मिनी अग्रवाल ने जन्मजात शारीरिक चुनौतियों, चार ऑपरेशन और लंबे संघर्ष के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। 2012 में MPPSC की तैयारी शुरू करने के बाद 2018 में दिव्यांग कैटेगरी में रैंक-3 हासिल कर Chief Municipal Officer बनीं।
MPPSC Success Story: मिनी अग्रवाल का सफर मुश्किल परिस्थितियों के बीच लक्ष्य हासिल करने की प्रेरक मिसाल है। करीब 10 साल तक बिस्तर पर रहने और कई ऑपरेशन का सामना करने के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा का सपना नहीं छोड़ा। लोगों के तानों और लगातार चुनौतियों के बीच उन्होंने MPPSC की तैयारी जारी रखी और 2018 में रैंक-3 हासिल कर Chief Municipal Officer के पद तक पहुंचीं।
बचपन से शारीरिक चुनौतियों के बीच जारी रखी पढ़ाई
मिनी अग्रवाल का जन्म शारीरिक चुनौतियों के साथ हुआ था। अपनी संघर्ष की कहानी में उन्होंने बताया कि करीब 10 साल तक वह बिस्तर पर रहीं। इस दौरान उनका शरीर काफी कमजोर हो गया और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लगातार बनी रहीं।
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इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपने जीवन का अहम लक्ष्य बनाया। 12वीं के बाद पढ़ाई में आए गैप को खत्म करने के लिए उन्होंने अपनी स्थिति के अनुसार लेटकर और बैठकर पढ़ाई जारी रखी।
लोगों के तानों को बनाया आगे बढ़ने की वजह
मिनी के मुताबिक, बचपन में उन्हें शारीरिक परेशानियों के साथ लोगों के व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। कुछ लोगों और रिश्तेदारों ने उनके बारे में बेहद निराशाजनक बातें कहीं और यहां तक कहा कि उन्हें सड़क पर छोड़ देना चाहिए, ताकि वह भीख मांग सकें।
इन बातों ने उन्हें तोड़ा नहीं। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। पढ़ाई के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने का उनका संकल्प धीरे-धीरे मजबूत होता गया।
चार ऑपरेशन के बाद भी नहीं छोड़ा लक्ष्य
मिनी का पहला बड़ा ऑपरेशन 11 साल की उम्र में हुआ था, जो करीब 11 घंटे चला। इसके बाद उनका जीवन लगभग 10 साल तक बिस्तर तक सीमित रहा। इस अवधि में उनके चार और ऑपरेशन हुए।
लगातार दर्द और शारीरिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपना हौसला बनाए रखा। उन्होंने बताया कि मुश्किल वक्त में वह अकेले में रोती थीं, लेकिन परिवार के सामने खुद को संभालकर रखती थीं। इसी दौरान उनके भीतर कुछ बड़ा हासिल करने की इच्छा बनी रही।
2012 में शुरू की MPPSC की तैयारी
स्थानीय कलेक्टर के काम से प्रभावित होकर मिनी ने सिविल सेवा को अपना करियर लक्ष्य बनाया। उन्होंने वर्ष 2012 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी शुरू की।
इस सफर में उन्हें कई बार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का सामना करना पड़ा। इंटरव्यू के दौरान भी उनके सामने चुनौतियां आईं। हालांकि, उन्होंने असफलताओं के बाद तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी कमियों को समझकर लगातार सुधार किया।
2018 में रैंक-3 हासिल कर बनीं CMO
लंबे संघर्ष और लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2018 में मिनी अग्रवाल ने MPPSC में सफलता हासिल की। उन्होंने दिव्यांग कैटेगरी में रैंक-3 हासिल की और Chief Municipal Officer (CMO) बनीं।
मिनी की कहानी इस बात की मिसाल है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति के लक्ष्य को तय नहीं करतीं। उन्होंने शारीरिक चुनौतियों और सामाजिक तानों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी और अधिकारी बनकर अपनी क्षमता साबित की।











