मुजफ्फरपुर में गैस संकट गहराया: 500% बढ़ी इंडक्शन की मांग, लकड़ी-कोयला महंगा; शादियों से हट रहे गर्म रसगुल्ले-चाऊमीन के स्टॉल

मुजफ्फरपुर में इंडक्शन की मांग 500% बढ़ गई है जबकि लकड़ी और कोयले की कीमत तीन गुना हो चुकी है। शादी समारोहों से गर्म रसगुल्ले और चाऊमीन के स्टॉल हटने लगे हैं।
मुजफ्फरपुर में गैस संकट गहराया: 500% बढ़ी इंडक्शन की मांग, लकड़ी-कोयला महंगा; शादियों से हट रहे गर्म रसगुल्ले-चाऊमीन के स्टॉल
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मुजफ्फरपुर में इन दिनों गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों से लेकर व्यापारियों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों तक को परेशानी में डाल दिया है। शहर और आसपास के इलाकों में गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों के सामने खाना बनाने तक की समस्या खड़ी हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बाजार में इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। दुकानदारों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन की मांग करीब 500 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जिसके कारण कई दुकानों में इसका स्टॉक खत्म हो गया है।

गैस संकट का असर सबसे ज्यादा उन परिवारों पर पड़ रहा है जहां रोजमर्रा का खाना गैस सिलेंडर पर ही निर्भर है। कई लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उन्हें वैकल्पिक उपाय तलाशने पड़ रहे हैं। कुछ लोग इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल करने लगे हैं, तो कई लोग मजबूरी में लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं। हालांकि लकड़ी और कोयले की कीमत भी अचानक बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में इनकी कीमत लगभग तीन गुना तक बढ़ चुकी है।

बाजार के व्यापारियों का कहना है कि गैस की कमी की खबर फैलते ही लोग बड़ी संख्या में इंडक्शन चूल्हा खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंचने लगे। पहले जहां एक दिन में कुछ ही इंडक्शन बिकते थे, वहीं अब दर्जनों की संख्या में बिक्री हो रही है। अचानक बढ़ी मांग के कारण कई दुकानों में इंडक्शन चूल्हे का स्टॉक खत्म हो गया है और नए माल का इंतजार किया जा रहा है।

गैस संकट का असर शादी-ब्याह के कार्यक्रमों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मुजफ्फरपुर में इन दिनों शादी का मौसम चल रहा है, लेकिन गैस की कमी के कारण कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले जहां शादियों में गर्म रसगुल्ले, चाऊमीन और अन्य गर्म व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाते थे, अब उनमें से कई स्टॉल हटाए जा रहे हैं। कैटरर्स का कहना है कि गैस की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण वे ऐसे स्टॉल लगाने से बच रहे हैं जिनमें ज्यादा गैस की जरूरत होती है।

कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने से उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। कुछ लोग लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इनकी कीमत भी काफी बढ़ चुकी है। इससे शादी समारोह का खर्च भी बढ़ गया है। कई आयोजकों को अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है ताकि कम गैस में भी भोजन तैयार किया जा सके।

शहर के कई इलाकों में लोग गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। कई जगहों पर लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे घरों की रसोई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में भी परेशानी हो रही है।

इधर गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति में आई बाधा के कारण ऐसी स्थिति बनी है। उनका कहना है कि जैसे ही नियमित आपूर्ति शुरू होगी, स्थिति सामान्य हो जाएगी। फिलहाल एजेंसियां उपलब्ध सिलेंडरों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मांग ज्यादा होने के कारण परेशानी हो रही है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर और भी ज्यादा क्षेत्रों पर पड़ सकता है। खासकर होटल, ढाबा और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं आम लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है।

मुजफ्फरपुर के कई परिवारों ने फिलहाल इंडक्शन चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि हर घर में इसकी सुविधा नहीं है, क्योंकि इसके लिए लगातार बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में बिजली कटौती वाले इलाकों में लोगों को और ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

फिलहाल शहर के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और उन्हें इस परेशानी से राहत मिलेगी। लेकिन जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक लोगों को वैकल्पिक उपायों के सहारे ही अपनी रसोई चलानी पड़ रही है। वहीं बाजार में इंडक्शन चूल्हों की बढ़ती मांग और लकड़ी-कोयले की बढ़ी कीमतें इस संकट की गंभीरता को साफ तौर पर दर्शा रही हैं।

 

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