कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई। निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और शुरुआती कारोबार में कमजोरी दिखी।
Stock Market: ईरान में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली, जहां निवेशकों ने बढ़ती महंगाई और सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते बिकवाली को प्राथमिकता दी। पिछले सप्ताह वॉल स्ट्रीट में आई लगातार गिरावट का असर भी एशियाई बाजारों पर साफ दिखाई दिया, जिससे बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है।
एशियाई बाजारों में व्यापक गिरावट
सोमवार के कारोबार में जापान का Nikkei 225 करीब 4.5 प्रतिशत गिरकर 50,979.54 पर आ गया, जो इस क्षेत्र में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक रहा। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स 1.2 प्रतिशत टूटकर 8,417 पर पहुंच गया, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स 3.2 प्रतिशत गिरकर 5,264.32 पर आ गया। हांगकांग का Hang Seng 1.7 प्रतिशत कमजोर होकर 24,519.63 पर बंद हुआ और चीन का Shanghai Composite भी 0.7 प्रतिशत गिरकर 3,884.57 पर आ गया, जिससे साफ है कि गिरावट केवल एक देश तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे एशियाई बाजार में दबाव बना रहा।
तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
एशियाई देशों की चिंता का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर जापान, चीन और अन्य एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। युद्ध के चलते इस मार्ग पर खतरा बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है और यही वजह है कि बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कम होती दिख रही है।
भारतीय बाजार में भी दिखा असर
वैश्विक कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया। सोमवार सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर निफ्टी50 करीब 303 अंक गिरकर 22,516.30 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 1,018 अंक से ज्यादा टूटकर 72,560 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार वैश्विक संकेतों से अलग नहीं रह सकता और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर यहां तुरंत दिखाई देता है।
ब्रॉडर मार्केट में ज्यादा दबाव
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिली, जहां निफ्टी मिडकैप लगभग 1.95 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 2.31 प्रतिशत तक गिर गया। सेक्टर की बात करें तो बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव रहा, खासकर निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स कमजोर रहे, जबकि मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।
कच्चा तेल 115 डॉलर के पार पहुंचा
एनर्जी मार्केट में तेजी जारी रही और ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी 101.92 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध से पहले ब्रेंट की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा हालात ने कीमतों में तेज उछाल पैदा किया है और यह आगे भी महंगाई को प्रभावित कर सकता है।
महंगाई और ग्रोथ पर बढ़ता जोखिम
तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ाती हैं और इससे आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ता है। निवेशकों को डर है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो महंगाई नियंत्रण से बाहर जा सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं और इसका असर शेयर बाजारों पर नकारात्मक रूप में दिखाई देगा।
एक्सपर्ट की राय क्या कहती है
Morningstar Research के सीनियर एनालिस्ट जेवियर ली का मानना है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा, लेकिन निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उनका कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहना चाहिए और बिना सोचे-समझे निवेश करने से बचना चाहिए, क्योंकि बाजार अभी संवेदनशील स्थिति में है।
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी
अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जहां S&P 500 1.7 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ और डाउ जोन्स 793 अंक टूट गया, जिससे यह अपने हालिया उच्च स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया। नैस्डैक कंपोजिट भी 2.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
बॉन्ड और करेंसी मार्केट का हाल
बॉन्ड मार्केट में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.48 प्रतिशत तक पहुंची और बाद में 4.43 प्रतिशत पर बंद हुई, जो युद्ध से पहले के स्तर से ज्यादा है। वहीं मुद्रा बाजार में डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ, जबकि भारतीय रुपया अपने ऑल टाइम लो से उबरकर 93.57 प्रति डॉलर पर खुला, जो यह दिखाता है कि आरबीआई के प्रयासों से कुछ स्थिरता बनी हुई है।









