PM मोदी को गले लगा सकते हैं तो पिनाराई से दूरी क्यों: CPI(M) का राहुल पर तंज

CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने INDIA गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने पिनाराई विजयन को लेकर कांग्रेस के रुख पर नाराजगी जताई।

INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद फिर सामने आए हैं। CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सहयोगी दलों पर सार्वजनिक आरोप गठबंधन की एकता को कमजोर करते हैं। उन्होंने आत्ममंथन की जरूरत भी बताई।

नई दिल्ली: विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कई तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगा सकते हैं, तो फिर राजनीतिक मतभेदों का हवाला देकर केरल के वरिष्ठ वामपंथी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से दूरी क्यों बनाए रखते हैं।

एम.ए. बेबी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में नई दिल्ली में INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। विपक्षी एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में 25 से अधिक दलों के नेता शामिल हुए थे, लेकिन बैठक के बाद सहयोगी दलों के बीच मौजूद असहजता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।

INDIA गठबंधन की बैठक में उठा मुद्दा

CPI(M) महासचिव एम.ए. बेबी ने खुलासा किया कि INDIA गठबंधन की हालिया बैठक के दौरान वामपंथी दलों ने कांग्रेस के सामने कुछ गंभीर सवाल रखे थे। उनका कहना था कि गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी करना विपक्षी एकता को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने CPI(M) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) पर भारतीय जनता पार्टी के साथ गुप्त समझौते के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ भी तीखी राजनीतिक टिप्पणियां की थीं।

बेबी के मुताबिक, यह सवाल केवल चुनावी प्रतिस्पर्धा का नहीं बल्कि गठबंधन की विश्वसनीयता का भी है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर सभी दल भाजपा के खिलाफ एकजुटता की बात करते हैं, तो फिर राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाना कई सवाल खड़े करता है।

राहुल गांधी पर सीधा सवाल

एम.ए. बेबी का सबसे चर्चित बयान राहुल गांधी को लेकर रहा। उन्होंने कहा कि संसद में राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाकर राजनीतिक शिष्टाचार का परिचय दे सकते हैं, लेकिन केरल की राजनीति में पिनाराई विजयन के प्रति उनका रवैया बिल्कुल अलग दिखाई देता है।

उन्होंने पूछा कि यदि विपक्षी दलों के बीच संवाद और सम्मान की राजनीति की बात की जाती है, तो फिर कांग्रेस और CPI(M) के बीच लगातार बढ़ रही दूरी को कैसे उचित ठहराया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं बल्कि कांग्रेस और वाम दलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का सार्वजनिक प्रदर्शन है।

पिनाराई विजयन की गिरफ्तारी की मांग पर नाराजगी

एम.ए. बेबी ने विशेष रूप से उन बयानों पर नाराजगी जताई जिनमें कांग्रेस नेताओं ने पिनाराई विजयन की गिरफ्तारी की मांग उठाई थी।

उन्होंने कहा कि केरल चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बार-बार यह सवाल उठाया कि पिनाराई विजयन को अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

बेबी ने कहा कि जब एक ही राजनीतिक गठबंधन के सदस्य सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ ऐसी मांगें करते हैं तो इससे गठबंधन की भावना कमजोर होती है।

उनका कहना था कि विपक्षी दलों को यह तय करना होगा कि वे भाजपा के खिलाफ साझा राजनीतिक संघर्ष को प्राथमिकता देंगे या फिर राज्यों में एक-दूसरे को कमजोर करने की राजनीति जारी रखेंगे।

कांग्रेस और लेफ्ट के रिश्तों की पुरानी कहानी

भारत की राजनीति में कांग्रेस और वाम दलों के रिश्ते हमेशा जटिल रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर दोनों कई बार एक-दूसरे के सहयोगी बने हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में दोनों दलों के बीच सीधी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी रही है।

केरल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां कांग्रेस नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और CPI(M) नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) दशकों से एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के बावजूद राज्य स्तर पर दोनों दलों के बीच तीखे राजनीतिक हमले देखने को मिलते रहे हैं।

INDIA गठबंधन के सामने चुनौती

2024 के बाद गठित विपक्षी INDIA गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों को एक मंच पर लाना था। हालांकि गठबंधन की शुरुआत से ही यह सवाल उठता रहा है कि जिन दलों के बीच राज्यों में सीधा मुकाबला है, वे राष्ट्रीय स्तर पर कितने प्रभावी तरीके से साथ काम कर पाएंगे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस और CPI(M) के बीच हालिया बयानबाजी इसी चुनौती को उजागर करती है।

एक ओर विपक्ष भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सहयोगी दलों के बीच अविश्वास और प्रतिस्पर्धा गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर रही है।

8 जून की बैठक में जुटे थे 25 दल

नई दिल्ली में 8 जून को आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में करीब 25 विपक्षी दलों के लगभग 50 वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया था। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की थी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के आगामी सत्र, राष्ट्रीय राजनीतिक रणनीति और विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना था। हालांकि बैठक के बाद सामने आए बयानों ने संकेत दिया कि गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं।

क्या विपक्षी एकता पर पड़ेगा असर?

एम.ए. बेबी के ताजा बयान ने विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सहयोगी दल सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे तो INDIA गठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बड़े गठबंधनों में विचारधारात्मक और क्षेत्रीय मतभेद सामान्य बात हैं। महत्वपूर्ण यह है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर दल कितनी प्रभावी एकजुटता दिखा पाते हैं।

फिलहाल CPI(M) के बयान ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर सभी मुद्दों पर पूर्ण सहमति नहीं है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और वाम दल इन मतभेदों को सुलझाकर साझा राजनीतिक एजेंडे पर आगे बढ़ते हैं या फिर यह विवाद INDIA गठबंधन के लिए नई चुनौती बनता है।

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