पालवास रोड जलभराव संकट: स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ में फंसे, ग्रामीणों की सड़क जाम की चेतावनी

तीन साल से पालवास रोड पर जलभराव के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानी हो रही है। कीचड़ में फंसकर गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने समाधान

सीकर शहर से पालवास गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर तीन वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है। हालात यह हैं कि सड़क पर करीब एक फीट तक पानी भर जाता है, जिससे खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों का रोजाना सफर बेहद मुश्किल हो गया है।

Palwas Road Waterlogging: सीकर के पालवास मार्ग पर लंबे समय से चल रही जलभराव की समस्या अब ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा लेने लगी है। पिछले करीब तीन वर्षों से इस सड़क पर बारिश का पानी जमा होकर कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिसके कारण लोगों का आना-जाना बेहद दुष्कर हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चे रोजाना पक्की सड़क की बजाय कीचड़ और पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं। वहीं वाहन चालकों को भी खस्ताहाल सड़क और जलभराव के बीच से निकलने में भारी परेशानी होती है।

ग्रामीणों ने कई बार सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन को शिकायतें भेजीं, लेकिन समस्या का आज तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही जलभराव की समस्या का निपटारा नहीं किया गया, तो वे सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

सीकर शहर से पालवास गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर करीब तीन वर्षों से जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है। हालात इतने खराब हैं कि आज भी सड़क पर लगभग एक फीट तक पानी भरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन को शिकायतें भेजने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पालवास रोड जलभराव संकट: स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ में फंसे, ग्रामीणों की सड़क जाम की चेतावनी

स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ीं

इस मार्ग से होकर रोजाना बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे गुजरते हैं। कीचड़ और गंदे पानी के कारण बच्चों को जूते हाथ में लेकर पैदल चलना पड़ता है। रोजाना इसी स्थिति का सामना करने से उनकी स्कूल उपस्थिति पर भी असर पड़ रहा है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक जलभराव की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़क जाम आंदोलन शुरू करेंगे। ग्रामीणों ने साफ कहा कि आंदोलन से उत्पन्न हालात की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

गांव के एडवोकेट हनुमान सिंह के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से लगभग 500 मीटर क्षेत्र में लगातार जलभराव हो रहा है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद हर बार केवल टेंडर प्रक्रिया में होने का आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं होता।

बाइक फिसली तो पिता–पुत्र घायल

गांव के निवासी विकास ने बताया कि कुछ दिन पहले वह अपने पिता के साथ सीकर से लौट रहे थे। जलभराव वाले हिस्से से गुजरते समय उनकी बाइक फिसल गई और दोनों सड़क पर गिर गए। हादसे में पिता के हाथ–पैर में चोट आई और विकास का दाहिना पैर फ्रैक्चर हो गया। स्थानीय निवासी ओमप्रकाश जांगिड़ ने बताया कि गांव की स्थिति इतनी दयनीय है कि अंतिम यात्रा भी इसी गंदे पानी और कीचड़ से गुजरते हुए ले जानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शादी–समारोह के समय भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है, क्योंकि बारात को भी इसी गंदगी से होकर निकलना पड़ता है।

सरकारी स्कूल के शिक्षक रामचंद्र बिजारणिया ने बताया कि जलभराव के कारण कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते। खराब उपस्थिति के चलते कई विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने में भी दिक्कत आती है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा रेखा ने बताया कि उन्हें रोजाना जूते हाथ में लेकर इस गंदे पानी को पार करना पड़ता है। वाहनों के निकलने से कपड़ों पर कीचड़ के छींटे पड़ जाते हैं, जिससे यूनिफॉर्म रोज खराब हो जाती है।

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