Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की दमदार अदाकारी ने जीता दिल, 26/11 हमले के बाद इंसाफ की लड़ाई दिखाती है फिल्म

Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की दमदार अदाकारी वाली यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद इंसाफ की लड़ाई को दिखाती है। जानें फिल्म की कहानी,

26/11 मुंबई आतंकी हमले की भयावह यादें आज भी देशवासियों के दिलों में ताजा हैं। इस त्रासदी पर अब तक कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं, लेकिन ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ इस घटना को एक अलग नजरिए से पेश करती है।

  • मूवी रिव्यू: प्रहार - द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम
  • ऐक्टर: राजकुमार राव, वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, ललित प्रभाकर
  • श्रेणी: Hindi, Biopic, Thriller, Drama
  • डायरेक्टर: अविनाश अरुण
  • अवधि: 2 Hrs 20 Min

Prahaar Review: राजकुमार राव, वामिका गब्बी, सिकंदर खेर और जयदीप अहलावत की फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। निर्देशक अविनाश अरुण की यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद चली लंबी कानूनी लड़ाई और सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका पर केंद्रित है। फिल्म का उद्देश्य केवल एक भयावह आतंकी घटना को दोबारा पर्दे पर दिखाना नहीं, बल्कि यह समझाना भी है कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय तक पहुंचने के लिए कानूनी प्रक्रिया और ठोस सबूत कितने अहम होते हैं। आइए जानते हैं कि कहानी, निर्देशन और कलाकारों के अभिनय के लिहाज से यह फिल्म कैसी है।

Prahaar की कहानी: 26/11 हमले के बाद न्याय की चुनौती

‘प्रहार’ की कहानी सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन और उनके पेशेवर संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है। निकम का अधिकांश समय जटिल मुकदमों की तैयारी और अदालत में न्याय के लिए लड़ने में बीतता है। इसका असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ता है। परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाने और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

इसी दौरान 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला होता है। इस घटना में कई निर्दोष लोगों की जान जाती है और पूरा देश सदमे में आ जाता है। हमले के दौरान पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ मुकदमा लड़ने की जिम्मेदारी निकम को मिलती है।

फिल्म का महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब हमले से जुड़े सबूत, तस्वीरें और गवाह मौजूद थे, तब भी दोषी को सजा दिलाने की प्रक्रिया में इतना समय क्यों लगा? कहानी इसी कानूनी संघर्ष के जरिए न्याय व्यवस्था की जटिलताओं को सामने लाती है।

निर्देशन और कहानी: भावनाओं से ज्यादा कानून पर जोर

Prahaar Movie Review: राजकुमार राव की दमदार अदाकारी ने जीता दिल, 26/11 हमले के बाद इंसाफ की लड़ाई दिखाती है फिल्म

निर्देशक अविनाश अरुण ने फिल्म को अनावश्यक रूप से भावुक या आक्रामक बनाने के बजाय संयमित अंदाज में पेश किया है। फिल्म का केंद्र बदले की भावना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर न्याय हासिल करने की प्रक्रिया है। यही दृष्टिकोण इसे सामान्य क्राइम थ्रिलर से अलग पहचान देता है।

कोर्टरूम के कई दृश्य कहानी को प्रभावशाली बनाते हैं। गवाहों के बयान, कसाब से जुड़ी कानूनी कार्यवाही और अदालत में रखी जाने वाली दलीलें दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि किसी आरोपी के लिए कानूनी बचाव उपलब्ध होना और उसके अपराध का समर्थन करना दो अलग-अलग बातें हैं।

हालांकि, उज्ज्वल निकम की पारिवारिक जिंदगी से जुड़े कुछ हिस्से मुख्य कहानी की रफ्तार को धीमा करते हैं। उनकी कानूनी रणनीतियों को और विस्तार से दिखाया जाता, तो कोर्टरूम ड्रामा अधिक मजबूत बन सकता था। संगीत के स्तर पर भी सुधार की गुंजाइश महसूस होती है।

राजकुमार राव की अदाकारी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

उज्ज्वल निकम की भूमिका में राजकुमार राव का अभिनय फिल्म का प्रमुख आकर्षण है। वह किरदार की गंभीरता, आत्मविश्वास और पेशेवर प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनके हाव-भाव और संवाद अदायगी किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। अदालत के दृश्यों में उनका संयमित प्रदर्शन कहानी के प्रभाव को बढ़ाता है।

वामिका गब्बी ने निकम की पत्नी की भूमिका में सहज अभिनय किया है। उनका किरदार उस परिवार की भावनात्मक स्थिति को सामने लाता है, जिसकी जिंदगी किसी व्यक्ति के कठिन पेशे और लगातार व्यस्तता से प्रभावित होती है।

कसाब का बचाव करने वाले वकील अब्बास काजमी की भूमिका में सिकंदर खेर ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनका किरदार न्यायिक व्यवस्था में निष्पक्ष सुनवाई और आरोपी के कानूनी अधिकारों की अहमियत को रेखांकित करता है। वहीं, चौधरी जुल्फिकार अली की भूमिका में जयदीप अहलावत अपनी मौजूदगी से कहानी को मजबूती देते हैं।

अजमल कसाब के किरदार में ललित प्रभाकर का अभिनय भी उल्लेखनीय है। उनका प्रदर्शन किरदार की बेचैनी और असहजता को उभारता है। सहायक भूमिकाओं में आशीष विद्यार्थी, अजिंक्य देव और अन्य कलाकार कहानी को विश्वसनीय बनाने में योगदान देते हैं।

क्या ‘Prahaar’ देखने लायक फिल्म है?

‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ उन दर्शकों को पसंद आ सकती है, जिन्हें वास्तविक घटनाओं से प्रेरित फिल्में, कोर्टरूम ड्रामा और गंभीर सामाजिक विषयों पर बनी कहानियां पसंद हैं। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह 26/11 जैसी भयावह घटना की पृष्ठभूमि में न्याय, संवैधानिक मूल्यों और कानूनी जवाबदेही की चर्चा करती है।

कुछ हिस्सों में कहानी की गति धीमी पड़ती है और कानूनी पहलुओं को अधिक विस्तार देने की जरूरत महसूस होती है। इसके बावजूद राजकुमार राव का अभिनय और फिल्म का गंभीर विषय इसे देखने की वजह देते हैं।

Leave a comment