कर्नाटक के मैसूरु जिले के नंजनगुड तालुक में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बने हैं। डिप्टी CM जी. परमेश्वर ने प्रभावित गांवों का दौरा कर फसल नुकसान का जायजा लिया। किसानों ने कर्ज और आर्थिक संकट के बीच तत्काल राहत की मांग की।
मैसूर: कर्नाटक के मैसूरु जिले में बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नंजनगुड तालुक में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खरीफ फसलों पर गंभीर असर पड़ा है। खेतों में खड़ी कई फसलें सूखने लगी हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को नंजनगुड के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और खेतों में पहुंचकर फसल की स्थिति का जायजा लिया। यह उनके मैसूरु जिले के दौरे का दूसरा दिन था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सूखे की स्थिति और उससे कृषि पर पड़ रहे प्रभाव का आकलन करना था।
गट्टावाड़ी गांव में किसानों से मिले डिप्टी CM
जी. परमेश्वर ने नंजनगुड तालुक के गट्टावाड़ी गांव का दौरा किया। उन्होंने उन कृषि क्षेत्रों का निरीक्षण किया जहां बारिश की कमी के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
किसानों ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि खेती के लिए उन्होंने कर्ज लिया था। लेकिन समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलें खराब हो गईं और अब उनके सामने कर्ज चुकाने तथा परिवार का खर्च चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपाय उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि तत्काल मदद नहीं मिली तो फसल खराब होने से पैदा हुआ आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
बारिश की कमी से बुआई भी प्रभावित
उपमुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से नंजनगुड तालुक में बारिश की स्थिति, बुआई के आंकड़ों और फसल नुकसान की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि तालुक में सामान्य परिस्थितियों में कई प्रमुख फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में आमतौर पर करीब 4,500 हेक्टेयर में लोबिया, 4,200 हेक्टेयर में उड़द, 3,500 हेक्टेयर में मूंग, 3,400 हेक्टेयर में मक्का और लगभग 8,000 हेक्टेयर में कपास की खेती होती है।
हालांकि इस साल बारिश की कमी ने कृषि गतिविधियों को काफी प्रभावित किया है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक केवल करीब 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है। इससे संकेत मिलता है कि सामान्य कृषि क्षेत्र की तुलना में इस बार बुआई का दायरा काफी कम रहा है।
सूखे की मार से खड़ी फसलें भी बर्बाद
बारिश की कमी का असर केवल बुआई पर ही नहीं पड़ा, बल्कि जिन खेतों में किसानों ने फसल बो दी थी, वे भी लंबे सूखे के कारण प्रभावित हुए हैं। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से कई फसलों की वृद्धि रुक गई और कुछ खेतों में पौधे पूरी तरह सूख गए।
परमेश्वर ने किसान शिवबसप्पा और महादेवप्पा के खेतों का भी निरीक्षण किया। इन खेतों में मक्का और सूरजमुखी की फसल बारिश नहीं होने के कारण सूख चुकी थी।
फसल की स्थिति देखने के बाद उपमुख्यमंत्री ने किसानों की परेशानियां सुनीं और अधिकारियों से नुकसान का आकलन समझा। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
कर्ज ने बढ़ाई किसानों की चिंता
फसल खराब होने का सबसे बड़ा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। खेती में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और अन्य खर्च पहले ही हो चुके हैं। ऐसे में यदि उत्पादन नहीं होता है तो किसानों के लिए निवेश की गई रकम वापस हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
नंजनगुड के प्रभावित किसानों ने बताया कि उन्होंने फसल उगाने के लिए उधार लिया था। अब फसल खराब होने के बाद कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। किसानों की मांग है कि सरकार फसल नुकसान के आधार पर आर्थिक सहायता, राहत पैकेज और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराए।
ऐसी परिस्थितियों में सरकारी फसल नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि राहत और मुआवजे से जुड़ी कार्रवाई आमतौर पर प्रभावित क्षेत्र, फसल और नुकसान के स्तर के आकलन पर निर्भर करती है।
कर्नाटक में सूखे की स्थिति पर सरकार की नजर
नंजनगुड में स्थिति का निरीक्षण कर्नाटक में बारिश की कमी से कृषि पर पड़ रहे व्यापक प्रभाव के बीच हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में मानसून की स्थिति कृषि गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
कृषि क्षेत्र के लिए बारिश की कमी का प्रभाव कई स्तरों पर पड़ सकता है। बुआई में देरी, कम क्षेत्र में खेती, फसल की कमजोर वृद्धि और उत्पादन में संभावित गिरावट किसानों की आय को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने की संभावना रहती है।
इसी वजह से राज्य सरकार के लिए प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का वास्तविक आकलन और किसानों तक राहत पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
कावेरी जल विवाद के बीच बढ़ी पानी की अहमियत
नंजनगुड और मैसूरु क्षेत्र में सूखे की स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल के इस्तेमाल और पानी छोड़ने को लेकर कई बार मतभेद सामने आए हैं। सामान्य से कम बारिश होने की स्थिति में जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे समय में कृषि, पेयजल और अन्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाना दोनों राज्यों के लिए चुनौती बन जाता है।
हालांकि नंजनगुड में मौजूदा फसल नुकसान का तत्काल कारण बारिश की कमी बताया गया है, लेकिन क्षेत्रीय जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
प्रशासन ने जल्द राहत का दिया भरोसा
निरीक्षण के दौरान डिप्टी CM ने अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी ली और प्रभावित खेतों का जायजा लिया। किसानों की शिकायतें सुनने के बाद उन्होंने जल्द राहत उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।
दौरे में नंजनगुड के विधायक दर्शन ध्रुवनारायण, मैसूरु के उपायुक्त लक्ष्मीकांत रेड्डी और जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युकेश कुमार समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अब किसानों की नजर सरकार की ओर से होने वाले फसल नुकसान के आकलन और राहत संबंधी फैसलों पर है। प्रभावित किसानों के लिए समय पर सहायता महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि खेती का मौजूदा नुकसान आने वाले कृषि चक्र और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है।
नंजनगुड में सामने आई स्थिति यह दिखाती है कि मानसून में कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता। इससे किसानों की आय, कर्ज चुकाने की क्षमता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। ऐसे में राहत उपायों के साथ जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि रणनीति पर ध्यान देना भी जरूरी होगा।









