मन की बात के 134वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्ती के आकाश गुप्ता की मनोरमा नदी सफाई मुहिम की सराहना की। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, भीषण गर्मी में सावधानी, आम की विविधता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर भी चर्चा की।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए खेल, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय सांस्कृतिक विरासत, कृषि और सामाजिक भागीदारी जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने कई प्रेरणादायक व्यक्तित्वों और पहलों का उल्लेख किया तथा नागरिकों को सकारात्मक बदलाव में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के युवा आकाश गुप्ता की सराहना की, जिन्होंने अपने गांव की मनोरमा नदी को साफ करने का अभियान शुरू किया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के एथलीटों की उपलब्धियों, भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों, भारत के पारंपरिक पेयों, आम की विविध किस्मों और हाल ही में विदेश से वापस लाई गई ऐतिहासिक धरोहरों का भी जिक्र किया।
राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के खिलाड़ियों को दी बधाई
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में देशभर से सैकड़ों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और कई नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलेटिक्स में लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश के युवा वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।
कार्यक्रम के दौरान गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर के साथ उनकी बातचीत भी प्रसारित की गई। प्रधानमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास खेलों में उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित करते हैं।
भीषण गर्मी में स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
देश के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और लू की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की।
उन्होंने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, तेज धूप से बचने और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली और खानपान में गर्मी से बचाव के कई प्रभावी उपाय मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, गर्मियों के मौसम में पारंपरिक पेय पदार्थ न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं।
भारत के पारंपरिक पेयों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों में लोकप्रिय पारंपरिक पेयों की चर्चा की।
उन्होंने उत्तर भारत के आम पन्ना, पंजाब और हरियाणा की लस्सी, राजस्थान और गुजरात की छाछ, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सत्तू शरबत, कोंकण क्षेत्र के कोकम शरबत और दक्षिण भारत के पानकम, नीर मोर तथा सम्बारम जैसे पेयों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि ये पेय केवल गर्मी से राहत देने वाले पेय पदार्थ नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय परंपराओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
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आम को बताया भारत की गर्मियों की पहचान
गर्मी के मौसम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के लोकप्रिय फल आम का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का लगभग हर क्षेत्र अपनी विशिष्ट आम की किस्म के लिए जाना जाता है।
उन्होंने महाराष्ट्र के अल्फांसो, गुजरात के केसर, उत्तर प्रदेश के दशहरी और लंगड़ा, बिहार के जर्दालु, पश्चिम बंगाल के हिमसागर तथा दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापुरी और मलगोवा जैसे प्रसिद्ध आमों का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं और देश के किसान वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
नीदरलैंड से लौटीं चोलकालीन धरोहरें
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी हालिया नीदरलैंड यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां आयोजित एक विशेष समारोह में चोल साम्राज्य से जुड़ी प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं।
उन्होंने कहा कि ये ताम्र पट्टिकाएं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनमें चोल वंश की प्रशासनिक व्यवस्था, समुद्री शक्ति तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ संबंधों की जानकारी मिलती है।
प्रधानमंत्री ने इसे भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
भारतीय विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के मल्हार क्षेत्र में भी हाल ही में दुर्लभ ताम्र पट्टिकाओं की खोज हुई है। माना जा रहा है कि ये प्राचीन पांडुवंशी शासनकाल से जुड़ी हैं और भारतीय इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
बस्ती के आकाश गुप्ता बने प्रेरणा का स्रोत
कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के युवा आकाश गुप्ता की कहानी रही। प्रधानमंत्री ने बताया कि आकाश अपने गांव की मनोरमा नदी की बिगड़ती स्थिति को देखकर चिंतित थे।
जिस नदी को उन्होंने बचपन में स्वच्छ और जीवंत देखा था, वह समय के साथ प्लास्टिक और कचरे से प्रदूषित हो गई थी। स्थिति से निराश होने के बजाय आकाश ने बदलाव की पहल करने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने मित्रों को साथ जोड़ा और नदी सफाई अभियान शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद यह समूह नियमित रूप से नदी से प्लास्टिक, जलकुंभी और अन्य कचरा निकालने लगा।
जनभागीदारी से दिखा सकारात्मक बदलाव
प्रधानमंत्री ने बताया कि कई अवसरों पर युवाओं ने एक दिन में 50 से 60 किलोग्राम तक कचरा नदी से बाहर निकाला। धीरे-धीरे मनोरमा नदी का एक बड़ा हिस्सा साफ दिखाई देने लगा।
इस पहल का प्रभाव केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के लोगों में भी पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आकाश गुप्ता और उनके साथियों का प्रयास यह साबित करता है कि सकारात्मक बदलाव के लिए केवल शिकायत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहल करना आवश्यक है।
नागरिक भागीदारी से बदल सकता है समाज
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश के विकास और पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि खेल, संस्कृति, कृषि, पर्यावरण और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में देश के सामान्य नागरिक प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल स्थानीय स्तर पर परिवर्तन लाते हैं, बल्कि पूरे समाज को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करते हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी जनभागीदारी है और यही शक्ति देश को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगी।









