राहुल गांधी का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष; आज जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। SIR और मतदाता सूची विवाद के बीच आज जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन की तैयारी है।

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहा है। गुरुवार को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन की तैयारी है।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों और नेताओं ने पिछले दो दिनों से दिल्ली में प्रदर्शन किया है और अब गुरुवार, 8 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी है। विपक्ष का कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को होने वाले प्रदर्शन में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के भी शामिल होने की संभावना है। INDIA ब्लॉक के कई अन्य नेता और सांसद भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले सकते हैं। यह आंदोलन चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच हो रहा है।

जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश, पुलिस ने रोका

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें निर्धारित रास्ते पर आगे बढ़ने से रोक दिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। Reuters के अनुसार, 7 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को दो दिनों के भीतर तीसरी बार हिरासत में लिया गया। 

इससे एक दिन पहले भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जंतर-मंतर के करीब पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने से रोका गया। दूसरी ओर, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।

6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च

विपक्ष का यह आंदोलन 6 अक्टूबर से और अधिक मुखर हुआ। INDIA ब्लॉक के बड़ी संख्या में सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। प्रदर्शनकारियों ने SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए।

पुलिस ने मार्च को रास्ते में रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी परिसर में कई घंटे तक धरना दिया। बाद में इस मामले में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज की। शिकायत आकाशवाणी कार्यालय की ओर से किए जाने की बात सामने आई है।

10 अक्टूबर को राष्ट्रपति से मिलने का अनुरोध

विपक्ष ने अब इस मामले को राष्ट्रपति के सामने उठाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने 10 अक्टूबर को राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा है। विपक्षी नेताओं की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी चिंताएं रखी गई हैं।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। हालांकि, इन आरोपों को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा खारिज कर चुके हैं।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए और कई योग्य मतदाताओं के नाम हटने की आशंका पैदा हुई। विपक्ष विशेष रूप से नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठा रहा है।

The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े कुछ प्रशासनिक फैसलों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा था कि पिछले वर्ष के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। 

सुप्रीम कोर्ट में भी उठा मामला

SIR से जुड़े विवाद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या SIR से संबंधित कुछ फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले लिए थे या वे तीन सदस्यीय आयोग की सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा थे। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि कानून के अनुरूप सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर संबंधित आदेशों की समीक्षा की जा सकती है। 

हालांकि, अदालत की कार्यवाही को विपक्ष की राजनीतिक मांगों के समान नहीं माना जा सकता। CEC के इस्तीफे की मांग राजनीतिक दलों का रुख है, जबकि SIR से संबंधित कानूनी और संवैधानिक सवालों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।

विपक्ष का आरोप, चुनाव आयोग और भाजपा का इनकार

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलावों से विपक्षी दलों को नुकसान पहुंच सकता है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बनाया है।

वहीं, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा का उद्देश्य रिकॉर्ड को अपडेट करना और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है। सत्तारूढ़ भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया है। 

आगे और तेज हो सकता है आंदोलन

8 अक्टूबर को देशभर में कांग्रेस के स्तर पर विरोध प्रदर्शन की योजना की खबरें सामने आई हैं। दिल्ली में राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं का जंतर-मंतर प्रदर्शन इस राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। विपक्ष एक तरफ CEC के इस्तीफे और SIR पर जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका और प्रक्रिया का बचाव कर रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल सड़क पर होने वाले प्रदर्शनों तक सीमित रहने के बजाय संसद, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं के बीच बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। 10 अक्टूबर को राष्ट्रपति से प्रस्तावित मुलाकात और विपक्ष की आगे की रणनीति पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

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