आर अशोक का कांग्रेस पर हमला, बोले- चुनाव आयोग को सड़क पर प्रदर्शन से नहीं हटाया जा सकता

भाजपा नेता आर अशोक ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने 2028 में कर्नाटक में एनडीए की वापसी का दावा किया।

आर अशोक ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सड़क पर प्रदर्शन से नहीं हटाया जा सकता। अशोक ने 2028 में कर्नाटक में एनडीए की सत्ता में वापसी का दावा किया।

चित्रदुर्ग: कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर अशोक ने बुधवार को कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करती हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त को सड़क पर प्रदर्शन करके पद से नहीं हटाया जा सकता।

आर अशोक ने चित्रदुर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित भाजपा के सेवा संकल्प कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए निर्धारित नियम और कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। उनके मुताबिक, संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सड़क पर प्रदर्शन के जरिए हटाने की मांग करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस पर आर अशोक का निशाना

आर अशोक ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी चुनाव आयोग को चुनाव परिणामों के आधार पर अलग-अलग नजरिए से देखती है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस को बड़ी चुनावी जीत मिलती है, तब पार्टी को चुनाव आयोग की व्यवस्था सही लगती है, लेकिन चुनाव में हार मिलने पर वही पार्टी चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगती है।

भाजपा नेता ने कहा कि चुनाव आयोग देश की संवैधानिक संस्थाओं में से एक है और इसके कामकाज को लेकर असहमति होने पर भी निर्धारित लोकतांत्रिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना और उसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। अशोक के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

‘सड़क पर बैठकर नारे लगाने से समाधान नहीं’

आर अशोक ने कहा कि सड़क पर बैठकर नारे लगाने और विरोध करने से संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ उठाए गए मुद्दों का समाधान नहीं होगा। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं बताया।

उनका कहना था कि चुनाव आयोग के फैसलों या उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए कानूनी और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं। इसलिए विरोध का ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए जो संस्थागत प्रक्रियाओं के अनुरूप हो।

उन्होंने विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि इस पद से हटाने के लिए नियम और प्रक्रिया पहले से निर्धारित हैं।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर चुनिंदा तरीके से सवाल उठाते हैं।

अशोक के अनुसार, संवैधानिक और स्वतंत्र संस्थाओं की आलोचना करते समय राजनीतिक दलों को संस्थाओं की भूमिका और उनके लिए निर्धारित कानूनी ढांचे का सम्मान करना चाहिए।

हालांकि, ये आरोप आर अशोक की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा हैं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर इस बयान के संदर्भ में विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

2028 में कर्नाटक में एनडीए की वापसी का दावा

आर अशोक ने 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए राज्य में सत्ता में वापसी करेगा।

उन्होंने अपने दावे को बेहद आत्मविश्वासपूर्ण अंदाज में रखते हुए कहा कि जिस तरह 2028 में सूर्य और चंद्रमा के उदय को निश्चित माना जा सकता है, उसी तरह एनडीए सरकार की वापसी भी निश्चित है।

उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि तीन डी.के. शिवकुमार भी एक साथ आ जाएं, तब भी वे एनडीए की सत्ता में वापसी को नहीं रोक पाएंगे।

यह बयान कर्नाटक की आगामी विधानसभा राजनीति को लेकर भाजपा के आत्मविश्वास को दर्शाता है। हालांकि, 2028 के चुनाव परिणामों को लेकर फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

धार्मिक संतों पर कथित टिप्पणी को लेकर माफी की मांग

आर अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से धार्मिक संतों को लेकर उनकी कथित टिप्पणियों के लिए माफी मांगने की भी मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार ने धार्मिक मठों के प्रमुखों से संबंधित टिप्पणी की थी और बाद में कहा कि उनके बयान को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया।

अशोक ने शिवकुमार पर अपने कथित बयान से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले उन्होंने लोगों से मठों के प्रमुखों की सेवा करने की बात कही और अब वह अपने शब्दों को अलग संदर्भ में बता रहे हैं।

भाजपा नेता ने कांग्रेस पर हिंदू धार्मिक नेताओं के प्रति सम्मान नहीं दिखाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने शिवकुमार को चुनौती दी कि यदि वे अन्य धर्मों के नेताओं की सभाओं में भी इसी तरह की टिप्पणी कर सकते हैं।

शिवकुमार ने दी अपनी टिप्पणी पर सफाई

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को अपनी टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि वीरशैव संतों से जुड़े एक हालिया कार्यक्रम में उन्होंने कुछ मुद्दों पर बात की थी, लेकिन उनका उद्देश्य किसी भी स्वामी का अनादर करना नहीं था।

शिवकुमार के अनुसार, उनकी बात धार्मिक नेताओं से नहीं, बल्कि वहां मौजूद लोगों और मतदाताओं से थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोगों से मतदाताओं की सेवा करने की अपील की थी और संतों से मतदाताओं की रक्षा करने को कहा था, जबकि सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग देने की बात कही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में संतों के प्रति उनसे अधिक सम्मान रखने वाला शायद ही कोई हो और वह विद्वानों का भी सम्मान करते हैं।

जाति और धर्म से ऊपर सम्मान की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हमेशा धार्मिक संतों का सम्मान किया है और सभी लोगों का सम्मान करने के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं, चाहे उनकी जाति या धर्म कुछ भी हो।

शिवकुमार ने खुद को धार्मिक व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें अपने धर्म की शक्ति पर विश्वास है और वह हमेशा संतों के चरणों में नमन करते हैं।

इस स्पष्टीकरण के बावजूद भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। आर अशोक ने जहां शिवकुमार से माफी की मांग की, वहीं मुख्यमंत्री ने अपनी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान का उद्देश्य धार्मिक नेताओं का अपमान करना नहीं था।

सेवा संकल्प कार्यक्रम में शामिल हुए अशोक

आर अशोक चित्रदुर्ग में भाजपा के सेवा संकल्प कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम के बाद अशोक ने एक साथ कई राजनीतिक मुद्दों पर कांग्रेस को घेरा। इनमें चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर कांग्रेस का रुख, राहुल गांधी की संवैधानिक संस्थाओं पर कथित टिप्पणियां, 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव और धार्मिक संतों से जुड़ा विवाद शामिल रहा।

इस तरह आर अशोक के बयान ने कर्नाटक की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया है। आने वाले समय में चुनाव आयोग, एसआईआर और राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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