नदेसर शूटआउट केस: इलाहाबाद हाईकोर्ट नका बड़ा फैसला, धनंजय सिंह की अपील की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2002 नदेसर शूटआउट केस में धनंजय सिंह की अपील खारिज कर दी। यह फैसला उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पढ़ें पूरी जानकारी और कोर्ट के आदेश।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह को शनिवार (6 दिसंबर) को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने 2002 में वाराणसी के नदेसर इलाके में उनके खिलाफ हुए जानलेवा हमले से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी अपील को खारिज कर दिया।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट से शनिवार (6 दिसंबर) को बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने 2002 में वाराणसी के नदेसर इलाके में हुए जानलेवा हमले से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने यह फैसला जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ला की अध्यक्षता में सुनाया।

कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर मामलों में व्यक्तिगत शिकायतकर्ता के रूप में अपील वैध रूप से पोषणीय नहीं है। इस फैसले के साथ ही धनंजय सिंह की अपील खारिज कर दी गई।

2002 नदेसर शूटआउट: क्या था मामला?

नदेसर शूटआउट केस: इलाहाबाद हाईकोर्ट नका बड़ा फैसला, धनंजय सिंह की अपील की खारिज

यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है। उस समय तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह अपनी कार से लौट रहे थे, तभी वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र में नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। हमले में धनंजय सिंह को कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उनके चार साथी घायल हुए। जवाब में धनंजय सिंह ने भी गोलियां चलाई थीं।

इस घटना में धनंजय सिंह ने तत्कालीन विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इन सभी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में मामला दर्ज किया गया।

ट्रायल कोर्ट का फैसला

29 अगस्त 2025 को वाराणसी के स्पेशल जज (गैंगस्टर एक्ट) सुशील कुमार खरवार ने चारों मुख्य आरोपियों संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद असिंह और सत्येन्द्र सिंह उर्फ बबलू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इसके बाद धनंजय सिंह ने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की। उनके वकीलों का तर्क था कि धनंजय सिंह इस मामले में स्वयं पीड़ित हैं, इसलिए उनकी अपील कानूनी रूप से वैध होनी चाहिए।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट में राज्य द्वारा चलाए गए अभियोजन में व्यक्तिगत शिकायतकर्ता का कोई स्थान नहीं होता। जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ला ने कहा कि व्यक्तिगत अपील इस प्रकार के मामलों में कानूनी रूप से पोषणीय नहीं है। इस कारण धनंजय सिंह की अपील खारिज कर दी गई।

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