कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए सरकार की आलोचना की।
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद P. Chidambaram ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों पर मौन रहकर विदेश नीति को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह आरोप लगाया कि भारत की मौजूदा विदेश नीति अब निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के पक्ष में खड़े होने के कारण भारत अपनी पारंपरिक कूटनीतिक संतुलन खो रहा है। उनके अनुसार, भारत ने ईरान के पड़ोसी देशों पर हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को समर्थन दिया, लेकिन उन हमलों पर कुछ नहीं कहा जिनमें करीब 1300 ईरानी नागरिक मारे गए, जिनमें 168 बच्चे भी शामिल थे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव 2817

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 (2026) को पारित किया, जिसमें ईरान के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़ी निंदा की गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हुए हमलों को अनुचित बताया गया।
प्रस्ताव में ईरान से अनुरोध किया गया कि वह रिहायशी इलाकों पर हमले तुरंत रोके और समुद्री व्यापार में किसी भी तरह की दखलअंदाजी और उकसावे वाली कार्रवाई बंद करे। बहरीन ने इस अंतरराष्ट्रीय फैसले का स्वागत किया। चिदंबरम ने सवाल उठाया कि क्या यही सही कूटनीति और निष्पक्ष विदेश नीति है, जब रूस और चीन ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया, लेकिन भारत ने अमेरिका और 12 अन्य देशों का साथ दिया।
पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात
यूएनएससी प्रस्ताव के दौरान भारत की विदेश नीति पर विवाद तेज होने के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को नुकसान बेहद दुखद है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी रुकावट से बचने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति अपनाने की अपील भी की।
पश्चिम एशिया में यह ताजा संकट 28 फरवरी से शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हुई। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल के ठिकानों पर हमला किया। पिछले 14 दिनों से तनाव लगातार बढ़ता रहा है और वैश्विक राजनीति में इसे लेकर चिंता बढ़ रही है।










