NEET UG 2026: बिहार टॉपर आयुष भालोटिया ने बताया सफलता का मंत्र, सेल्फ स्टडी और अनुशासन पर दिया जोर

NEET UG 2026 में बिहार टॉपर बने आयुष भालोटिया ने AIR-4 हासिल किया। जानें कैसे सेल्फ स्टडी, अनुशासन और सीमित मोबाइल उपयोग ने दिलाई बड़ी सफलता।

बिहार के नवादा निवासी आयुष भालोटिया ने NEET UG 2026 में AIR-4 हासिल कर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय नियमित सेल्फ स्टडी, कोचिंग, सीमित मोबाइल उपयोग और अनुशासित दिनचर्या को दिया।

नवादा: NEET UG 2026 में बिहार के नवादा जिले के आयुष भालोटिया ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 हासिल कर राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। 710 अंक हासिल करने वाले आयुष ने अपनी सफलता के पीछे नियमित पढ़ाई, सेल्फ स्टडी, कोचिंग और मोबाइल के संतुलित उपयोग को सबसे अहम बताया है।

बिहार में टॉप, देशभर में चौथी रैंक हासिल

NEET UG 2026 के घोषित परिणामों में बिहार के नवादा जिले के आयुष भालोटिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे राज्य में पहला स्थान और देशभर में चौथी रैंक हासिल की है। वारिसलीगंज प्रखंड के रहने वाले आयुष ने 720 में से 710 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, स्कूल और पूरे जिले में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता को लेकर उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।

NEET UG 2026: बिहार टॉपर आयुष भालोटिया ने बताया सफलता का मंत्र, सेल्फ स्टडी और अनुशासन पर दिया जोर

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आयुष को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि मेहनत, अनुशासन और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आयुष भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाओं से देश और समाज का नाम रोशन करेंगे।

सेल्फ स्टडी और नियमित तैयारी बनी सफलता की कुंजी

अपनी सफलता का राज साझा करते हुए आयुष ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई में नियमितता बनाए रखी और हर दिन तय समय के अनुसार तैयारी की। उनके अनुसार, वे प्रतिदिन लगभग पांच से सात घंटे सेल्फ स्टडी करते थे। इसके अलावा करीब छह घंटे की कोचिंग क्लास भी अटेंड करते थे। उनका मानना है कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही रणनीति और निरंतर अभ्यास भी उतना ही जरूरी है।

आयुष ने कहा कि उन्होंने हर विषय पर बराबर ध्यान दिया और समय-समय पर मॉक टेस्ट व रिवीजन के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत किया। यही कारण रहा कि परीक्षा के दौरान उन्हें आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिली।

मोबाइल का किया सीमित और सही इस्तेमाल

आज के समय में जहां सोशल मीडिया को पढ़ाई में सबसे बड़ा ध्यान भटकाने वाला माध्यम माना जाता है, वहीं आयुष ने मोबाइल का उपयोग पूरी तरह नियंत्रित रखा। उन्होंने बताया कि वे रोजाना लगभग दो से चार घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करते थे, लेकिन उसका उद्देश्य केवल पढ़ाई और जरूरी संवाद तक सीमित था।

वे यूट्यूब पर शैक्षणिक वीडियो देखते थे और व्हाट्सएप व टेलीग्राम के जरिए पढ़ाई से जुड़े साथियों और शिक्षकों के संपर्क में रहते थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इंस्टाग्राम या अन्य मनोरंजन आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करते थे, जिससे उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहा।

स्कूल से लेकर मेडिकल तक का सफर

आयुष ने अपनी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा नवादा के विवेकानंद स्कूल से पूरी की। पढ़ाई के साथ उन्हें फुटबॉल खेलना भी काफी पसंद था। हालांकि, दसवीं कक्षा के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को प्राथमिकता देते हुए खेल से कुछ समय के लिए दूरी बना ली।

आयुष की सफलता यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों में भी सही योजना, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। उनका मानना है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी नियमित हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

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