नई एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड (EPF) स्कीम 2026 को इस सप्ताह सरकार ने देशभर में लागू कर दिया है। केंद्र सरकार ने इसे ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के प्रावधानों के तहत लागू किया है, जिसके साथ पुरानी EPF स्कीम 1952 को प्रतिस्थापित किया गया है।
बिजनेस न्यूज़: केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नई EPF स्कीम 2026 लागू कर दी है। यह नई व्यवस्था सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत लागू की गई है और इसका उद्देश्य करोड़ों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
नई स्कीम के लागू होने के साथ ही लंबे समय से प्रभावी पुरानी EPF Scheme 1952 का स्थान नई व्यवस्था ने ले लिया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से दावों के निपटान में तेजी आएगी, कागजी कार्यवाही कम होगी और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।
EPF योगदान के नियमों में क्या बदलाव हुआ?
नई EPF स्कीम के तहत अनिवार्य भविष्य निधि योगदान की मूल व्यवस्था पहले जैसी ही रखी गई है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को मूल वेतन (Basic Salary) का 12 प्रतिशत EPF में जमा करना होगा। कुछ अधिसूचित संस्थानों के लिए 10 प्रतिशत योगदान की मौजूदा व्यवस्था भी जारी रहेगी। हालांकि, यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 15,000 रुपये से अधिक है, तो नियोक्ता उसकी सहमति के बिना निर्धारित सीमा से अधिक राशि EPF में नहीं काट सकेगा। इससे कर्मचारियों को अपने वेतन प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
आंशिक निकासी के नियम हुए सरल
नई स्कीम में EPF से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। पहले जहां विभिन्न परिस्थितियों के लिए कई अलग-अलग श्रेणियां थीं, अब उन्हें तीन प्रमुख वर्गों में समाहित किया गया है—
- शिक्षा, विवाह और गंभीर बीमारी जैसी आवश्यक जरूरतें
- घर खरीदने, निर्माण या आवास संबंधी आवश्यकताएं
- विशेष परिस्थितियां
इस बदलाव का उद्देश्य क्लेम प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है।
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नौकरी छोड़ने पर निकासी होगी आसान
नई EPF स्कीम के तहत नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को भी बड़ी राहत दी गई है। अब पूर्ण EPF निकासी के लिए पहले जैसी न्यूनतम सदस्यता अवधि की शर्त लागू नहीं होगी। इसके अलावा यदि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) किसी वैध कारण के बिना क्लेम के निपटान में अनावश्यक देरी करता है, तो संबंधित सदस्य को निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज का लाभ भी मिल सकता है। यह प्रावधान समयबद्ध सेवाओं को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसके तहत सभी सदस्यों को अपने आधार, पैन कार्ड और आधार से जुड़े बैंक खाते की जानकारी अपडेट करनी होगी। इससे ऑनलाइन क्लेम, निकासी, खाते से जुड़ी सेवाएं और सत्यापन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होगी।
साथ ही, नियोक्ताओं को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर कर्मचारियों की अद्यतन जानकारी, जैसे यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), वेतन विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज EPFO के रिकॉर्ड में अपडेट करने होंगे।
खाते में न्यूनतम बैलेंस रखना होगा
नई स्कीम के अनुसार, आंशिक निकासी के दौरान कर्मचारियों को अपने EPF खाते में कम से कम 25 प्रतिशत राशि बनाए रखनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा निधि खाते में सुरक्षित बनी रहे। नई EPF स्कीम लागू होने के बाद मौजूदा EPF सदस्य स्वतः नई व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे। इसके लिए किसी नए खाते या अलग पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। वर्तमान UAN और EPF खाते पहले की तरह ही सक्रिय रहेंगे।
नई व्यवस्था का प्रभाव Employees' Deposit Linked Insurance (EDLI) योजना पर नहीं पड़ेगा। किसी सदस्य की मृत्यु की स्थिति में नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को मौजूदा नियमों के अनुसार न्यूनतम 50,000 रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये तक का बीमा लाभ मिलता रहेगा। इसी प्रकार Employees' Pension Scheme (EPS) के मौजूदा सदस्य भी स्वतः नई व्यवस्था के अंतर्गत शामिल माने जाएंगे और उनकी पेंशन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा।










