उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अंबेडकर जयंती के मौके पर उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। कार्यक्रम के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माला चढ़ाने को लेकर इतनी भीड़ उमड़ पड़ी कि पूरी प्रतिमा ही फूल-मालाओं से ढक गई।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सपाई (समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता) पहुंचे थे। हर कोई सबसे पहले माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि देना चाहता था, जिसके चलते आपसी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ समय के लिए स्थिति अनियंत्रित भी हो गई, जिससे वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माला चढ़ाने की होड़ इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते अंबेडकर की प्रतिमा पूरी तरह से फूलों से ढक गई और पहचानना मुश्किल हो गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए हैरान करने वाला था।
इसी दौरान कार्यक्रम में एक पूर्व मंत्री भी अलग अंदाज में नजर आए। वे अपने साथ वाटर कूलर लेकर पहुंचे थे, ताकि कार्यक्रम में आए लोगों को पानी की सुविधा मिल सके। उनके इस कदम की कुछ लोगों ने सराहना की, तो कुछ ने इसे दिखावा भी बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन अचानक बढ़ी भीड़ के कारण स्थिति संभालना मुश्किल हो गया। हालांकि बाद में हालात सामान्य कर लिए गए।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर हर साल बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं, लेकिन इस बार की घटना ने आयोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े कार्यक्रमों में भीड़ प्रबंधन बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और आयोजकों की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि बेहतर व्यवस्था होती तो इस तरह की धक्का-मुक्की की स्थिति नहीं बनती।
कुल मिलाकर, अंबेडकर जयंती के इस कार्यक्रम में जहां एक ओर श्रद्धा का माहौल था, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था और हंगामे ने पूरे आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया।










