मिडिल ईस्ट संकट के बीच अमेरिका का बड़ा ऐलान, Hormuz Strait में जहाजों को मिलेगा Escort

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा ऐलान किया है। US Navy अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर Hormuz Strait से गुजरने वाले Oil को सुरक्षा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर US Navy अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर Hormuz Strait से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा और एस्कॉर्ट देगी ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।

America: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगर सैन्य रूप से स्थिति संभव हुई तो अमेरिकी नौसेना अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा देगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

स्कॉट बेसेंट ने स्काई न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होंगी, US Navy और उसके सहयोगी देशों की नौसेनाएं मिलकर जहाजों को एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित रास्ता प्रदान करेंगी।

Hormuz Strait क्यों है इतना महत्वपूर्ण

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता पर्सियन गल्फ को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया भर में होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

अनुमान के अनुसार वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या सुरक्षा खतरा पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

हाल के दिनों में ईरान की ओर से पर्सियन गल्फ क्षेत्र में जहाजों और ऊर्जा संसाधनों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। कई जगह कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

Oil Tankers को Escort करने की तैयारी

स्कॉट बेसेंट ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि अमेरिका इस संकट को गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी सैन्य स्थिति अनुमति देगी, US Navy एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराएगी।

उनका कहना था कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी हो सकता है। अगर जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिलता है तो इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

बेसेंट ने यह भी कहा कि फिलहाल कुछ जहाज अभी भी इस जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। इनमें ईरानी टैंकर और चीन के झंडे वाले कुछ टैंकर शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल इस इलाके में समुद्री माइन नहीं बिछाई गई हैं।

ईरान का कड़ा रुख

इस बीच ईरान की ओर से भी कड़ा बयान सामने आया है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हुए हमलों का बदला लिया जाएगा और ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान वास्तव में इस समुद्री मार्ग को बंद करने या बाधित करने की कोशिश करता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। इससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर पहले से ही वैश्विक बाजारों में दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में तेजी आने के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

हालांकि कई विकसित देशों ने रणनीतिक तेल भंडार से तेल जारी करने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में लाने की योजना बनाई गई है ताकि कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। इसमें अमेरिका का हिस्सा लगभग आधा बताया जा रहा है।

इसके बावजूद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक और व्यापारिक कंपनियां इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर समुद्री मार्ग पूरी तरह प्रभावित हुआ तो तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

युद्ध का आर्थिक बोझ

स्कॉट बेसेंट ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि इस संघर्ष का आर्थिक बोझ अमेरिका पर भी पड़ रहा है। उनके अनुसार अब तक इस युद्ध में अमेरिका को लगभग 11 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है।

इंटरव्यू के दौरान एक दिलचस्प घटना भी हुई। बातचीत के बीच ही व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। इसके कारण इंटरव्यू को लगभग दो घंटे के लिए रोकना पड़ा।

जब इंटरव्यू दोबारा शुरू हुआ तो पत्रकार ने उनसे जहाजों को एस्कॉर्ट करने की योजना के बारे में फिर से सवाल किया। हालांकि उस समय बेसेंट ने इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचते हुए कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर तेल टैंकरों को सुरक्षा प्रदान करते हैं तो इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

लेकिन इसके साथ ही यह जोखिम भी बढ़ सकता है कि ईरान और अमेरिका के बीच सीधा टकराव हो जाए। इसलिए आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

अभी बाजार को यह भरोसा नहीं है कि जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित मार्ग जल्द उपलब्ध हो जाएगा। हालांकि स्कॉट बेसेंट के बयान से संकेत जरूर मिला है कि अमेरिका इस दिशा में तैयारी कर रहा है और जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जा सकता है।

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