धानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को तीन कल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत योजनाओं के नाम से ‘इंदिरा गांधी’ शब्द हटाकर उसकी जगह ‘प्रधानमंत्री’ जोड़ा गया है।
NSAP Scheme Name Change: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ करने का फैसला लिया गया है। इस बदलाव के तहत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर संचालित तीन पेंशन योजनाओं के नाम से उनका नाम हटाकर ‘प्रधानमंत्री’ शब्द जोड़ा गया है।
सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों सहित लगभग 3.2 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
इंदिरा गांधी के नाम वाली तीन पेंशन योजनाओं के नाम बदले
केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहचान में बदलाव करते हुए तीन प्रमुख पेंशन योजनाओं के नाम संशोधित किए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के तहत योजनाओं के नाम इस प्रकार होंगे:
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS): अब इसे प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कहा जाएगा।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (IGNWPS): इसका नया नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना होगा।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगजन पेंशन योजना (IGNDPS): अब यह प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम से जानी जाएगी।
इन बदलावों के साथ केंद्र सरकार ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम के नाम में भी संशोधन किया है। अब राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, नाम बदलने के फैसले और योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों में बदलाव को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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2030-31 तक जारी रहेगी सामाजिक सहायता योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल और जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए 53,428 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के जरूरतमंद नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इस कार्यक्रम से लगभग 3.2 करोड़ लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ऐसी योजनाएं नियमित सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम की निरंतरता से मौजूदा लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत सहायता मिलती रहने की उम्मीद है। हालांकि, अलग-अलग योजनाओं के लाभ, पात्रता और भुगतान से संबंधित विस्तृत नियमों को संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार समझना होगा।
परिवार लाभ योजना का नाम भी बदला
पेंशन योजनाओं के अलावा सरकार ने राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना करने का फैसला किया है। यह योजना जरूरतमंद परिवारों को निर्धारित परिस्थितियों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। मंत्रिमंडल ने कुछ योजनाओं के नाम और संबंधित प्रावधानों में बदलाव को मंजूरी दी है।
वहीं, वरिष्ठ नागरिकों और विधवाओं के लिए पेंशन योजनाओं तथा परिवार लाभ योजना को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखने की बात भी सामने आई है। इसलिए लाभार्थियों को केवल नाम में बदलाव के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी पात्रता शर्तें या सहायता राशि भी बदल गई हैं।
दिव्यांगजन पेंशन योजना में पात्रता के नियमों में बदलाव
सरकार ने दिव्यांगजन पेंशन योजना के तहत पात्रता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मानक में भी संशोधन को मंजूरी दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिव्यांगता का निर्धारित मानक पहले 80 प्रतिशत था, जिसे घटाकर 40 प्रतिशत किया गया है। इससे पात्रता के दायरे में अधिक दिव्यांग व्यक्तियों के आने की संभावना है, बशर्ते वे योजना की अन्य शर्तें पूरी करते हों।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, 0 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये की सहायता दिए जाने का उल्लेख किया गया है। लाभार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वास्तविक भुगतान, अन्य सहायता और पात्रता की पुष्टि संबंधित आधिकारिक नियमों से की जानी चाहिए।









