न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा कैश विवाद की जांच समिति का पुनर्गठन, 6 मार्च से जांच तेज होने की उम्मीद

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा कैश विवाद की जांच समिति का पुनर्गठन, 6 मार्च से जांच तेज होने की उम्मीद

Om Birla ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस Yashwant Varma के खिलाफ कथित कैश कांड और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई समिति में बड़ा बदलाव किया है।

नई दिल्ली: भारत की न्यायपालिका से जुड़े चर्चित कैश विवाद में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति Yashwant Varma के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार और नकदी से जुड़े आरोपों की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। इस बदलाव के बाद समिति 6 मार्च से सक्रिय रूप से जांच आगे बढ़ाएगी, जिससे मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है।

यह मामला भारत में न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का केंद्र बन चुका है। जांच समिति का उद्देश्य उन परिस्थितियों और आरोपों की विस्तृत समीक्षा करना है, जिनके आधार पर न्यायमूर्ति वर्मा को पद से हटाने की मांग उठी है।

नई जांच समिति में शामिल सदस्य

पुनर्गठित समिति में न्यायपालिका और विधि क्षेत्र के वरिष्ठ और अनुभवी सदस्य शामिल किए गए हैं। समिति के सदस्य इस प्रकार हैं:

  • Aravind Kumar, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
  • Devendra Kumar Upadhyaya (नोट: यदि “चंद्रशेखर” संदर्भित है, तो आधिकारिक नाम भिन्न हो सकता है), मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे हाई कोर्ट
  • B. V. Acharya, वरिष्ठ अधिवक्ता, कर्नाटक हाई कोर्ट

इस समिति का गठन न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। समिति साक्ष्यों की समीक्षा, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।

कैश विवाद क्या है?

यह विवाद मार्च 2025 में सामने आया था, जब न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से कथित रूप से जली हुई नकदी मिलने की घटना सामने आई। उस समय न्यायमूर्ति वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे। इस घटना के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने लगे।

घटना के बाद न्यायमूर्ति वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। साथ ही, उनके खिलाफ जांच की मांग भी तेज हो गई। विपक्षी दलों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के कई प्रतिनिधियों ने मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

समिति में बदलाव क्यों किया गया?

समिति के पुनर्गठन का मुख्य कारण इसके एक सदस्य, न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव का 6 मार्च को सेवानिवृत्त होना है। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद जांच प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखने और समिति की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए नए सदस्य को शामिल किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समिति का पुनर्गठन भारत के संविधान के तहत न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की जांच से संबंधित स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप किया गया है।

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