पंचकूला में सेना नायक की ब्रेन डेड पत्नी का अंगदान, ग्रीन कॉरिडोर से 3 राज्यों में भेजे गए ऑर्गन

पंचकूला में सेना नायक की 30 वर्षीय ब्रेन डेड पत्नी के परिवार ने अंगदान किया। ग्रीन कॉरिडोर से ऑर्गन दिल्ली, नोएडा और रोहतक भेजे गए।

पंचकूला में सेना नायक की 30 वर्षीय ब्रेन डेड पत्नी के परिवार ने अंगदान का फैसला लिया। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ऑर्गन दिल्ली, नोएडा और रोहतक भेजे गए। महिला मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली थीं।

पंचकूला: सेना नायक की 30 वर्षीय पत्नी के ब्रेन डेड होने के बाद परिवार ने अंगदान का फैसला लेकर मिसाल पेश की। इसके बाद पंचकूला से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महिला के ऑर्गन दिल्ली, नोएडा और रोहतक भेजे गए। महिला मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली थीं। अंगदान के फैसले के बाद सेना के अधिकारियों ने परिवार को सम्मानित भी किया।

ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने लिया अंगदान का फैसला

पंचकूला स्थित आर्मी अस्पताल में सेना नायक की पत्नी का इलाज चल रहा था। चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद परिवार ने दुख की इस घड़ी में उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया।

पंचकूला में सेना नायक की ब्रेन डेड पत्नी का अंगदान, ग्रीन कॉरिडोर से 3 राज्यों में भेजे गए ऑर्गन

परिवार के इस फैसले से जरूरतमंद मरीजों को जीवन बचाने का अवसर मिल सका। अंगदान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों और संबंधित टीमों ने आवश्यक चिकित्सा तैयारियां कीं।

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर भेजे गए ऑर्गन

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऑर्गन को निर्धारित अस्पतालों तक सुरक्षित और कम से कम समय में पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पंचकूला से ऑर्गन को दिल्ली, नोएडा और रोहतक के लिए रवाना किया गया।

अंग प्रत्यारोपण के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए ऑर्गन को संबंधित अस्पतालों तक जल्द पहुंचाने के लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की मदद से ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की गई।

सेना अधिकारियों ने परिवार को किया सम्मानित

अंगदान के इस फैसले के बाद सेना के अधिकारियों ने परिवार को सम्मानित किया। परिवार ने व्यक्तिगत दुख के बीच अंगदान का फैसला लेकर दूसरों को जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महिला राजस्थान की रहने वाली थीं और उनकी उम्र 30 वर्ष थी। उनके परिवार के इस निर्णय को अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

अंगदान के जरिए ब्रेन डेड व्यक्ति के स्वस्थ अंगों का इस्तेमाल जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया जा सकता है। इस मामले में भी परिवार की सहमति के बाद संबंधित चिकित्सा प्रक्रिया पूरी की गई और ऑर्गन को अलग-अलग शहरों में भेजा गया।

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