नेपाल बाढ़: 7 हाइड्रोपावर सुरंगों में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, करीब 5 हजार लोग लापता

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित होने के बाद 13,396 लोगों को बचाया गया है। करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। 7 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में तलाश जारी है।

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत-बचाव अभियान जारी है। अब तक 13,396 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि करीब 5,000 लोग लापता हैं। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश लगातार जारी है।

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। आपदा के करीब दो सप्ताह बाद भी कई इलाकों में मलबा हटाने, संपर्क बहाल करने और लापता लोगों की तलाश का काम चल रहा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के 7 सितंबर के अपडेट के अनुसार, अब तक 13,396 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। इनमें लगभग 600 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,355 शव बरामद किए जा चुके हैं।

सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान उन हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में चल रहा है, जहां बड़ी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया है। नेपाली सेना के मुताबिक प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में करीब 121 लोगों के फंसे होने की आशंका है। सेना का कहना है कि सभी सुरंगों की तलाशी पूरी होने तक अभियान जारी रखा जाएगा, जब तक सरकार इसे रोकने का फैसला नहीं करती।

13,396 लोगों का रेस्क्यू, करीब 5 हजार अब भी लापता

नेपाल सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से 13,396 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें 300 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं। पिछले कुछ दिनों में सुरंगों से भी कुछ लोगों को जिंदा निकाला गया है।

हालांकि, लापता लोगों की संख्या अभी भी बहुत बड़ी है। अधिकारियों के अनुसार करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। विदेशी नागरिकों को लेकर अलग-अलग अपडेट में संख्या में मामूली अंतर रहा है, क्योंकि पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया अभी जारी है।

नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि लापता होने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों की मौत हो चुकी है। दुर्गम इलाकों, खराब संचार व्यवस्था और मलबे के कारण कई लोगों से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।

हाइड्रोपावर सुरंगों में करीब 121 लोगों की तलाश

बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी और अन्य लोग लापता बताए गए थे। हालांकि, नेपाली सेना ने स्पष्ट किया है कि परियोजनाओं से जुड़े करीब 900 लोगों के लापता होने की शुरुआती रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि सभी सुरंगों के भीतर फंसे हैं।

सेना के आकलन के अनुसार करीब 121 लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। इनमें अपर त्रिशूली-1 में 50, अपर त्रिशूली-3A में 40, लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 7 और चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 7 लोगों के फंसे होने की जानकारी दी गई है। बाकी लोग अन्य प्रभावित परियोजनाओं की सुरंगों में हो सकते हैं।

चिलिमे सुरंग में नेपाल और भारत की टीमें

चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बचाव अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में से एक है। यहां सुरंग के भीतर से कीचड़ और मलबा हटाया जा रहा है। नेपाली और भारतीय टीमों ने मिलकर सुरंग में प्रवेश कर तलाशी अभियान चलाया है।

नेपाल में भारतीय विशेषज्ञों की टीम पहले ही प्रभावित हाइड्रोपावर सुरंगों का निरीक्षण कर चुकी है। भारत की तकनीकी टीम में डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल इंजीनियर शामिल थे। भारतीय टीम ने चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र का हवाई सर्वे भी किया था।

अपर त्रिशूली-1 में 400 मीटर तक तलाश

अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भी सुरंग के अंदर व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उपलब्ध स्थानीय अपडेट के मुताबिक बचाव दल ने सुरंग में काफी अंदर तक पहुंचकर तलाशी ली है। यहां थर्मल इमेजिंग और ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।

इस परियोजना में हाल के दिनों में एक चीनी नागरिक को भी सुरंग से जिंदा निकाला गया था। इससे अन्य सुरंगों में फंसे लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद को बल मिला है।

त्रिशूली-3A में दो कर्मचारियों को बचाया गया

त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो नेपाली कर्मचारियों को 4 सितंबर को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। वे कई दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे। उनके बचाव ने अन्य लापता कर्मचारियों के लिए चल रहे अभियानों में नई उम्मीद पैदा की।

बचाव दलों को सुरंगों के भीतर भारी मलबे, पानी और अस्थिर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर बड़े उपकरण पहुंचाना भी मुश्किल है।

नेपाल बाढ़: 7 हाइड्रोपावर सुरंगों में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, करीब 5 हजार लोग लापता

लांगटांग और मेलुंग खोला में भी खोज जारी

लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यहां सुरंग और आसपास के क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

मेलुंग खोला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भी व्यापक क्षेत्र में खोज अभियान चलाया जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ड्रोन की मदद से आसपास के इलाके की निगरानी की जा रही है।

त्रिशूली-3B परियोजना में भी सुरंगों और आसपास के कार्यालय तथा आवासीय क्षेत्रों की जांच की जा रही है। यहां ड्रोन और थर्मल कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रास्ते और संचार व्यवस्था भी बड़ी चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और संचार नेटवर्क को नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर मलबे के कारण सड़कें बंद हैं, जिससे बचाव उपकरण और भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हाई-कैपेसिटी ड्रोन, LiDAR, बेली ब्रिज, DNA टेस्टिंग किट, सुरंग बचाव उपकरण, हाई-कैपेसिटी पंप और अन्य तकनीकी संसाधनों की मांग की है।

लापता भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए DNA सैंपल

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र की आपदा में कई विदेशी नागरिक भी लापता हुए हैं। रेडियो नेपाल के अनुसार 34 देशों के 587 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना दी गई थी, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है। पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया के तहत DNA सैंपल लेने की व्यवस्था भी की जा रही है।

भारत पहले से ही नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है। भारतीय तकनीकी और सुरंग बचाव विशेषज्ञों ने प्रभावित परियोजनाओं में स्थानीय टीमों के साथ काम किया है।

नेपाल ने मांगा 2 करोड़ डॉलर का जलवायु मुआवजा

आपदा के बीच नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु न्याय का मुद्दा भी उठाया है। नेपाल ने बाढ़ से हुए नुकसान के लिए 2 करोड़ डॉलर के मुआवजे की मांग की है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन में बहुत कम योगदान देने के बावजूद नेपाल जैसे पर्वतीय देश इसके गंभीर प्रभाव झेल रहे हैं।

नेपाल का कहना है कि उसका वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान 0.1 प्रतिशत से भी कम है। इसके बावजूद ग्लेशियरों के पिघलने, तापमान बढ़ने और चरम मौसम की घटनाओं का असर देश पर तेजी से बढ़ रहा है।

राहत अभियान के साथ बढ़ रही पुनर्निर्माण की चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन ने केवल जनहानि ही नहीं की, बल्कि सड़क, बिजली, संचार और हाइड्रोपावर ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तत्काल चुनौती लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है। इसके बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना नेपाल के लिए बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल बचाव दलों का सबसे बड़ा लक्ष्य उन सुरंगों तक पहुंचना है जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है। हाल के सफल रेस्क्यू अभियानों ने उम्मीद जगाई है कि कुछ और लोगों को भी जीवित निकाला जा सकता है। नेपाली सेना ने संकेत दिया है कि सुरंगों की तलाशी पूरी होने तक अभियान जारी रहेगा।

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