रीवा के हनुमना मंडी में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर में सोमवार को 50 वर्षीय नीलू कोल अचानक तबीयत बिगड़ने पर गिर पड़ीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद भर्ती की सलाह दी, लेकिन परिजन निर्णय ले पाते उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शिविर में हंगामा और लापरवाही के आरोप लगने लगे।
MP News: रीवा जिले के हनुमना मंडी में सोमवार को लगे नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 50 वर्षीय नीलू कोल की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। परिजन उन्हें सामान्य जांच के लिए शिविर में लाए थे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। हालांकि परिजन अगला कदम तय कर पाते, उससे पहले ही नीलू कोल ने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद परिजन ने डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए, जिससे शिविर परिसर में गहमागहमी का माहौल बन गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और परिजन व लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। फिलहाल घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के बीच जवाबदेही तय करने की चर्चा तेज हो गई है।
डिप्टी सीएम और 75 डॉक्टर मौजूद
रीवा के हनुमना मंडी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गोरमा दादर की 50 वर्षीय नीलू कोल की जांच के दौरान अचानक मौत हो गई। शिविर में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित करीब 75 डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन समय रहते महिला को बचाया नहीं जा सका। परिजन ने बताया कि वे प्राथमिक जांच के लिए भटकते रहे और काफी प्रयास के बाद डॉक्टरों ने अधिक डायबिटिक होने पर भर्ती करने की सलाह दी। निर्णय लेने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद परिजनों ने लापरवाही के आरोप लगाए।
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प्रशासनिक मौजूदगी पर सवाल
शिविर में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, वरिष्ठ अधिकारी और करीब 75 डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद महिला की मौत ने पूरे आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए। परिजन बताते हैं कि वे लंबे समय तक जांच के लिए भटकते रहे और कई बार अनुरोध करने के बाद ही प्राथमिक जांच हो सकी। डॉक्टरों ने नीलू कोल का शुगर स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया और तुरंत भर्ती करने की सलाह दी थी।
हालांकि, परिजन निर्णय ले पाते उससे पहले ही महिला की हालत अचानक बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शिविर में मौजूद लोगों में गुस्सा फैल गया और परिजनों ने मेडिकल टीम की लापरवाही का आरोप लगाया। मौके पर प्रशासन ने पहुंचकर माहौल शांत कराया।
जांच की मांग तेज
घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने लगी हैं। मऊगंज के पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह ने कहा कि यह गंभीर मामला है, क्योंकि परिजनों के अनुसार महिला घर से पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में आई थी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निगरानी में लगने वाले शिविर में इस तरह की मौत कई सवाल खड़े करती है।
पूर्व विधायक ने साफ कहा कि गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल में भेजने की बात शिविर में कही गई थी, फिर भी ऐसे हालात कैसे बने कि महिला की मौत वहीं हो गई। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।










