राहुल गांधी का दावा: 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने CBSE सिस्टम में खामियां उजागर कीं

राहुल गांधी ने सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि 18 साल के छात्र ने CBSE OSM सिस्टम की गड़बड़ी उजागर कर सिस्टम पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो साझा किया। उन्होंने दावा किया कि सार्थक ने CBSE के OSM सिस्टम में गड़बड़ी उजागर कर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को सामने लाकर युवाओं की जीत दिखाई।

नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत के साथ हुई अपनी मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया, जिसमें उन्होंने CBSE की परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली और डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया से जुड़ी कथित खामियों पर सवाल उठाए। यह मुलाकात 2 जून को दिल्ली में हुई थी और इसका वीडियो बाद में सार्वजनिक किया गया।

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली पर सवाल

यह पूरा मामला CBSE की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ा है। आरोप है कि इस प्रणाली में तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियां हैं, जिससे छात्रों के अंकों की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था की डिजिटल प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।

छात्र सार्थक सिद्धांत की जांच और शुरुआती खुलासे

रांची निवासी 18 वर्षीय सार्थक सिद्धांत ने दावा किया कि जब उन्हें री-इवैल्यूएशन के दौरान अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं, तो उसमें कुछ अनियमितताएं दिखाई दीं। इसके बाद उन्होंने CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया और संबंधित टेंडर प्रणाली की गहराई से जांच शुरू की।

टेंडर प्रक्रिया और एडटेक कंपनी COEMPT पर उठे सवाल

सार्थक के अनुसार उन्होंने पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी एडटेक कंपनी COEMPT के चयन और टेंडर प्रक्रिया में कई बदलाव हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर नियमों में बार-बार संशोधन किए गए, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

राहुल गांधी और सार्थक सिद्धांत की बातचीत

वीडियो में राहुल गांधी और सार्थक सिद्धांत के बीच शिक्षा व्यवस्था, तकनीकी मूल्यांकन और सिस्टम की जवाबदेही पर लंबी चर्चा हुई। सार्थक ने कहा कि नागरिकों को सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का अधिकार है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

राहुल गांधी का दावा: 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने CBSE सिस्टम में खामियां उजागर कीं

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और राजनीतिक टिप्पणी

राहुल गांधी ने इस बातचीत के बाद टिप्पणी करते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय छात्र ने सिस्टम में ऐसी खामियां उजागर की हैं, जिन्हें बड़े संस्थान भी नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने इसे युवाओं की जीत बताते हुए शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

CBSE का आधिकारिक पक्ष

CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह नियमों के अनुसार काम करती है। बोर्ड का कहना है कि डिजिटल OSM सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है और मानवीय त्रुटियों में कमी आई है। CBSE ने सोशल मीडिया पर फैल रही कई दावों को भ्रामक बताया है।

COEMPT एडटेक कंपनी पर विवाद

COEMPT एडटेक कंपनी, जो डिजिटल मूल्यांकन सेवाएं प्रदान करती है, इस पूरे विवाद के केंद्र में है। आरोपों के अनुसार, कंपनी के चयन और टेंडर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर किसी भी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।

छात्रों की शिकायतें और डिजिटल मूल्यांकन पर बहस

इस विवाद के बाद कई छात्रों ने भी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। री-इवैल्यूएशन, स्कैनिंग गुणवत्ता और ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

सोशल मीडिया पर बढ़ती बहस

राहुल गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे शिक्षा सुधार की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करार दे रहे हैं।

आगे की संभावनाएं और शिक्षा व्यवस्था पर असर

इस पूरे मामले के बाद उम्मीद है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा और अधिक पारदर्शिता पर जोर बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार जरूरी है, लेकिन साथ ही निगरानी और जवाबदेही भी मजबूत करनी होगी।

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