मैसूरु दशहरा में शामिल होने का न्योता, शिवकुमार ने बताया कर्नाटक का गौरव

डीके शिवकुमार ने लोगों को मैसूरु दशहरा में शामिल होने का न्योता दिया। 11 दिवसीय उत्सव में जंबू सवारी, चामुंडेश्वरी की पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे ।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मैसूरु दशहरा को राज्य की सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक बताते हुए लोगों को उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया। समारोह में जंबू सवारी, शाही अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण हैं।

बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य के लोगों और पर्यटकों से ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा समारोह में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने इस उत्सव को कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान, गौरवशाली विरासत और परंपराओं का प्रतीक बताया। 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित हो रहे 11 दिवसीय समारोह में शाही अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मैसूरु महल की रोशनी और विजयदशमी की भव्य जंबू सवारी प्रमुख आकर्षण हैं।  एक मिनट के वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैसूरु दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि कर्नाटक की कला, संस्कृति और ऐतिहासिक वैभव को प्रदर्शित करने का अवसर है। उन्होंने लोगों से मैसूरु पहुंचकर इस आयोजन का अनुभव लेने का आग्रह किया। उनके मुताबिक, समारोह में कला, संगीत और राज्य की विविध सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

मैसूरु दशहरा को बताया कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने संदेश में कहा कि मैसूरु दशहरा कर्नाटक की विरासत और गौरव का प्रतिनिधित्व करता है। यह उत्सव राज्य की ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ उन्हें देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम भी है।

उन्होंने कन्नड़ भाषी लोगों के साथ-साथ अन्य राज्यों और विदेशों से आने वाले पर्यटकों को भी समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और कर्नाटक की जनता की ओर से सभी का स्वागत है, ताकि वे अपनी आंखों से दशहरा की भव्यता और सांस्कृतिक समृद्धि देख सकें।

मैसूरु दशहरा कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। इसमें धार्मिक परंपराओं, शाही इतिहास, लोक कलाओं और आधुनिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मेल देखने को मिलता है। हर साल यह उत्सव बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

21 अक्टूबर को होगी भव्य जंबू सवारी

इस साल के समारोह का प्रमुख आकर्षण 21 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर आयोजित होने वाली जंबू सवारी है। यह भव्य हाथी जुलूस मैसूरु दशहरा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में शामिल है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, देवी चामुंडेश्वरी की उत्सव प्रतिमा को श्रद्धांजलि देने की पुष्पार्चना और संबंधित अनुष्ठान शाम 4:10 बजे से 4:35 बजे के बीच होंगे। इसके बाद जुलूस अंबा विलास महल से बन्नीमंटप मैदान की ओर रवाना होगा। 

इस बार हाथी प्रशांत 750 किलोग्राम वजनी ठोस सोने के हौदे को लेकर जुलूस में शामिल होगा। वह अनुभवी हाथी अभिमन्यु की जगह यह जिम्मेदारी संभालेगा, जो पहले कई वर्षों तक इस परंपरा का प्रमुख हिस्सा रहा है।

जंबू सवारी धार्मिक आस्था, शाही परंपरा और सार्वजनिक उत्सव का अनूठा संगम है। इसमें सजे हुए हाथियों, पारंपरिक संगीत, सांस्कृतिक दलों और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की विरासत को प्रदर्शित किया जाता है। विजयदशमी के दिन होने वाला यह आयोजन मैसूरु दशहरा का सबसे प्रतीक्षित हिस्सा माना जाता है।

मैसूरु महल की रोशनी बढ़ाती है उत्सव की भव्यता

दशहरा के दौरान मैसूरु महल और शहर के प्रमुख हिस्सों को हर शाम रोशनी से सजाया जाता है। रोशनी से जगमगाता महल उत्सव की पहचान बन चुका है और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण रहता है।

