नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से तबाही, 1,344 मौतें; 5,300 से ज्यादा लोग अब भी लापता

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही जारी है। अब तक 1,344 लोगों की मौत और 5,300 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। भारत ने राहत अभियान के तहत 95 टन सामग्री

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही जारी है। अब तक 1,344 लोगों की मौत और 5,300 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। भारत ने राहत अभियान के तहत 95 टन सामग्री और 54 विशेषज्ञ नेपाल भेजे हैं।

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान जारी है। देश में अब तक 1,344 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 5,300 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच दार्चुला में भूस्खलन से चौलानी नदी का प्रवाह प्रभावित होने के बाद निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई।

दार्चुला में भारी भूस्खलन से चौलानी नदी का रास्ता प्रभावित

नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर नीचे आने के कारण चौलानी नदी का रास्ता कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। इससे नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच संभावित बाढ़ का खतरा बढ़ गया।

प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में सतर्कता बरतने को कहा। हालांकि, शनिवार को उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नदी का बहाव सामान्य रहा और पानी के स्तर में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया।

जिला अधिकारी बार्टराज पौडेल ने बताया कि नदी का रास्ता फिलहाल बंद नहीं है। पहाड़ से मिट्टी और पत्थरों का गिरना भी रुक गया है तथा तत्काल किसी नए खतरे के संकेत नहीं मिले हैं।

इस घटना में किसी व्यक्ति या पशु की मौत नहीं हुई। हालांकि, एहतियाती कदम के तौर पर शुक्रवार को आठ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था।

त्रिशूली क्षेत्र में तीन भारतीयों का रेस्क्यू

नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के बीच त्रिशूली बाजार क्षेत्र से पांच साल के बच्चे समेत तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, अब तक नेपाल में कुल 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, 275 भारतीय अभी भी लापता बताए गए हैं।

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालना भारत के राहत प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। भारतीय अधिकारी नेपाल प्रशासन के साथ मिलकर बचाव और खोज अभियान में सहयोग कर रहे हैं।

नेपाल में मृतकों की संख्या 1,344 पहुंची

नेपाल पुलिस के अनुसार, देश में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है। इसके अलावा तिब्बत में भी 31 लोगों की मौत की सूचना दी गई है।

आपदा के बाद हजारों लोग प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में 5,300 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है।

राहत और बचाव दलों ने अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। वहीं, देशभर में बाढ़ से 32,933 लोग प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाने के लिए अभियान जारी है।

32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से नेपाल में 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं।

आपदा का असर केवल आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। स्कूल-कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे 6,500 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है। चार हेल्थ सेंटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि तीन अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

सड़क और पुलों को भारी नुकसान

बाढ़ ने नेपाल के परिवहन नेटवर्क को भी प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।

इसके अलावा 37 मोटरेबल ब्रिज और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, मध्य नेपाल में 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और लगभग 40 किलोमीटर पक्की सड़कें भी बाढ़ से प्रभावित हुई हैं।

पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने से कई इलाकों में आवागमन बाधित हुआ है। इससे राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में भी चुनौतियां पैदा हुई हैं।

सरकार ने कहा है कि आपदा से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है।

भारत ने नेपाल को भेजी 95 टन राहत सामग्री

भारत ने नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान में सहायता बढ़ाई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है।

यह सामग्री सात विमानों के जरिए नेपाल पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बातचीत कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेजी थी।

भारत ने राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है।

भारतीय टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रभावित इलाकों में काम कर रही हैं।

चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे

विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं।

चीनी आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है। यह घटनाक्रम उन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है जो बाढ़ और भूस्खलन के कारण प्रभावित क्षेत्रों में फंस गए थे।

भारत ने कहा है कि नेपाल सरकार की जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से तबाही, 1,344 मौतें; 5,300 से ज्यादा लोग अब भी लापता

बेली ब्रिज और अन्य राहत सामग्री भेजने की तैयारी

भारत की ओर से नेपाल को आगे भी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री शामिल है।

सड़कों और पुलों को हुए नुकसान के कारण बुनियादी परिवहन व्यवस्था बहाल करना राहत अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में अस्थायी पुल और अन्य जरूरी उपकरण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।

नेपाल में आपदा के बाद 800 अरब नेपाली रुपये से अधिक नुकसान का दावा

नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने आपदा के बाद राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

केसी ने दावा किया कि बाढ़ से नेपाल को 800 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों में समन्वय तथा दीर्घकालिक योजना की कमी दिखाई दी।

उन्होंने सरकार पर आपदा के बाद जरूरतों का आकलन शुरू करने में देरी का आरोप भी लगाया। केसी ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लाइमेट जस्टिस और मुआवजे की मांग उठाने की बात कही।

उनके मुताबिक, इस आपदा ने जलवायु असमानता के मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है।

त्रिशूली-3 ‘A’ परियोजना से मजदूरों को निकाला गया

राहत अभियान के दौरान त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से शुक्रवार को दो मजदूरों को जीवित बाहर निकाला गया।

यह बचाव अभियान ऐसे समय हुआ जब बाढ़ और भूस्खलन से कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। सुरंगों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालना राहत टीमों के लिए विशेष चुनौती बना हुआ है।

बचाव अभियान के साथ नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन कर रहे हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों में मृतकों, लापता लोगों और प्रभावित आबादी की संख्या लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों, सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से पुनर्वास और पुनर्निर्माण की चुनौती भी बढ़ गई है।

विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं की ओर से लंबे समय की आपदा प्रबंधन योजना तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

आगे की चुनौती राहत से पुनर्वास तक

नेपाल में तत्काल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों का उपचार, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और जरूरी संपर्क मार्गों को बहाल करना है। इसके बाद बड़े पैमाने पर पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की जरूरत होगी।

भारत सहित विभिन्न पक्षों की सहायता से बचाव अभियान जारी है। वहीं, नेपाल में प्रशासन के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि दूरदराज और आपदा प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता लगातार पहुंचती रहे।

दार्चुला में भूस्खलन के बाद चौलानी नदी को लेकर पैदा हुई चिंता ने यह भी दिखाया है कि आपदा प्रभावित नेपाल में नए भूस्खलन और अचानक जलप्रवाह जैसी घटनाओं को लेकर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद आपदा के वास्तविक प्रभाव की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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