पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा कदम, पांच नए विकास बोर्डों की घोषणा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पांच नए सांस्कृतिक और विकास बोर्ड बनाने की घोषणा की है। ये मुंडा, कोरा, डोम, कुंभकार और सदगोपे समुदाय।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पांच नए सांस्कृतिक और विकास बोर्ड बनाने की घोषणा की है। ये मुंडा, कोरा, डोम, कुंभकार और सदगोपे समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकार सुनिश्चित करेंगे।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्ड बनाने की घोषणा की है। यह कदम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। ममता बनर्जी ने कहा कि ये बोर्ड मुंडा, कोरा, डोम, कुंभकार और सदगोपे समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बनाए जाएंगे।

कमजोर समुदायों के लिए विकास की योजना

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ये नए बोर्ड समुदायों की अनूठी भाषाओं और परंपराओं की रक्षा करेंगे। साथ ही, ये बोर्ड शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार सुनिश्चित करेंगे। ममता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और इन समुदायों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि 2013 से राज्य सरकार ऐसे कई बोर्डों के माध्यम से कमजोर समुदायों के विकास के लिए काम कर रही है।

समावेशी प्रगति और सामाजिक न्याय

ममता बनर्जी ने अपने पोस्ट में लिखा कि मां, माटी, मानुष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मतलब है कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे। उनका लक्ष्य समावेशी प्रगति और अटूट समर्थन के माध्यम से हर व्यक्ति के जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए बोर्ड न केवल समुदायों के अधिकारों की रक्षा करेंगे बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देंगे।

यह घोषणा 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ ही समय पहले आई है। टीएमसी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पिछली बार भाजपा ने राज्य में 77 सीटें जीती थीं और इस बार भी पार्टी की नजर जीत पर है। 

राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा

ममता बनर्जी की यह पहल राष्ट्रपति मुर्मू की हाल ही में पश्चिम बंगाल यात्रा से जुड़ी राजनीतिक घटनाओं के बाद आई है। 7 मार्च को आयोजित एक संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने आयोजन स्थल और व्यवस्थाओं पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय के कई सदस्य दूरस्थ क्षेत्र में होने के कारण सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। 

इसके अलावा, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की अनुपस्थिति पर भी राष्ट्रपति ने सवाल उठाया था। इस राजनीतिक दबाव के बीच ममता का यह कदम समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने और चुनावी समर्थन जुटाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

पांच नए बोर्ड 

पांच नए बोर्ड निम्नलिखित समुदायों के लिए बनाए जाएंगे:

  1. मुंडा (अनुसूचित जनजाति)
  2. कोरा (अनुसूचित जनजाति)
  3. डोम (अनुसूचित जनजाति)
  4. कुंभकार (अन्य पिछड़ा वर्ग)
  5. सदगोपे (अन्य पिछड़ा वर्ग)

इन बोर्डों का मुख्य उद्देश्य इन समुदायों की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। ममता ने स्पष्ट किया कि ये बोर्ड पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करेंगे और राज्य के विकास में इन समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार इन बोर्डों के माध्यम से समुदायों के लिए नीतियों और योजनाओं को और प्रभावी बनाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में विशेष पहल की जाएगी। ममता ने कहा कि राज्य सरकार हर कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Leave a comment