पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव फिर बढ़ गया है। कुनार प्रांत में हमले के बाद कई लोगों की मौत हुई है। इस संघर्ष से चीन भी चिंतित है क्योंकि उसके आर्थिक और रणनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
इस्लामाबाद/काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। हाल ही में घोषित अस्थायी सीजफायर तब टूट गया जब pakistan की ओर से अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हवाई या सीमावर्ती हमलों की खबरें सामने आईं।
इन घटनाओं के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ गई और दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई छात्र भी शामिल हैं।
कुनार प्रांत में हताहत, शैक्षणिक संस्थानों पर असर
रिपोर्टों के मुताबिक, हमला अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हुआ, जहां कथित तौर पर शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा। घायलों में करीब 30 छात्र बताए जा रहे हैं।
इस घटना के बाद afghanistan की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। अफगान पक्ष ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, पाकिस्तान की ओर से दावा किया जाता है कि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई थी।
सीमा विवाद पुराना, तनाव बार-बार बढ़ता रहा है
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से मतभेद चला आ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार दोनों देशों के बीच झड़पें और हवाई हमले हो चुके हैं। वर्ष 2025 में भी सीमा पर तनाव के कई दौर देखे गए थे, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले और जवाबी कार्रवाई के आरोप लगाए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्रीय अस्थिरता केवल सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक अविश्वास, आतंकवाद और सीमा सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दे भी शामिल हैं।

पाकिस्तान की “पीस ब्रोकर” छवि पर सवाल
हाल के घटनाक्रमों ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंचों पर शांति वार्ताकार के रूप में प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर सीमा पर सैन्य कार्रवाइयों को लेकर आलोचना का सामना करता रहा है।
अफगानिस्तान के साथ यह ताजा संघर्ष ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
चीन की बढ़ती चिंता: CPEC और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रभाव china_pakistan_economic_corridor (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) पर पड़ सकता है, जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
china लंबे समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र उसके आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ा हुआ है।
चीन की प्रमुख चिंताएं:
- CPEC परियोजनाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है
- सीमा पार उग्रवादी गतिविधियों का जोखिम बढ़ सकता है
- शिनजियांग क्षेत्र तक अस्थिरता फैलने की आशंका
- निवेश और व्यापारिक परियोजनाओं में बाधा
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो यह चीन की अरबों डॉलर की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
आतंकवाद और सुरक्षा का मुद्दा
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से आतंकी समूह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं। वहीं अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है और पाकिस्तान पर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाता है।
इस टकराव में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते, जिससे हर वार्ता के बाद भी स्थिति बार-बार बिगड़ जाती है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ता दबाव
दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच स्थित यह क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल दोनों देशों को प्रभावित करता है, बल्कि पूरे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा नेटवर्क पर भी असर डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की ओर भी बढ़ सकता है।









