वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए आर्थिक सुधारों में ज्यादा पूंजी और समर्थन की जरूरत बताई। सरकार 2030 तक सरकारी कर्ज को GDP के 50% तक लाने पर काम करेगी।
Business: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आर्थिक सुधारों को गति देने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए 2030 तक सरकारी उधारी को GDP के 50% तक लाने के लक्ष्य पर काम करेगी। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, LPG और उर्वरकों की आपूर्ति में बाधाओं के बावजूद भारत में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए गए।
2047 तक विकसित भारत के लिए आर्थिक सुधारों पर जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों के साथ पर्याप्त पूंजी और व्यापक समर्थन भी जरूरी होगा।
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सरकार का फोकस आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ राजकोषीय अनुशासन पर भी है। इसी दिशा में सरकारी कर्ज को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया गया है।
सीतारमण ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के साथ सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने पर भी ध्यान देगी। इसका उद्देश्य विकास की जरूरतों और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
2030 तक सरकारी कर्ज GDP के 50% तक लाने का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 2030 तक सरकारी उधारी को GDP के 50% के स्तर तक लाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार इसी दिशा में काम करेगी।
सीतारमण ने भारत के राजकोषीय प्रबंधन की तुलना कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं से करते हुए कहा कि कई देशों पर अभी भी उनकी GDP के 200% से ज्यादा का कर्ज है। इसके मुकाबले भारत ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का रास्ता चुना है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को लेकर तय दिशा में प्रगति की है। वित्त मंत्री के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 तक जिस राजकोषीय अनुशासन के लक्ष्य को हासिल करना था, उसे पूरा कर लिया गया है।
सरकार के लिए कर्ज का स्तर कम करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भविष्य में आर्थिक झटकों से निपटने और विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं के लिए वित्तीय गुंजाइश बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक संकट के बीच जरूरी आपूर्ति बनाए रखने पर जोर
वित्त मंत्री ने वैश्विक स्तर पर बनी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल, LPG और उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद भारत में ईंधन और खाद की कमी नहीं होने दी गई।
वैश्विक बाजार में ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से आयात पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने पर ध्यान दिया।
सीतारमण के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कई देशों का आर्थिक गणित प्रभावित हुआ, लेकिन भारत ने उपलब्ध संसाधनों और सीमाओं के बीच अपने नागरिकों और किसानों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की।
शिपिंग कंपनियों के लिए बजट में विशेष प्रावधान
वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान समुद्री परिवहन की लागत और जोखिम भी बढ़े। वित्त मंत्री ने बताया कि शिपिंग कंपनियों के लिए बढ़े हुए जोखिम प्रीमियम से निपटने के लिए बजट में विशेष फंड का प्रावधान किया गया था।
इसका उद्देश्य आयात से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में किसी तरह की बड़ी रुकावट को रोकना था। समुद्री मार्ग से आने वाली जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनी रहने से घरेलू बाजार पर अचानक दबाव पड़ने की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा, उर्वरक और अन्य जरूरी वस्तुओं के लिए भारत की आयात पर निर्भरता को देखते हुए वैश्विक परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी हुई है।
आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन
सरकार के सामने एक तरफ तेज आर्थिक विकास को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। ऐसे में 2030 तक सरकारी कर्ज को GDP के 50% तक लाने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार आर्थिक सुधारों, निवेश और पूंजी उपलब्धता पर जोर दे रही है। वहीं, वैश्विक संकटों के बीच घरेलू जरूरतों और आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित रखना भी प्राथमिकताओं में शामिल है।
वित्त मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार आने वाले वर्षों में विकास के साथ-साथ सरकारी वित्त को मजबूत करने पर भी फोकस बनाए रखेगी। इससे दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को अधिक स्थिर और बाहरी झटकों के प्रति बेहतर तरीके से तैयार करने का लक्ष्य है।










