बिजनेस एजुकेशन का परिदृश्य बदल रहा है। AACSB इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अब छात्र MBA की जगह स्पेशलाइज्ड कोर्सेज जैसे बिजनेस एनालिटिक्स, फाइनेंस और फिनटेक की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्री-कनेक्टेड स्किल्स को प्राथमिकता दी जा रही है।
Business Education Trends: AACSB इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2025 में वैश्विक बिजनेस एजुकेशन का पैटर्न बदल रहा है। अब छात्र दुनिया भर में MBA के बजाय स्पेशलाइज्ड मास्टर डिग्री और स्किल-बेस्ड कोर्सेज की ओर बढ़ रहे हैं। भारत समेत कई देशों के स्टूडेंट फीस, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और लॉन्ग टर्म करियर संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एडमिशन निर्णय ले रहे हैं। ऑनलाइन, हाइब्रिड और पार्ट-टाइम कोर्स की मांग भी बढ़ी है, जिससे छात्रों को पढ़ाई के साथ काम का अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है।
MBA से आगे की सोच क्यों बना रहे छात्र
AACSB की Enrollment Trends at AACSB Business Schools 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनेस कोर्सेज के लिए एप्लीकेशन लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन एनरोलमेंट की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। इसका साफ मतलब है कि छात्र अब किसी भी एडमिशन ऑफर को जल्दबाजी में स्वीकार नहीं कर रहे। फीस, स्कॉलरशिप, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप और लॉन्ग टर्म जॉब संभावनाओं को ध्यान में रखकर ही फैसला लिया जा रहा है।
रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि MBA अब हर किसी का डिफॉल्ट ऑप्शन नहीं रहा। दुनियाभर में MBA प्रोग्राम्स की लोकप्रियता में हल्की गिरावट दिख रही है, जबकि स्पेशलाइज्ड मास्टर डिग्री की मांग तेज़ी से बढ़ी है। स्टूडेंट्स ऐसे कोर्स चाहते हैं, जो कम समय में उन्हें सीधे किसी खास रोल के लिए तैयार करें।

स्पेशलाइज्ड कोर्स क्यों बन रहे पहली पसंद
बिजनेस एनालिटिक्स, फाइनेंस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मार्केटिंग, फिनटेक और डेटा से जुड़े कोर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें स्किल फोकस साफ होता है और जॉब रोल से सीधा कनेक्शन बनता है। आज की जॉब मार्केट में डिग्री के नाम से ज्यादा अहमियत स्किल्स और प्रैक्टिकल नॉलेज को दी जा रही है।
इसी वजह से बिजनेस स्कूल भी अपने सिलेबस में डेटा एनालिटिक्स, AI, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, सस्टेनेबिलिटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारतीय छात्रों के लिए यह संकेत साफ है कि टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री से जुड़े कोर्स भविष्य में ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं।
इंटरनेशनल स्टडी में भी बदली प्राथमिकताएं
मास्टर्स लेवल पर इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या एक बार फिर बढ़ रही है, लेकिन सोच पहले से ज्यादा प्रैक्टिकल हो गई है। अब कॉलेज की रैंकिंग या ब्रांड नेम से ज्यादा अहमियत रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट को दी जा रही है। वीजा नियम, पढ़ाई के बाद काम के मौके और प्लेसमेंट रिकॉर्ड फैसले में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
AACSB रिपोर्ट यह भी बताती है कि ऑनलाइन, हाइब्रिड और पार्ट-टाइम बिजनेस कोर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। कंपनियां भी अब ऐसे फॉर्मेट को स्वीकार कर रही हैं, बशर्ते छात्र के पास स्किल्स और वर्क एक्सपीरियंस हो। यह ट्रेंड खासतौर पर उन प्रोफेशनल्स के लिए फायदेमंद है, जो काम के साथ पढ़ाई करना चाहते हैं।










