ममता बनर्जी ने नदिया रैली में महिलाओं से अपील की कि वे वोटर सूची में नाम कटने पर अपने मताधिकार की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि घरेलू औजारों से भी प्रतीकात्मक रूप में लड़ाई की जा सकती है।
New Delhi: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर महिलाओं से अपील की है कि वे अपने मताधिकार की रक्षा के लिए तैयार रहें। ममता ने कहा कि अगर वोटर लिस्ट से उनके नाम काट दिए गए तो उन्हें लड़ाई के लिए तैयार होना चाहिए और घरेलू उपकरण जैसे बेलन, चिमटा और खंती का इस्तेमाल हथियार के रूप में कर सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल साजिश कर रहे हैं ताकि लोगों को वोट डालने से रोका जा सके।
नदिया में रैली में महिलाओं को संदेश
गुरुवार को नदिया जिले के कृष्णानगर में आयोजित रैली में ममता बनर्जी ने महिलाओं को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "क्या आप अपने अधिकारों को किसी 'श्रीमान' के नाम पर खो देंगी? चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाकर माताओं और बहनों को डराया-धमकाया जाएगा।" ममता ने जोर देकर कहा कि महिलाएं आगे बढ़ेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े होंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाएं यदि अपने नाम एसआईआर में काट दिए जाने के बाद शांत बैठेंगी तो यह अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने घरेलू औजारों का उपयोग कर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं। ममता ने इसे चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक प्रतीकात्मक और प्रेरक संदेश बताया।
वोटिंग अधिकार की रक्षा पर जोर
ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची से नाम कटने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के मताधिकार को रोकने की कोशिश है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें और किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पैसे का इस्तेमाल करके और दूसरे राज्यों से लोगों को लाकर बंगाल की जनता को बांटने की कोशिश करती है। ममता ने कहा कि वह धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती हैं और सांप्रदायिकता को कभी स्वीकार नहीं करेंगी।
धर्म और सांस्कृतिक संदेश
ममता ने अपनी बातों में धर्म और संस्कृति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोग अपनी पूजा और प्रार्थना अपने हृदय में कर सकते हैं। उन्होंने सनातन संस्कृति संसद द्वारा आयोजित सामूहिक भगवत गीता पाठ का उदाहरण दिया और कहा कि यह दर्शाता है कि धर्म का अर्थ पवित्रता, मानवता और शांति है, न कि हिंसा या भेदभाव।
मुख्यमंत्री ने महान भारतीय हस्तियों जैसे रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने लोगों को कभी विभाजित नहीं किया। ममता ने सवाल किया कि तो फिर भाजपा और अन्य दल कौन हैं जो विभाजन फैला रहे हैं।
विपक्ष पर चुनाव में बाधा डालने का आरोप
ममता बनर्जी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने आइटी सेल द्वारा तैयार की गई सूचियों के अनुसार चुनाव कराने की योजना बना रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि बंगाल ऐसा नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग यह साबित करेंगे कि वे स्वतंत्र और सशक्त नागरिक हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लोगों को यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या खाना चाहते हैं और किसी को यह तय नहीं करना चाहिए कि वे शाकाहारी होंगे या मांसाहारी। उन्होंने कहा कि एक घायल बाघ स्वस्थ बाघ से कहीं अधिक खतरनाक होता है और अगर उन पर हमला किया गया तो वे पलटवार करना जानती हैं।
महिलाओं को सशक्त बनाने का आह्वान
ममता बनर्जी ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने मताधिकार की रक्षा के लिए तैयार रहें और अपनी शक्ति का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं में ताकत है और वे अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में नागरिकों का अधिकार सर्वोपरि है और कोई भी साजिश इसे रोक नहीं सकती।









