भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi इस वर्ष Netherlands की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह जानकारी भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत Marisa Gerards ने दी। हालांकि यात्रा की सटीक तिथियां अभी तय नहीं हुई हैं, लेकिन उन्होंने पुष्टि की कि दौरा इसी वर्ष होगा।
नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी इस वर्ष नीदरलैंड्स की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे से भारत और नीदरलैंड्स के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। नीदरलैंड्स की राजदूत Marisa Gerards ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी इस वर्ष उनके देश का दौरा करेंगे। रविवार को राजदूत आवास स्थित ट्यूलिप बगीचे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह घोषणा की और दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला।
रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ते कदम
राजदूत गेरार्ड्स ने नई दिल्ली स्थित राजदूत आवास के ट्यूलिप गार्डन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दोनों देश अब पारंपरिक व्यापारिक सहयोग से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की ओर अग्रसर हैं। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आर्थिक सुरक्षा और मुक्त नौवहन (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और उभरती तकनीकों की प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत और नीदरलैंड्स के बीच तकनीकी सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है। नीदरलैंड्स यूरोप में हाई-टेक इनोवेशन और सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र है, जबकि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
यूरोपीय संघ में सबसे बड़ा भारतीय डायस्पोरा
राजदूत के अनुसार, ब्रेक्सिट के बाद यूरोपीय संघ के भीतर नीदरलैंड्स में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी उपस्थिति है। लगभग 80,000 लोगों का यह समुदाय छात्रों, आईटी प्रोफेशनल्स और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत विशेषज्ञों से मिलकर बना है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहा है।
इतिहास की बात करें तो 19वीं सदी में बिहार और उत्तर प्रदेश से कई भारतीय सूरीनाम के रास्ते नीदरलैंड्स पहुंचे थे। आज वही समुदाय इंडो-डच संबंधों की नींव को मजबूत बनाए हुए है।
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ट्यूलिप महोत्सव: सांस्कृतिक कूटनीति का प्रतीक
कार्यक्रम के दौरान ट्यूलिप महोत्सव को भारत-नीदरलैंड्स के जीवंत संबंधों का प्रतीक बताया गया। राजदूत और उनके पति पीटर कूप ने कहा कि यह आयोजन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता को दर्शाता है। इस वर्ष एआई इंपैक्ट समिट के कारण महोत्सव समय पर आयोजित नहीं हो सका, लेकिन अगले वर्ष इसे और भव्य रूप में आयोजित करने की योजना है।
ट्यूलिप नीदरलैंड्स की पहचान का अहम हिस्सा है। 17वीं सदी में देश में “ट्यूलिप मैनिया” का दौर आया था, जब दुर्लभ ट्यूलिप कंदों की कीमतें Amsterdam Stock Exchange में घरों के बराबर पहुंच गई थीं। हालांकि वह आर्थिक उन्माद बाद में समाप्त हो गया, लेकिन ट्यूलिप आज भी वैश्विक स्तर पर वसंत उत्सवों का प्रमुख आकर्षण है।
भारतीय हस्तियों के नाम पर ट्यूलिप किस्म?
राजदूत ने 1981 की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म Silsila का उल्लेख करते हुए कहा कि इस फिल्म में दिखाए गए ट्यूलिप के दृश्यों ने भारतीय दर्शकों को नीदरलैंड्स से जोड़ा। उन्होंने बताया कि विश्वभर में ट्यूलिप की 3,000 से अधिक आधिकारिक किस्में पंजीकृत हैं। साल 2005 में मिस वर्ल्ड रह चुकीं Aishwarya Rai के नाम पर एक दुर्लभ पीले-लाल ट्यूलिप किस्म का नामकरण भी किया गया था।
राजदूत ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष किसी प्रमुख भारतीय व्यक्तित्व के नाम पर एक नई ट्यूलिप किस्म का नाम रखा जा सकता है। इस संबंध में वह नीदरलैंड्स सरकार से चर्चा करेंगी।









