हमारे फैन भी जाति-धर्म में बंट जाते हैं, शिक्षा से सुधरेगा बिहार': शिक्षक सम्मेलन में बोले प्रशांत किशोर

गया में शिक्षक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को बदलने के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। उन्होंने जाति-धर्म की राजनीति पर भी निशाना साधा।
हमारे फैन भी जाति-धर्म में बंट जाते हैं, शिक्षा से सुधरेगा बिहार': शिक्षक सम्मेलन में बोले प्रशांत किशोर
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गया। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने गया में आयोजित शिक्षक सम्मेलन में बिहार की शिक्षा व्यवस्था और राज्य की राजनीति को लेकर अपनी बात रखी। शिक्षकों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी जरूरत बेहतर शिक्षा व्यवस्था है। उनका कहना था कि राज्य में बदलाव केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि शिक्षा को मजबूत करके लाया जा सकता है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में लोगों को लंबे समय से जाति और धर्म के आधार पर बांटकर राजनीति की जाती रही है। उन्होंने इसी संदर्भ में अपने समर्थकों और प्रशंसकों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके फैन भी कई बार जाति और धर्म में बंट जाते हैं। उनके मुताबिक जब तक समाज इस तरह की पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं देगा, तब तक बिहार में वास्तविक बदलाव मुश्किल है।

उन्होंने शिक्षक सम्मेलन में मौजूद शिक्षकों से कहा कि शिक्षा किसी भी समाज को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी तो वे अपने भविष्य के बारे में बेहतर फैसले ले सकेंगे और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकेंगे। उनका जोर इस बात पर था कि बिहार की राजनीति में शिक्षा को सबसे प्रमुख मुद्दा बनाया जाना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को आगे ले जाने के लिए स्कूलों की स्थिति सुधारना, शिक्षकों को बेहतर माहौल देना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। उनके मुताबिक राज्य में सिर्फ सरकारी योजनाओं की घोषणा करने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने पर ध्यान देना होगा।

शिक्षकों से बातचीत के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी जमीनी समस्याओं को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे अगली पीढ़ी तैयार करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए शिक्षा नीति बनाते समय शिक्षकों की समस्याओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से बिहार में शिक्षा को अपनी राजनीतिक मुहिम के प्रमुख मुद्दों में शामिल करते रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में बेहतर स्कूल और शिक्षा व्यवस्था होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की जरूरत कम होगी। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा और बिहार के युवाओं को अपने राज्य में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों की चर्चा बहुत होती है, लेकिन आम परिवारों की असली चिंता बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और बेहतर भविष्य को लेकर है। उनके मुताबिक राजनीतिक दलों को जनता की इन मूल समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के बीच यह भी संदेश देने की कोशिश की कि समाज में बदलाव की शुरुआत स्कूल और शिक्षा से हो सकती है। यदि बच्चों को शुरुआत से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तार्किक सोच और सही अवसर मिलें तो वे जाति और धर्म के आधार पर होने वाले विभाजन से ऊपर उठकर अपने भविष्य पर ध्यान दे सकते हैं।

उन्होंने अपने समर्थकों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की बात करने वाले लोग भी कई बार जातीय पहचान में उलझ जाते हैं। ऐसे में केवल किसी एक नेता या पार्टी के साथ जुड़ना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि समाज के लोग शिक्षा और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दें।

गया में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान प्रशांत किशोर का पूरा जोर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर रहा। उन्होंने शिक्षकों को बिहार के भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि राज्य को बदलने के लिए स्कूलों और बच्चों से शुरुआत करनी होगी।

प्रशांत किशोर की राजनीति में शिक्षा का मुद्दा पहले से ही प्रमुख रहा है। जन सुराज के गठन के बाद उन्होंने बिहार में शिक्षा, रोजगार और पलायन को लेकर लगातार अभियान चलाया है। हाल के दिनों में भी उन्होंने बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर कई कार्यक्रमों में अपनी बात रखी है।

उनका कहना है कि बिहार के युवाओं को सिर्फ सरकारी नौकरी की तैयारी तक सीमित रखने के बजाय ऐसी शिक्षा देनी होगी, जिससे वे अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तलाश सकें। इसके लिए स्कूल स्तर से ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना जरूरी है।

शिक्षक सम्मेलन में दिए गए उनके बयान को बिहार की मौजूदा राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। एक ओर राज्य में चुनावी और राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा और रोजगार लगातार प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। प्रशांत किशोर इन्हीं मुद्दों के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें समाज, देश और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी करें। उनके मुताबिक शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने-समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी है।

प्रशांत किशोर का संदेश साफ रहा कि बिहार में वास्तविक बदलाव के लिए जाति और धर्म की राजनीति से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और विकास पर ध्यान देना होगा। गया के शिक्षक सम्मेलन में उन्होंने शिक्षा को बिहार के भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी बताते हुए शिक्षकों को इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की बात कही।

 

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