प्याज की थोक कीमतें एक महीने में 30% बढ़ीं, किसानों को मिला बेहतर भाव; इन राज्यों में सबसे महंगा कांदा

सितंबर 2026 में प्याज की औसत थोक कीमत ₹4,202.49 प्रति क्विंटल पहुंची। मणिपुर, मेघालय और केरल में भाव सबसे ज्यादा रहे, किसानों को बेहतर दाम मिले।

सितंबर 2026 में प्याज की औसत थोक कीमत ₹4,202.49 प्रति क्विंटल पहुंच गई, जो अगस्त से करीब 30% अधिक है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में किसानों को बढ़े भाव का सीधा फायदा मिल रहा है।

Business: देश में प्याज की थोक कीमतों में एक महीने में करीब 30% की तेजी दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में औसत भाव ₹4,202.49 प्रति क्विंटल पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह ₹3,235.10 था। मणिपुर, मेघालय और केरल समेत कई राज्यों में प्याज के ऊंचे दाम बने हुए हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।

एक महीने में 30% बढ़ी प्याज की औसत कीमत

देश के थोक बाजार में प्याज की कीमतों में सितंबर 2026 के दौरान तेज उछाल देखने को मिला है। राज्यवार थोक मूल्य के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में प्याज का औसत भाव ₹4,202.49 प्रति क्विंटल पहुंच गया है। अगस्त में यह कीमत ₹3,235.10 प्रति क्विंटल थी।

प्याज की थोक कीमतें एक महीने में 30% बढ़ीं, किसानों को मिला बेहतर भाव; इन राज्यों में सबसे महंगा कांदा

इस तरह सिर्फ एक महीने में प्याज के औसत थोक भाव में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में इस तेजी का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है। लंबे समय बाद उत्पादकों को मंडियों में अपनी फसल के लिए अपेक्षाकृत बेहतर भाव मिल रहे हैं।

लासलगांव में ₹5,000 तक पहुंचा अधिकतम भाव

महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में 8 सितंबर को प्याज की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिला। यहां न्यूनतम भाव ₹1,200 प्रति क्विंटल, औसत भाव ₹4,400 प्रति क्विंटल और अधिकतम भाव ₹5,000 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

राज्यवार आंकड़ों में मणिपुर में प्याज का थोक भाव सबसे अधिक ₹6,082.30 प्रति क्विंटल रहा। इसके बाद मेघालय में ₹6,028.85 और केरल में ₹5,841.77 प्रति क्विंटल का भाव दर्ज किया गया।

तमिलनाडु में प्याज ₹5,707.81 प्रति क्विंटल और जम्मू-कश्मीर में ₹5,353.20 प्रति क्विंटल के स्तर पर रहा। इससे अलग-अलग राज्यों में प्याज की कीमतों में मौजूद अंतर भी सामने आता है।

इन राज्यों में एक महीने में सबसे ज्यादा तेजी

पिछले महीने की तुलना में सितंबर में गुजरात में प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा मासिक तेजी दर्ज की गई। राज्य में थोक भाव 50.1% तक बढ़े हैं।

उत्तर प्रदेश में प्याज की कीमतों में 45.4% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, चंडीगढ़ में 44.2% और पंजाब तथा महाराष्ट्र में 43.3% की मासिक तेजी दर्ज की गई।

जम्मू-कश्मीर में भी प्याज के भाव पिछले महीने की तुलना में 41.9% बढ़े हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्याज की कीमतों में तेजी केवल किसी एक मंडी या राज्य तक सीमित नहीं है।

सालाना आधार पर आंध्र प्रदेश में 536% से ज्यादा उछाल

सितंबर 2025 की तुलना में इस साल प्याज के दामों में कई राज्यों में असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंध्र प्रदेश में सालाना आधार पर थोक कीमतों में 536.5% की तेजी रही।

मध्य प्रदेश में प्याज के दाम 338.8% बढ़े हैं। महाराष्ट्र में 264.2% और गुजरात में 257.3% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। कर्नाटक में भी प्याज की थोक कीमतों में 243.3% का उछाल आया है।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कई प्रमुख उत्पादक राज्यों में पिछले साल की तुलना में इस साल प्याज के थोक भाव काफी ऊंचे स्तर पर हैं।

किसानों को मिल रहा बढ़ी कीमतों का फायदा

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोले के मुताबिक, कीमतों में तेजी का सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों के बाद किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम प्राप्त हो रहा है।

भारत दिघोले ने बताया कि किसानों ने सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे मंडियों में प्याज बेचने को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, किसानों को NAFED और NCCF को प्याज बेचने से बचने की सलाह दी गई थी, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि सरकारी एजेंसियों के जरिए बाजार में प्याज की बिक्री बढ़ने से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

उनका कहना है कि किसानों का मंडियों में सीधे बिक्री का फैसला उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ है और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिल रहा है।

आगे कीमतों पर रहेगी बाजार की नजर

प्याज की मौजूदा कीमतों में तेजी से किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन उपभोक्ताओं और बाजार के लिए बढ़ते भाव चिंता का विषय भी हो सकते हैं। आने वाले दिनों में आवक, सप्लाई और मंडी कीमतों के आधार पर प्याज के भाव की दिशा तय होगी।

फिलहाल राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में प्याज की कीमतों में व्यापक तेजी बनी हुई है और इसका सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिल रहा है, जिन्हें लंबे समय बाद अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार भाव मिल रहा है।

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