ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन हमले में तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। हमले के बाद बंदरगाह क्षेत्र में आग और धुएं के गुबार दिखाई दिए। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने घटना की पुष्टि की।
Middle East Tension: ओमान के सलालाह पोर्ट पर हाल ही में एक बड़ा ड्रोन हमला हुआ है, जिसमें तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद बंदरगाह क्षेत्र में आग लग गई और आसमान में काले धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह हमला ईरान की ओर से किया गया बताया जा रहा है। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार व्यापारिक जहाजों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन ऊर्जा ढांचे पर हमला होने से क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने की हमले की पुष्टि
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म Ambrey ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि सलालाह बंदरगाह के तेल भंडारण टैंकों पर ड्रोन से हमला किया गया। कंपनी के अनुसार हमले का मुख्य लक्ष्य बंदरगाह का इंफ्रास्ट्रक्चर था। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में वहां मौजूद व्यापारिक जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
ओमान के सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय चैनल अल जजीरा की रिपोर्ट में बताया गया कि हमले के दौरान कई ड्रोन एक साथ बंदरगाह की दिशा में भेजे गए। इसके बाद तेल टैंकों में आग लग गई और बंदरगाह क्षेत्र से धुएं के बड़े गुबार उठते हुए दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म पर सामने आया है, जिसमें आग और धुएं का दृश्य साफ दिखाई देता है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब अन्य खाड़ी देशों पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा से जुड़े ढांचों को निशाना बनाना ईरान की युद्ध रणनीति का हिस्सा माना जाता है। इससे वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापारिक मार्गों पर दबाव बनाया जा सकता है।
ओमान जैसे देश, जो क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं, अब इस संघर्ष के बीच फंसते नजर आ रहे हैं। सलालाह पोर्ट पर हमला इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय तनाव केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि आसपास के देशों के लिए भी खतरा बन रहा है।

ओमान के सुल्तान की प्रतिक्रिया
इस हमले के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने ओमान के क्षेत्र में हो रहे लगातार हमलों पर असहमति और कड़ी नाराजगी जताई।
सुल्तान ने साफ कहा कि ओमान अपनी सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी देश द्वारा ओमान के क्षेत्रीय ढांचे पर हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ओमान की सरकार ने इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बंदरगाह के आसपास निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
हमले से पहले भेजा गया था बधाई संदेश
इस घटना से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब ओमान के सुल्तान ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर को बधाई संदेश भेजा था।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार 9 मार्च को ओमान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने बताया था कि सुल्तान हैथम बिन तारिक ने अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनने पर बधाई दी थी।
सुल्तान ने अपने संदेश में कहा था कि ईश्वर उनकी रक्षा और सुरक्षा करे। हालांकि इसके कुछ समय बाद ही ईरान द्वारा सलालाह पोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई।
ऊर्जा ढांचे पर हमला
सलालाह पोर्ट ओमान का एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। यहां से कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का भंडारण और परिवहन किया जाता है।
तेल टैंकों पर हमला होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ जाती है क्योंकि इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादन क्षेत्रों में से एक है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर तुरंत दिखाई देता है।










