RBI की दर कटौती और बेहतर liquidity माहौल के बीच PFC और SIDBI बॉन्ड मार्केट से 11,500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। नीति बदलाव के बाद कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में गतिविधि बढ़ी है जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
PFC–SIDBI: भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में इस समय नई गतिविधि देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया Monetary Policy Committee बैठक में 25 आधार अंकों की रेपो रेट कटौती के बाद बाजार की धारणा में स्पष्ट सुधार हुआ है। इसी सकारात्मक माहौल में सरकारी स्वामित्व वाली Power Finance Corporation (PFC) और Small Industries Development Bank of India (SIDBI) मिलकर बॉन्ड मार्केट से 11,500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रेट-कट माहौल और बेहतर liquidity outlook के चलते कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा।
कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में सुधार की शुरुआत
हालिया नीति फैसलों के बाद कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में तेजी का संकेत मिला है। RBI द्वारा ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने Open Market Operations (OMO) और rupee-dollar swap की घोषणा भी की है, जिसने liquidity को लेकर निवेशकों में भरोसा बढ़ाया है।
मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, बॉन्ड मार्केट आने वाले हफ्तों में और सक्रिय हो सकता है। कई लंबी अवधि के फंड और संस्थागत निवेशक ऐसे ही अवसरों की तलाश में रहते हैं जहां उन्हें स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न मिल सके।
PFC ने पहले बॉन्ड इश्यू रोका
Power Finance Corporation ने पिछले महीने यानी 25 नवंबर को 3,000 करोड़ रुपये के तीन वर्षीय बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया रोक दी थी। उस समय कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई थी, जिसके कारण कंपनी ने यह कदम उठाया था। साथ ही कई अन्य जारीकर्ताओं ने भी नीतिगत घोषणाओं से पहले निवेश लेने का विकल्प चुना था। उन्हें उम्मीद थी कि दीर्घकालिक यील्ड स्थिर रहेगी, लेकिन मार्केट वैल्यू में असमानता के चलते कई डील रद्द करनी पड़ीं।
अब जब RBI की घोषणा के बाद माहौल में सुधार दिख रहा है, PFC और SIDBI दोनों ने बॉन्ड मार्केट में प्रवेश करने की फिर से रणनीति बनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सही समय है जब कंपनियां कम लागत पर पूंजी जुटा सकती हैं।
SIDBI भी जुटाएगा बड़ी रकम
SIDBI भी PFC के साथ मिलकर कुल मिलाकर 11,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि SIDBI लंबे समय से लंबी अवधि की फंडिंग को आकर्षित करने के अवसर तलाश रहा था। ब्याज दरों में कटौती से उसके लिए बाजार अनुकूल हुआ है।
SIDBI के बॉन्ड मुख्य रूप से उन फंडों को आकर्षित करेंगे जो Provident Fund, Pension Fund और अन्य दीर्घकालिक institutional investors के रूप में जाने जाते हैं। ये संस्थान स्थिर और सुरक्षित रिटर्न वाले बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं।
मार्केट विशेषज्ञों का विश्लेषण
Rockford FinCap LLP के प्रबंधकीय साझेदार और संस्थापक वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने बताया है कि कई संगठन फिलहाल बॉन्ड मार्केट में तुरंत प्रवेश की योजना नहीं बना रहे थे। वजह यह थी कि वे नीतिगत स्थितियों के और स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे थे। अब जब RBI द्वारा दर कटौती और liquidity समर्थन की घोषणा हो चुकी है, तो संस्थान निर्गम की तैयारी में लग गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई फंड लंबी अवधि के बॉन्ड निर्गमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लक्ष्य है कि भविष्य निधि और पेंशन फंड जैसे संस्थानों से पूंजी आकर्षित की जाए, क्योंकि इन फंडों में इस समय बड़े स्तर पर inflow दर्ज होता है।
कई प्रमुख फंड पहले ही अपने regulatory और asset allocation लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूंजी लगाना शुरू कर चुके हैं। यह भी संकेत देता है कि कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट धीरे-धीरे फिर से सक्रिय हो रहा है।
अक्टूबर में बॉन्ड मार्केट में बड़ी हलचल
अक्टूबर 2025 में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में उल्लेखनीय गतिविधि देखी गई थी। उस महीने कंपनियों ने कुल मिलाकर 17,500 करोड़ रुपये जुटाए थे। इनमें सबसे बड़ी डील Bharti Telecomm की रही थी, जिसने दो चरणों में 10,500 करोड़ रुपये बॉन्ड के जरिए जुटाए थे।
यह दिखाता है कि बड़ी कंपनियां अपनी फंडिंग जरूरतों के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड को सुरक्षित और कुशल विकल्प मानती हैं। अब PFC और SIDBI के नए निर्गम से बाजार में और तेजी आने की संभावना है।
रेपो रेट कटौती ने क्यों बढ़ाई उम्मीदें
रेपो दर में कटौती का असर सीधे तौर पर उधारी की लागत पर पड़ता है। दरें कम होने से:
- बॉन्ड पर यील्ड घटती है।
- कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान होता है।
- निवेशकों के लिए सुरक्षित और स्थिर विकल्पों में निवेश की इच्छा बढ़ती है।
- liquidity में सुधार होता है और बाजार में अनुकूल माहौल बनता है।
- RBI की हालिया घोषणाएं इसी दिशा में बाजार को सकारात्मक संकेत देती हैं।








