नवंबर में LRS के तहत विदेश भेजे गए पैसे में गिरावट, RBI डेटा से खुली वजह

नवंबर में LRS के तहत विदेश भेजे गए पैसे में गिरावट, RBI डेटा से खुली वजह

RBI के अनुसार नवंबर 2025 में विदेश भेजा गया पैसा 1.94 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले साल के 1.95 अरब डॉलर से कम है। गिरावट मुख्यतः विदेशी यात्रा और शिक्षा पर खर्च में कमी के कारण आई।

RBI Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2025 में विदेश भेजा गया धन यानी outward remittance गिरावट पर रहा। यह गिरावट विशेष रूप से विदेशी यात्रा और शिक्षा से जुड़े खर्च में कमी के कारण आई। रिजर्व बैंक की उदारीकृत धनप्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme - LRS) के तहत भेजे गए धन में सालाना आधार पर 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1.94 अरब डॉलर पर आ गया। यह वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सबसे निचला स्तर है।

पिछले साल इसी महीने में यह धन 1.95 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी यात्रा और शिक्षा पर खर्च में कमी ने नवंबर में यह असर डाला। LRS के तहत विदेश भेजे जाने वाले कुल धन का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा यात्रा और शिक्षा से जुड़ा होता है।

अप्रैल-नवंबर अवधि में कुल धनप्रेषण में गिरावट

RBI के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में विदेश भेजे गए धन में सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इस दौरान कुल धनप्रेषण 19.10 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 19.97 अरब डॉलर था।

विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा और शिक्षा से जुड़े खर्च में कमी है। वैश्विक अनिश्चितता और भूराजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों और व्यक्तियों के विदेश खर्च को प्रभावित किया है। निवेशक और छात्रों ने पिछले साल की तुलना में इस साल विदेश भेजे जाने वाले धन में अधिक सतर्कता दिखाई।

विदेशी यात्रा पर खर्च में गिरावट

नवंबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर खर्च सालाना आधार पर 1.11 प्रतिशत घटकर 1.10 अरब डॉलर रहा। पिछले साल इसी महीने यह 1.11 अरब डॉलर था। यात्रा से जुड़े धनप्रेषण में यह गिरावट खासतौर पर छुट्टियों और यात्रा योजनाओं में देरी के कारण आई।

एलआरएस के तहत कुल धनप्रेषण में यात्रा का हिस्सा सबसे अधिक होता है। विशेषज्ञों के अनुसार जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता होती है, तो निवेशक और ट्रैवलर्स अपने खर्च में कटौती करते हैं। ऐसे माहौल में यात्रा से जुड़े धनप्रेषण पर असर आना स्वाभाविक है।

शिक्षा के लिए भेजा गया धन घटा

नवंबर में विदेश में शिक्षा के लिए भेजा गया धन सालाना आधार पर 29.85 प्रतिशत घटकर 12.093 करोड़ डॉलर रह गया। विशेषज्ञों के अनुसार शिक्षा से जुड़े धनप्रेषण का अधिक हिस्सा आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर में होता है, क्योंकि यह नए शैक्षणिक सत्र और ट्यूशन फीस जमा करने से जुड़ा होता है।

नवंबर में इस खर्च में कमी आती है, क्योंकि अधिकांश छात्र और परिवार पहले ही फीस और अन्य खर्च निपटा चुके होते हैं। इसके बाद दिसंबर में छुट्टियों और नए सत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर खर्च फिर बढ़ता है।

वैश्विक अनिश्चितता का असर

पृथ्वी एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक पवन कावड ने बताया कि इस साल की शुरुआत में वैश्विक अनिश्चितता और भूराजनीतिक तनाव ने भी धनप्रेषण को प्रभावित किया। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे प्रमुख बाजारों में शिक्षा में मंदी के कारण विदेश भेजा गया पैसा कम हुआ।

उन्होंने कहा कि निवेशकों ने वैश्विक बाजारों में बेहतर संभावनाओं की तलाश और अपनी पोजिशन को हेज करने के लिए विदेश में निवेश बढ़ाया है। पिछले साल की तुलना में निवेश में वृद्धि हुई है, लेकिन यात्रा और शिक्षा जैसे व्यक्तिगत खर्च में गिरावट ने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया।

निवेशकों के लिए संकेत

RBI डेटा से यह स्पष्ट होता है कि विदेश भेजे जाने वाले धन की प्रवृत्ति वैश्विक संकेतों और घरेलू खर्च की प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है। जब वैश्विक बाजार अनिश्चित होते हैं, तो निवेशक सतर्क रहते हैं और व्यक्तिगत खर्च कम करते हैं। वहीं जैसे ही ग्लोबल सेंटिमेंट सुधरता है, यात्रा और शिक्षा पर खर्च में तेजी देखने को मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेश और अंतरराष्ट्रीय यात्रा दोनों में संतुलन देखने को मिल सकता है। दिसंबर और जनवरी में छुट्टियों और नए सत्र के कारण विदेश भेजे जाने वाले धन में फिर बढ़ोतरी की उम्मीद है।

पवन कावड ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार में बेहतर अवसरों की तलाश और निवेशकों की पोजिशन हेज करने की प्रवृत्ति इस साल धनप्रेषण को प्रभावित कर रही है। निवेशक जोखिम कम करने के लिए धीरे-धीरे और सावधानी से पैसा भेज रहे हैं।

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