इस साल राज्य सरकार ने 11 दिवसीय समारोह के दौरान नियमित रोशनी की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने संकेत दिया है कि दशहरा समाप्त होने के बाद भी रोशनी को अगले 11 दिनों तक जारी रखने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा।

यदि इस अवधि को बढ़ाने की मंजूरी मिलती है, तो पर्यटकों को त्योहार के बाद भी रोशन महल और शहर की सजावट देखने का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है। हालांकि, इस विस्तार पर अंतिम निर्णय की घोषणा अलग से की जानी है।

महल की रोशनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजन मैसूरु के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। त्योहार के दौरान स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को अतिरिक्त गतिविधियों से लाभ मिलने की संभावना रहती है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की भागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल समारोह में देश और दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों—थल सेना, वायु सेना और नौसेना—की भागीदारी का भी उल्लेख किया।

दिए गए कार्यक्रम विवरण के अनुसार, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी समारोह में शामिल होंगे। इन नेताओं की उपस्थिति से आयोजन को अंतरराज्यीय स्तर पर अतिरिक्त महत्व मिलने की उम्मीद है।

मैसूरु दशहरा केवल धार्मिक समारोह तक सीमित नहीं है। यह कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता, कला और परंपराओं को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का मंच भी है। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले मेहमानों और कलाकारों की भागीदारी से इस आयोजन का सांस्कृतिक दायरा और व्यापक होता है।

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आगे बढ़ रहा उत्सव

मैसूरु महल में आयुध पूजा से जुड़े अनुष्ठान भी शुरू हो चुके हैं। इन समारोहों में शाही परिवार के सदस्य भाग ले रहे हैं। आयुध पूजा दक्षिण भारत में मनाई जाने वाली महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है, जिसमें औजारों, उपकरणों और कार्य में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की पूजा की जाती है।

दशहरा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सार्वजनिक उत्सव एक साथ आयोजित किए जाते हैं। इस संयोजन के कारण मैसूरु दशहरा स्थानीय परंपराओं से आगे बढ़कर कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गया है।

उत्सव की तैयारियों में महल परिसर, जुलूस मार्ग और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर व्यवस्थाओं का विशेष महत्व रहता है। जंबू सवारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम के समय और मार्ग से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना पर्यटकों के लिए उपयोगी होगा।

पर्यटकों के लिए मुख्यमंत्री का आमंत्रण

डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी मैसूरु दशहरा को राज्य की कला, संस्कृति, परंपरा और वैभव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देवी चामुंडेश्वरी के आशीर्वाद से मैसूरु शहर उत्सव के स्वागत के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री का संदेश राज्य के निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी इस आयोजन से जुड़ने का निमंत्रण है। दशहरा के दौरान मैसूरु में धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने का अवसर मिलता है। जंबू सवारी और महल की रोशनी विशेष रूप से बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करती हैं।

आगंतुकों के लिए यात्रा की योजना बनाते समय आधिकारिक कार्यक्रम, प्रवेश व्यवस्था और जुलूस के समय की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है। विजयदशमी के दिन भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए दर्शकों को स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

कर्नाटक की विरासत को वैश्विक पहचान देने का अवसर

मैसूरु दशहरा कर्नाटक की ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इसे राज्य के गौरव से जोड़ते हुए लोगों से समारोह में भाग लेने की अपील की है। 11 से 21 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर भव्य जुलूस और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक कई कार्यक्रम शामिल हैं। महल की रोशनी और जंबू सवारी इस उत्सव की विशिष्ट पहचान हैं।

अब सभी की निगाहें 21 अक्टूबर को होने वाली विजयदशमी की जंबू सवारी पर हैं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि राज्य सरकार महल की रोशनी को अतिरिक्त 11 दिनों तक जारी रखने की अनुमति देती है या नहीं। मुख्यमंत्री का आमंत्रण इस बात को रेखांकित करता है कि मैसूरु दशहरा केवल स्थानीय उत्सव नहीं, बल्कि कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का एक प्रमुख सार्वजनिक प्रदर्शन है।

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