नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बनेंगे 9 श्रमिक हॉस्टल, यमुना सिटी में 10 हजार महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित आवास

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में 9 श्रमिक हॉस्टल प्रस्तावित हैं। यमुना सिटी में 10 हजार कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और किफायती आवास मिलेगा।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में श्रमिकों के लिए नौ हॉस्टल बनाने की योजना है। यमुना सिटी के सेक्टर 23 में 10 हजार कामकाजी महिलाओं की क्षमता वाला हॉस्टल प्रस्तावित है। श्रम विभाग ने जमीन मिलने के बाद शासन को प्रस्ताव भेजा है।

ग्रेटर नोएडा: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में नौकरी की तलाश में आने वाले प्रवासी श्रमिकों और कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित व किफायती आवास उपलब्ध कराने की तैयारी है। श्रम विभाग ने हॉस्टल निर्माण के लिए जमीन मिलने के बाद शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। योजना के तहत श्रमिकों के रहने के साथ कैंटीन और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यमुना सिटी के सेक्टर 23 में 10 हजार महिलाओं की क्षमता वाला हॉस्टल भी प्रस्तावित है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में बनेंगे श्रमिक हॉस्टल

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक इलाकों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी में काम करने वाले श्रमिकों के लिए आवास की व्यवस्था बेहतर बनाने की योजना तैयार की गई है। श्रम विभाग ने तीनों क्षेत्रों में हॉस्टल बनाने के लिए संबंधित प्राधिकरणों से जमीन मिलने के बाद शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।

योजना के तहत श्रम विभाग की ओर से नोएडा में दो, ग्रेटर नोएडा में तीन और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में चार हॉस्टल बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण भी अपने स्तर पर दो श्रमिक हॉस्टल बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। इनमें से कई लोगों को किफायती आवास नहीं मिलने के कारण रहने के लिए आसपास के गांवों और अन्य इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता है। हॉस्टल बनने से ऐसे श्रमिकों को काम के नजदीक सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

एक से डेढ़ हजार रुपये तक हो सकता है किराया

प्रस्ताव के मुताबिक, नोएडा में बनने वाले दोनों श्रमिक हॉस्टल में प्रत्येक की क्षमता करीब एक हजार लोगों की होगी। इनमें रहने के लिए प्रति व्यक्ति एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक किराया निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, अंतिम किराया और अन्य शर्तें संबंधित मंजूरी के बाद स्पष्ट होंगी।

ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित हॉस्टलों के लिए तीन-तीन हजार वर्गमीटर जमीन उपलब्ध कराई गई है। वहीं, यीडा क्षेत्र में प्रत्येक हॉस्टल के लिए पांच-पांच हजार वर्गमीटर जमीन श्रम विभाग को दी गई है।

हॉस्टल में केवल रहने की सुविधा ही नहीं, बल्कि श्रमिकों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अन्य व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें कैंटीन, स्वास्थ्य जांच और जॉब कार्ड से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं से श्रमिकों को रहने और कामकाज से जुड़ी जरूरतों के लिए अधिक सुविधाजनक माहौल मिल सकता है।

उपश्रमायुक्त राकेश द्विवेदी के अनुसार, नौ श्रमिक हॉस्टलों के निर्माण के लिए तीनों प्राधिकरणों से भूखंडों पर कब्जा मिल चुका है और प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब निर्माण योजना को आगे बढ़ाने के लिए शासन के फैसले का इंतजार है।

यमुना सिटी में 10 हजार कामकाजी महिलाओं के लिए विशेष हॉस्टल

यमुना सिटी में कामकाजी महिलाओं की भविष्य की आवासीय जरूरतों को देखते हुए सेक्टर 23 में जमीन आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। यहां प्रस्तावित हॉस्टल में करीब 10 हजार महिलाओं के रहने की क्षमता विकसित करने की योजना है।

यमुना सिटी में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के साथ सेमीकंडक्टर उद्योग, अपैरल पार्क और टॉय पार्क जैसी औद्योगिक परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की मांग भी बढ़ सकती है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी अपैरल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। इनके लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। श्रम विभाग के हॉस्टलों में महिलाओं के लिए कितनी जगह निर्धारित होगी, इसका फैसला शासन स्तर पर किया जाना है।

निर्माण को लेकर शासन की मंजूरी का इंतजार

औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की आवास संबंधी जरूरत लंबे समय से एक अहम मुद्दा रही है। प्रस्तावित हॉस्टलों का उद्देश्य श्रमिकों को सुरक्षित आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे कामकाजी महिलाओं को भी रोजगार के स्थान के नजदीक रहने का विकल्प मिल सकता है।

फिलहाल, श्रम विभाग की ओर से प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। निर्माण, किराये, सुविधाओं और संचालन से संबंधित अंतिम विवरण मंजूरी के बाद स्पष्ट होंगे।

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