‘मिर्जापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और फिल्म के सभी किरदारों को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी बीच श्वेता त्रिपाठी ने फिल्म में अपने ‘गोलू’ के किरदार को लेकर बात की।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की रिलीज के साथ श्वेता त्रिपाठी एक बार फिर अपने चर्चित किरदार गोलू गुप्ता के रूप में दर्शकों के बीच हैं। फिल्म को लेकर मिल रही प्रतिक्रियाओं के बीच अभिनेत्री ने अपने किरदार, पब्लिक फिगर के तौर पर अपनी राय रखने की चुनौती और एक्टर्स से राजनीतिक सवाल पूछे जाने को लेकर खुलकर बात की है।
श्वेता का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया के मौजूदा दौर में किसी सेलिब्रिटी की कही गई बात कुछ ही समय में बड़े पैमाने पर वायरल हो सकती है। समस्या तब पैदा होती है, जब किसी बयान को उसके मूल संदर्भ से अलग करके पेश किया जाए। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि अब वह पहले से ज्यादा सजग रहती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपनी राय व्यक्त करने से पीछे हटेंगी।
अपनी बात रखने से डरना नहीं चाहतीं श्वेता
श्वेता त्रिपाठी के मुताबिक, आज पब्लिक फिगर के लिए अपनी राय खुलकर रखना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल नेटवर्क की संख्या बढ़ने के कारण किसी बातचीत का एक छोटा हिस्सा भी तेजी से लोगों तक पहुंच सकता है। अभिनेत्री ने बताया कि कई बार पूरी बातचीत का संदर्भ कुछ और होता है, लेकिन वायरल होने वाली क्लिप या हेडलाइन से उसका अर्थ अलग निकल सकता है। उनके अनुसार, कोई व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि उसकी कही हुई बात को आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा।
श्वेता ने इस स्थिति को स्वीकार करने के बावजूद अपनी आवाज को सीमित करने से इनकार किया। उन्होंने एक पॉडकास्ट का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें जनसंख्या और बच्चे पैदा करने जैसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। शुरुआत में उन्हें आशंका थी कि लोग उनकी बात को उस तरह नहीं समझेंगे, जिस तरह वह कहना चाहती हैं।
हालांकि, बाद में उन्होंने तय किया कि गलत समझे जाने के डर से अपनी राय रखना बंद करना सही नहीं होगा। उनका मानना है कि जो लोग उनकी बात को समझना चाहते हैं, वे उसे समझेंगे और अगर कोई बात तत्काल समझ में नहीं आती, तो संभव है कि समय के साथ उसका संदर्भ बेहतर तरीके से समझा जाए।
‘गोलू’ से क्या सीखना चाहती हैं अभिनेत्री?
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श्वेता ने अपने ‘मिर्जापुर’ के किरदार गोलू को अपनी निजी सोच से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि गोलू की सबसे खास खूबियों में उसकी बेबाकी, आत्मविश्वास और निडरता शामिल हैं। अभिनेत्री चाहती हैं कि गोलू की यही खासियत उनकी वास्तविक जिंदगी की पर्सनैलिटी में भी बनी रहे। हालांकि, उनके लिए बेबाक होने का मतलब किसी का अपमान करना नहीं है।
वह सम्मान के साथ अपनी बात रखने और अपनी राय पर कायम रहने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार, गोलू जिस तरह मुश्किल परिस्थितियों में भी सामने वाले से बिना डरे बात करती है, वही आत्मविश्वास उन्हें अपने जीवन में भी प्रेरित करता है।
‘सिर्फ हेडलाइन के लिए एक्टर्स से राजनीति पर सवाल क्यों?’
राजनीतिक मुद्दों पर सेलिब्रिटीज से सवाल किए जाने को लेकर भी श्वेता ने अपनी राय रखी। अभिनेत्री का कहना है कि केवल आकर्षक हेडलाइन तैयार करने के लिए किसी अभिनेता से राजनीति से जुड़े जटिल सवाल पूछना हमेशा उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एक्टर्स अपनी फिल्मों, काम और व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि उन्हें हर सरकारी फैसले, आधिकारिक दस्तावेज या बंद कमरे में होने वाली नीतिगत चर्चाओं की जानकारी हो।
ऐसे में सीमित जानकारी के आधार पर किसी अभिनेता की टिप्पणी सामने आती है और बाद में उसी बयान को लेकर उसे आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। श्वेता के मुताबिक, मीडिया बातचीत में सवाल ऐसे होने चाहिए, जिन पर सामने वाला व्यक्ति अपनी समझ और अनुभव के आधार पर सार्थक जवाब दे सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक समाज के रूप में लोगों को अलग-अलग विचारों का सम्मान करना सीखना चाहिए।
‘मिर्जापुर: द मूवी’ में फिर नजर आ रही हैं गोलू
श्वेता त्रिपाठी ‘मिर्जापुर: द मूवी’ में एक बार फिर गोलू के किरदार में दिखाई दे रही हैं। फिल्म ‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी की कहानी को आगे बढ़ाती है और इसमें अली फजल, पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु जैसे कलाकार भी नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले पुनीत कृष्णा ने लिखा है। रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर इसके निर्माता हैं।









