प्रधानमंत्री के बिना लोकसभा में पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव, सियासी विवाद बढ़ा, जानिए पूरा मामला

लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ। विपक्षी हंगामे के कारण प्रधानमंत्री ने जवाब नहीं दिया, कांग्रेस और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप जारी।

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब नहीं दिया। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते सत्र तनावपूर्ण रहा।

New Delhi: लोकसभा में गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन यह प्रक्रिया विवादास्पद रही। विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रस्ताव पर जवाब देने का मौका नहीं मिल सका। इससे पहले सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और अंततः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया। इस तरह, प्रधानमंत्री के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।

विपक्ष ने राहुल गांधी को बोलने से रोका

विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने से रोका गया। खासकर चीन गतिरोध और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के 2020 में लिखे गए अप्रकाशित संस्मरण के संदर्भ में राहुल गांधी अपने विचार रखना चाहते थे। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के रूप में देखा और सदन में लगातार विरोध प्रदर्शन किया।

कार्यवाही में व्यवधान

विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विरोध के चलते सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद भी विपक्षी नारों के बीच अध्यक्ष ने ध्वनि मत के जरिए प्रस्ताव पारित कर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देने के लिए उपस्थित नहीं हो पाए।

राज्यसभा में आरोप-प्रत्यारोप

लोकसभा की घटना के बाद राज्यसभा में भी सियासी बहस तेज हुई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है और सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज दबा रहा है।

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जेपी नड्डा का जवाब

राज्यसभा में भाजपा नेता और सदन के नेता जेपी नड्डा ने खरगे के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। नड्डा ने खरगे से कहा कि विपक्ष को अपनी पार्टी को "अज्ञानी और अहंकारी व्यक्ति का बंधक" बनने से बचाना चाहिए।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

खरगे ने नड्डा की टिप्पणियों की निंदा की और आरोप लगाया कि भाजपा सदस्यों पर संसद में बोलने को लेकर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि Lok Sabha में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि लोकतंत्र में हर सांसद को खुलकर अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि चीन के साथ भारत के गतिरोध और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण से जुड़ी है। संस्मरण में चीन के साथ पिछले कुछ घटनाक्रमों और सैनिक रणनीतियों का उल्लेख है। विपक्ष इस मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा करना चाहता था, लेकिन उन्हें कथित रूप से बोलने नहीं दिया गया।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच यह बहस संसद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। विपक्ष का कहना है कि संसद में हर सांसद को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने का अधिकार है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा के लिए तैयार है और व्यवधान पैदा करने वाले सदस्यों के कारण प्रक्रिया बाधित हुई।

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