और सेंसेक्स की साप्ताहिक गिरावट

निफ्टी-50 शुक्रवार को 2.06 प्रतिशत की गिरावट लेकर 23,151.1 पर बंद हुआ। सेंसेक्स भी 1.93 प्रतिशत टूटकर 74,563.92 पर बंद हुआ। साप्ताहिक आधार पर निफ्टी लगभग 5.3 प्रतिशत गिरा, जो जून 2022 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। सेंसेक्स में इस सप्ताह 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जो मई 2020 के बाद अब तक का सबसे बड़ा साप्ताहिक नुकसान माना जा रहा है। इस गिरावट ने बाजार में तनाव बढ़ा दिया और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

मिडिल ईस्ट संघर्ष और वैश्विक असर

मीडिल ईस्ट में तनाव फरवरी के अंत में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ। अब तक इस संघर्ष में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। बाजार जानकारों का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति में बाधा आने की आशंका कई भारतीय सेक्टरों को प्रभावित कर सकती है।

इस संकट से प्रभावित होने वाले सेक्टरों में ऑटोमोबाइल, तेल विपणन, पर्यटन, उपभोक्ता टिकाऊ सामान, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाएं, उर्वरक और रसायन उद्योग, तथा सिटी गैस वितरण शामिल हैं। चोलामंडलम सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख धर्मेश कांत के अनुसार, कंपनियों की कमाई पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है। मौजूदा हालात को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 में भारतीय कंपनियों की कमाई के अनुमान में लगभग 200 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है।

टॉप लूजर सेक्टर

इस सप्ताह सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप इंडेक्स 4.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.7 प्रतिशत टूट गए। ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई और ये लगभग 10.6 प्रतिशत नीचे आए। निवेशकों का डर है कि मिडिल ईस्ट युद्ध से उत्पादन और निर्यात प्रभावित हो सकते हैं, जिससे यह छह वर्षों में इस सेक्टर की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट बनी।

वित्तीय क्षेत्र के बड़े शेयर भी 5.7 प्रतिशत टूट गए। विदेशी निवेशकों की तेज बिकवाली ने इस सेक्टर में गिरावट को और बढ़ा दिया। हालांकि इस गिरावट के बीच कोल इंडिया के शेयर करीब 6 प्रतिशत चढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों के जल्दी शुरू होने और कोयले की बढ़ती मांग के कारण इस कंपनी के शेयरों में तेजी बनी।

निवेशकों को हुआ बड़ा नुकसान

इस सप्ताह की गिरावट से निवेशकों के लिए भारी नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 43,00,474 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले शुक्रवार (6 मार्च) को यह 44,93,547 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि इस सप्ताह बाजार में निवेशकों के लगभग 19,34,973 करोड़ रुपये डूब गए।

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