Operation Sindoor से NEET तक, IAF की बड़ी भूमिका; अब राम मंदिर ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी

Operation Sindoor से लेकर NEET-UG पेपर की सुरक्षित डिलीवरी तक IAF ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। अब पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का

देश पर जब भी संकट के बादल मंडराए हैं, भारतीय वायुसेना ने हर बार मजबूती से ढाल बनकर देश की रक्षा की है। चाहे सीमा पर बाहरी खतरा हो या देश के भीतर कोई चुनौती, वायुसेना ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मजबूती के साथ निभाई है।

Indian Air Force: भारत में जब भी किसी बड़े राष्ट्रीय अभियान में तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद लॉजिस्टिक सहायता की जरूरत पड़ी है, भारतीय वायुसेना (IAF) की भूमिका सामने आई है। सैन्य अभियानों से लेकर संवेदनशील परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही तक, वायुसेना ने अलग-अलग परिस्थितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। अब अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में भी वायुसेना के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। उनका चयन ऐसे समय में हुआ है, जब मंदिर परिसर के संचालन, प्रशासन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किए जाने पर जोर है।

Operation Sindoor में IAF की अहम भूमिका

भारतीय वायुसेना की हालिया प्रमुख सैन्य भूमिकाओं में Operation Sindoor का नाम शामिल है। 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। भारत सरकार के अनुसार, इस अभियान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। भारत ने यह भी कहा था कि कार्रवाई आतंकवादी बुनियादी ढांचे तक सीमित थी और इसका उद्देश्य पाकिस्तानी सैन्य या नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना नहीं था।

इस अभियान के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका और क्षमता को लेकर देश में व्यापक चर्चा हुई। वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी, सटीक कार्रवाई और तकनीकी क्षमता इस तरह के अभियानों का अहम हिस्सा रही है।

NEET-UG परीक्षा में भी मिली जिम्मेदारी

IAF की भूमिका केवल रक्षा अभियानों तक सीमित नहीं रही है। NEET-UG 2026 की दोबारा आयोजित परीक्षा के दौरान भी वायुसेना को एक संवेदनशील लॉजिस्टिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रश्नपत्र से जुड़े विवाद के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद गोपनीय प्रश्नपत्रों को देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इस प्रक्रिया में भारतीय वायुसेना ने प्रश्नपत्रों के पैकेट को हवाई मार्ग से विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने में सहयोग किया।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रश्नपत्रों को 18 से अधिक क्षेत्रीय केंद्रों और 20 से ज्यादा स्थानों तक पहुंचाया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्रों की सुरक्षित और नियंत्रित आवाजाही सुनिश्चित करना था, ताकि संवेदनशील सामग्री की हैंडलिंग कम से कम हो और परीक्षा प्रक्रिया में सुरक्षा बनी रहे।

Operation Sindoor से NEET तक, IAF की बड़ी भूमिका; अब राम मंदिर ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी

अब राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में चार दशक से अधिक समय तक सेवा दी है। अब उन्हें अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। CEO बनने के बाद मिश्रा ने अपने चयन को सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि वायुसेना में 43 वर्षों की सेवा के बाद राम मंदिर और श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए विशेष अनुभव है। उन्होंने अपने चयन को भगवान राम का आशीर्वाद भी बताया।

ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के अनुसार, CEO की नियुक्ति का फैसला ट्रस्ट की बैठक में चर्चा के बाद लिया गया। उन्होंने मिश्रा के लंबे प्रशासनिक और सैन्य अनुभव को इस जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सैन्य अनुशासन से मंदिर प्रशासन तक

राम मंदिर ट्रस्ट में मिश्रा की नियुक्ति का एक अहम पहलू उनका लंबा सैन्य अनुभव है। वायुसेना में वरिष्ठ पदों पर काम करने के दौरान उन्हें नेतृत्व, संचालन, सुरक्षा और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं का अनुभव मिला है। राम मंदिर परिसर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सुविधाओं, प्रशासनिक समन्वय और मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना महत्वपूर्ण है।

इस लिहाज से एक पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का अनुभव ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में उपयोगी साबित हो सकता है। Operation Sindoor और NEET जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में IAF की भूमिकाएं यह दिखाती हैं कि वायुसेना की क्षमताएं केवल युद्धक अभियानों तक सीमित नहीं हैं।

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